यूपी: प्रदेश के एक ही परिवार के 12 लोगों को तेलंगाना में बनाया बंधुआ मजदूर, सीएस, डीजीपी और डीएम को नोटिस जारी
तेलंगाना के मेदचल-मलकाजगिरी जिले में उत्तर प्रदेश के एक परिवार के 12 सदस्यों को करीब एक साल तक कथित तौर पर बंधुआ मजदूर बनाए रखने के मामले में एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मुख्य सचिव, डीजीपी, जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त से चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
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तेलंगाना के मेदचल-मलकाजगिरी जिले में यूपी के 12 सदस्यीय परिवार को करीब एक साल तक बंधुआ मजदूर बनाकर रखने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने तेलंगाना के मुख्य सचिव, डीजीपी, मेदचल-मलकाजगिरी के जिलाधिकारी और साइबराबाद के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बचुपल्ली स्थित एक निर्माण स्थल पर परिवार से सातों दिन काम कराया जाता था। उन्हें बहुत कम मजदूरी दी जाती थी। आरोप है कि मजदूरों के साथ मारपीट और गालीगलौज की जाती थी। उनके आने-जाने पर भी रोक थी। परिवार को असुरक्षित और गंदे माहौल में रखा गया था। एक सुपरवाइजर ने उनके सामान को भी बंद कर दिया था। सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायत पर राजस्व और श्रम विभाग की टीम ने परिवार को मुक्त कराया।
आयोग ने अधिकारियों से सभी 12 पीड़ितों की मौजूदा स्थिति, उनकी सुरक्षा, रहने, खाने और इलाज की व्यवस्था की जानकारी मांगी है। नियोक्ता और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच की प्रगति की जानकारी भी मांगी गई है। आयोग ने जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि सभी पीड़ितों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त करने और उनके पुनर्वास की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से की जाए।
पात्र पीड़ितों को बंधुआ मजदूर मुक्ति प्रमाणपत्र देने और केंद्र की बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना-2021 के तहत प्रत्येक को 30 हजार रुपये तक की तत्काल आर्थिक सहायता देने की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है। पीड़ितों के दीर्घकालीन पुनर्वास की योजना भी मांगी गई है। यदि पीड़ित उत्तर प्रदेश वापस जाना चाहते हैं तो संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर उन्हें वापस भेजने की व्यवस्था करने को कहा गया है।