UP: राम मंदिर के दान में गबन पर बड़ा खुलासा, जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी का कर्मी ही निकला मास्टरमाइंड
राम मंदिर की दानराशि में कथित गबन मामले में जांच के दौरान एक पदाधिकारी का कर्मी मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अधिकांश रकम वापस कराई जा चुकी है। मामले की गूंज दिल्ली तक पहुंची है। वित्तीय पारदर्शिता और दान के पूरे लेखे-जोखे को सार्वजनिक करने की मांग भी उठी है।
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अयोध्या में राम मंदिर के दान की रकम चोरी होने के मामले में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी का कर्मी मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस मामले के उजागर होने के बाद सतर्क हुईं खुफिया एजेंसियों की पड़ताल में इसका पता चला है। हालांकि जांच को फिलहाल ट्रस्ट के दायरे तक की सीमित रखने की वजह से एजेंसियां अपने कदम आगे नहीं बढ़ा रही हैं। पुलिस से भी कोई शिकायत नहीं की गई है। यह भी सामने आया है कि चोरी की गई अधिकांश रकम को वापस लौटाया जा चुका है।
सूत्रों की मानें तो इस प्रकरण की गूंज दिल्ली तक होने के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जवाब-तलब भी किया गया है। जिस कर्मी को चिन्हित किया गया है, उससे भी पूछताछ की गई, जिसके बाद चुराई गई रकम को वापस कराया गया। प्रदेश पुलिस के कई वरिष्ठ अधिकारी भी ट्रस्ट के पदाधिकारियों के संपर्क में हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं।
यह भी सामने आया है कि दान के रूप में मिलने वाली रकम को कई दिनों से गायब किया जा रहा था। इसी वजह से अब इस प्रकरण की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की तैयारी है ताकि इसमें संलिप्त लोगों के नाम सामने आ सकें।
राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय लेखे-जोखे को सार्वजनिक करने की मांग
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक नया पत्र प्रधानमंत्री को भेजा गया है। पत्र में ट्रस्ट की स्थापना से अब तक प्राप्त समस्त दान, आय-व्यय, बैंक खातों, भूमि खरीद-फरोख्त और अन्य संपत्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक किए जाने की मांग की गई है। भाजपा नेता ने इससे पहले नौ जून को पीएम को पत्र भेजकर राम मंदिर की दानराशि में गबन प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की थी।
डॉ. रजनीश सिंह की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में कहा गया है कि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए धन, आभूषण और अन्य प्रकार के दान समर्पित किए हैं।
अब तक का पूरा विवरण सार्वजनिक करें
इसलिए प्रत्येक भक्त को यह जानने का अधिकार है कि उसके दिए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। पत्र में प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को निर्देशित किया जाए कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर स्थापना काल से अब तक का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
इसमें समर्पण निधि अभियान से प्राप्त धनराशि, दान पात्रों और ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त दान, सोना-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का लेखा-जोखा, सभी बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन, भूमि खरीद-बिक्री के अभिलेख, मंदिर निर्माण एवं प्रशासनिक खर्च का मदवार विवरण तथा ऑडिट रिपोर्ट और लेखा परीक्षण रिपोर्ट शामिल हों।