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UP: आज से चैत्र नवरात्र शुरू, मां शैलपुत्री का होगा पूजन और ईरान-अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए यज्ञ; जानें सब

Thu, 19 Mar 2026 12:18 AM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Thu, 19 Mar 2026 12:18 AM IST
सार

मंदिरों में विशेष सजावट और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा होगी। 

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UP: Navratri Begins Tomorrow Worship of Goddess Shailputri to Take Place; Yajna to be Performed for the End of
नवरात्रि रंग पहला दिन - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

आज से चैत्र नवरात्र शुरू हैं। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें प्रथम स्वरूप के रूप में मां शैलपुत्री का पूजन और कलश स्थापना पहले दिन की जाती है। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। इनका वाहन वृषभ (बैल) है और वे दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं। मां शैलपुत्री स्थिरता, शक्ति और मूलाधार चक्र की देवी मानी जाती हैं।

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माता शैलपुत्री के मस्तक पर अर्धचंद्र है, वे बैल पर सवार होती हैं और सफेद वस्त्र धारण करती हैं। पहले दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) के बाद माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इन्हें गाय के घी या दूध से बनी खीर का भोग लगाया जाता है। 
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देवी को प्रसन्न करने के लिए ऊं देवी शैलपुत्र्यै नमः... का पाठ किया जाता है। इनकी पूजा से जीवन में स्थिरता, दृढ़ता और सुख-शांति आती है। पौराणिक कथा के अनुसार, पिछले जन्म में वे प्रजापति दक्ष की पुत्री सती थीं और शिवजी की पत्नी थीं। बाद में उन्होंने हिमालय के घर जन्म लिया।

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दुर्गा सप्तशती के पाठ से पूरी होती है कामना

दुर्गा सप्तशती के पाठ और मंत्रों से रोग, बाधा, शोक, विपत्ति, भय और पाप का नाश होता है। सुख सौभाग्य, शक्ति, संतान, ऐश्वर्य, धन प्राप्त होता है। इसमें कुल 13 अध्याय हैं जिनके पाठ से सभी प्रकार की कामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, नवरात्र में नवार्णमंत्र की साधना और दुर्गा सप्तशती का पाठ बहुत फलदायी माना गया है। 

नवरात्र में देवी मां को नौ दिनों में अलग-अलग नैवेद्य चढ़ाने से भी मनोकामना की पूर्ति होती है। प्रथम दिन- गो घृत अर्पित करने से आरोग्य की प्राप्ति, द्धितीय दिन शक्कर से दीघार्यु की प्राप्ति, तृतीय दिन दूध से दुखों की निवृत्ति, चतुर्थ दिन मालपुआ अर्पित करने से निर्णय शक्ति का विकास होता है। 

पांचवें दिन केला अर्पित करने से बुद्धि का विकास, छठे दिन मधु अर्पित करने से आकर्षण व सुंदरता बढ़ती है, सप्तमी को गुड़ चढ़ाने से शोकमुक्ति और विपत्तियों से रक्षा होती है। अष्ठमी को नारियल चढ़ाने से हर प्रकार की पीड़ा का शमन, नवमी पर धान अर्पित करने से लोक परलोक का सुख प्राप्त होता है।

 

मंदिरों का हुआ अलौकिक शृंगार, आज गूंजेंगे मां के जयकारे

आज से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। ऐसे में मां स्वागत में मंदिरों का अलौकिक शृंगार किया गया है। प्राचीन मंदिरों को पीले और केसरिया फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। बीकेटी सि्थत चंद्रिका देवी मंदिर से लेकर चौक सि्थत मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर, शास्त्रीनगर सि्थत श्रीदुर्गा जी मंदिर में नवरात्र की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारों के लिए विशेष शेड और ठंडे पानी का प्रबंध किया गया। साथ ही, भक्तों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।

हर दिन अलग-अलग रूपों में देंगी मां काली दर्शन

चौक सि्थत मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में मां का हर दिन अलग-अलग फलों और फूलों से शृंगार किया जाएगा। मंदिर प्रबंधक देवराज सिंह ने बताया मां काली किसी दिन मेवे के शृंगार में दर्शन देंगी तो किसी दिन फलों से सजी दिखेंगी। मां के स्वागत तैयारियां पूरी कर ली गई है। पूरी नवरात्र दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों और कीर्तन-भजन आयोजित किए जाएंगे।

 

फूलों से सजा मां संदोहन देवी का दरबार

चौपटिया सि्थत श्री संदोहन देवी मंदिर को फूलों से सजाया गया है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष पवन कुमार सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को कलश की स्थापना की जाएगी। सुबह हवन-पूजन होगा और शाम को साईं संध्या का आयोजन होगा। संकरी गलियों के बीच स्थित इस मंदिर में भक्तों के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है। यहां के गर्भ गृह को सुगंधित मोगरे और गुलाब के फूलों से महकाया गया है।

ईरान और अमेरिका युद्ध समाप्ति के लिए होगा यज्ञ

शास्त्रीनगर श्री दुर्गा की मंदिर में बुधवार को ज्वालादेवी मंदिर जम्मू से ज्योति यात्रा मंदिर परिसर पहुंची। यहां पर विधि-विधान से ज्योति की स्थापना की गई। मंदिर पुजारी राजेंद्र ने बताया कि नवरात्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर पहुंचने वाले सभी भक्तों को मां का ध्वज दिया जाएगा। नौ दिन तक भजन और विशेष शृंगार किए जाएंगे। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध की समाप्ति के लिए विशेष यज्ञ किया जाएगा। इसमें विश्व शांति की कामना की जाएगी।

घटस्थापना के शुभ मुहूर्त

सुबह 6:52 से पूर्वाह्न 10:13 बजे तक का मुहूर्त श्रेष्ठ है। इसके अतिरिक्त, अभिजित मुहूर्त दिन में पूर्वाह्न 11:50 से दोपहर 12:38 बजे तक भी शुभ रहेगा। घटस्थापना देवी शक्ति के आवाहन का प्रतीक है। मार्कंडेय पुराण के देवी महात्म्य में बताया गया है कि देवी दुर्गा ही ब्रह्मांड की मूल शक्ति हैं। नवरात्र उनकी आराधना का सबसे पवित्र समय है।

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