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यूपी: प्रदेश में विधायक- सांसदों का दर्द, 10 साल में आए 15 शासनादेश; फिर भी अफसर नहीं उठाते हमारे फोन
Thu, 07 May 2026 10:57 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 07 May 2026 10:57 PM IST
सार
MLA in UP: यूपी में बीते कुछ वर्षों में तमाम सारे आदेशों के बावजूद प्रदेश के विधायकों-सांसदों के फोन अधिकारी नहीं उठा रहे हैं।
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सीएम योगी खुद इस संबंध में सदन में बोल चुके हैं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
तमाम आदेशों के बावजूद अफसर माननीयों का फोन नहीं उठा रहे हैं। सांसदों, विधायकों के प्रोटोकॉल का पालन भी नहीं हो रहा है। हैरानी की बात है कि बीते दस वर्षों में इस बाबत 15 शासनादेश जारी किए जा चुके हैं। शीतकालीन सत्र में भी यह मुद्दा उठा था, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने अफसरों को इस बाबत हिदायत भी दी थी। वहीं सदन में यह मामला उठने के बाद मंत्री असीम अरुण ने अपने प्रभार वाले तीन जिलों में संवाद सेतु एप की शुरुआत की थी।
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प्रमुख सचिव द्वारा बृहस्पतिवार को जारी शासनादेश में कहा गया है कि पुराने शासनादेशों और तमाम दिशा-निर्देशों के बावजूद सांसदों और विधायकों के प्रोटोकॉल का अनुपालन नहीं होने और उनका फोन नहीं उठाने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इससे संबंधित प्रकरण सदन, पीठ और संसदीय अनुश्रवण समिति के समक्ष भी लगातार उठाए जा रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ अधिकारी शासन के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जो अत्यंत खेदजनक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि माननीयों के फोन नंबर को वह अपने मोबाइल में सेव करें।
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यदि व्यस्तता की वजह से फोन रिसीव नहीं कर पाते हैं तो कॉल बैक करें और उनके प्रकरणों को गंभीरता से सुनकर निस्तारण करें। यदि वह जनहित के कार्य के लिए उनसे भेंट करने आते हैं तो अपनी सीट पर खड़े होकर सम्मान प्रदर्शित करें। उनसे सम्मानपूर्वक जल ग्रहण करने का आग्रह करें। उनकी समस्या को ध्यानपूर्वक सुनने के बाद उसका समाधान करें और सम्मानपूर्वक विदा करें। उन्होंने कहा कि शासन के निर्देशों का पालन नहीं करना उप्र राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली के प्रावधानों के विपरीत है, जिसका उल्लंघन करने पर सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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विधानसभा सत्र का सत्रावसान
बीती 30 अप्रैल को महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर आहूत विधानमंडल के विशेष सत्र का सत्रावसान कर दिया गया है। राज्यपाल की अनुमति के बादे प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे ने बृहस्पतिवार को इसका आदेश जारी कर दिया।