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मायावती बोलीं: सपा को वोट तो पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों का चाहिए, वो टिकट परिवार और पूंजीपतियों को देते हैं
Fri, 02 Oct 2026 10:29 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 02 Oct 2026 10:29 AM IST
सार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें वोट आम जनता का चाहिए लेकिन वो टिकट पूंजीपतियों और परिवार के लोगों को देते हैं। जनता को उनसे सावधान रहना चाहिए।
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बसपा सुप्रीमो मायावती।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
बसपा सुप्रीमो मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि सपा को वोट तो पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यकों का पर वो टिकट परिवार और पूंजीपतियों को देते हैं। जनता को इस बात को समझना चाहिए कि सपा का पीडीए एक छलावा है। वहीं, उन्होंने ये भी कहा कि राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा उम्मीदवार सिर्फ फेस सेविंग के लिए ही होगा।
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एक्स पर जारी किए गए बयान में उन्होंने कहा कि जैसाकि यह सर्वविदित है कि बसपा किसी भी छोटे-बड़े चुनाव में विरोधी पार्टियों में भी खासकर समाजवादी पार्टी की तरह अपने परिवार, सगे-सम्बंधी, भाई-भतीजों, करीबी रिश्ते-नातेदारों के साथ ही विशेषकर बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों आदि को टिकट नहीं देती है, यानी चुनावों में उनके धनबल का सहारा नहीं लेती है, बल्कि पार्टी में कार्यरत सर्वसमाज में से केवल गरीब, मध्यम वर्ग व कमजोर तबकों के कर्मठ अम्बेडकरवादी लोगों को ही अपनी पार्टी का उम्मीदवार बनाती है, अर्थात बीएसपी की राजनीति परिवारवाद व धनबल से मुक्त व पाक-साफ है, जबकि वहीं दूसरी तरफ सपा ठीक इसके विपरीत कार्य करती है, जो अपने आपको समाजवादी व कथित ’पीडीए’की पार्टी होने का राजनीतिक ढोंग व छलावा करती हुई ज्यादा नजर आती है।
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उन्होंने आगे कहा कि इसका एक और खास व ताजा उदाहरण यह है कि सपा ने यूपी से राज्यसभा के लिये द्विवार्षिक चुनाव में रामगोपाल यादव को फिर से पर्चा भरवाया है जो सपा मुखिया के नजदीकी रिश्तेदार हैं, जबकि सपा ने अपनी पार्टी का दूसरा उम्मीदवार धनराज परिमल नाथवानी को बनाया है, जो चर्चित उद्योग घराने से सम्बद्ध हैं। लोगों की राय में सपा का तीसरा उम्मीदवार पहले की तरह संभवतः 'फेस सेविंग' व चुनाव हारने के लिये होगा तो इस प्रकार का है सपा, उसका 'पीडीए' व उस पार्टी का समाजवाद अर्थात् सपा को चुनाव में वोट तो ’पीडीए’ का चाहिये, लेकिन सांसद व विधायक आदि ज़्यादातर अपने परिवार वालों को व बड़े-बड़े पूंजीपतियों को बनाती है। अतः जनता इनके 'पीडीए’ के बहकावे में ना आये तो यह सही होगा।
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उन्होंने कहा कि वास्तव में यह कोई नई बात नहीं है बल्कि सपा का इस प्रकार का दोहरा चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा से ही रहा है और इसीलिये खासकर अपरकास्ट समाज के गरीबों तथा 'बहुजन समाज' अर्थात दलितों, आदिवासियों, अति-पिछड़ों, मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के समस्त लोगों को अब ख़ासकर यूपी विधानसभा आमचुनाव से पहले ही जरूर पूरी तरह से सचेत व सतर्क हो जाना चाहिये कि उन सबका हित अम्बेडकरवादी बीएसपी में ही निहित व सुरक्षित है, बाकी सब छलावा ही छलावा है।