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UP Chunav Results 2024: देश की तीसरी बड़ी पार्टी बनी सपा... इतिहास का सबसे शानदार प्रदर्शन; ये रणनीति आई काम

Wed, 05 Jun 2024 09:13 AM IST
शाहरुख खान अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 05 Jun 2024 09:13 AM IST
सार

समाजवादी पार्टी देश की तीसरी बड़ी पार्टी बन गई है। सपा का अब तक के इतिहास का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। धार्मिक मुद्दों के बजाय जातीय गोलबंदी की रणनीति से सपा को सफलता मिली है। कांग्रेस का साथ मिलने से राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी जनता का भरोसा जीता।

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Up Lok Sabha Election Result SP Becomes Third Largest Party Makes History News in Hindi
UP Election Result 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा ने लोकसभा आम चुनाव में अब तक के अपने इतिहास में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। उसने कुल 37 सीटें जीतीं। इस तरह सपा देश की तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई है। धार्मिक मुद्दों के बजाय जातीय गोलबंदी और यादवों-मुस्लिमों पर कम दांव की रणनीति से सपा को यह सफलता मिली।
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सपा ने पिछला लोकसभा चुनाव बसपा के साथ लड़ा था। तब उसे महज पांच सीटें मिली थीं। राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण यूपी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विपक्ष के अभियान का नेतृत्व किया। सपा ने गठबंधन के तहत 62 सीटों पर चुनाव लड़ा। 
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17 सीटें कांग्रेस और एक सीट तृणमूल कांग्रेस को दी। सीट शेयरिंग की यह रणनीति काफी कारगर साबित हुई। कांग्रेस के साथ साझेदारी करने के चलते सपा मतदाताओं को यह मनोवैज्ञानिक संदेश देने में सफल रही कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विकल्प मौजूद है।
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2019 के चुनाव में पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ही सपा से अलग थे, लेकिन इस बार परिवार की एकजुटता से भी अच्छा संदेश गया। सपा ने प्रत्याशी तय करने में पीडीए फार्मूले का भी पूरा ध्यान रखा। अपना आधार वोट माने जाने वाले यादवों और मुस्लिमों से ज्यादा कुर्मी बिरादरी के प्रत्याशी उतारे। 

ब्राह्मण व ठाकुर समेत सामान्य जाति के प्रत्याशियों को भी प्रतिनिधित्व दिया। अखिलेश का यह दांव बिल्कुल सही बैठा और पार्टी को अप्रत्यशित सफलता मिली। अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयानों से खुद को और अपनी पार्टी को दूर रखा। बहुत ही सधे अंदाज में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। 

 

इतना ही नहीं इटावा में विशाल मंदिर का निर्माण प्रारंभ कराया। इससे भाजपा को धार्मिक मुद्दों पर उन्हें घेरने का मौका नहीं मिला। साथ ही जातीय गोलबंदी के लिए संविधान और आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता दी। पेपर लीक और अग्निवीर के सहारे बेरोजगारी की समस्या से बड़ी चोट की। इस रणनीति ने उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाया।

 

2004 में जीती थीं 35 सीटें
सपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा आम चुनाव में 35 सीटें जीती थीं। इस लोकसभा चुनाव में सपा उससे भी अच्छा प्रदर्शन करने की ओर बढ़ रही है।

मुलायम के गढ़ में पूरी रफ्तार से दौड़ी साइकिल
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के गढ़ में साइकिल पूरी गति से दौड़ी। यादवलैंड की छह सीटों में मैनपुरी का रुतबा बरकरार रहा, जबकि सपा ने भाजपा से चार सीटें छीन लीं। सभी सीटों पर वोटबैंक बढ़ाने में भी कामयाब रही, जबकि फर्रुखाबाद में भाजपा तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने में कामयाब रही।

 

मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव था। ऐसे में भाजपा ने इस क्षेत्र पर कब्जा जमाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी यहां जनसभा की और श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा उठाया। इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जनसभाएं कीं, लेकिन सपा ने टिकट बंटवारे में सोशल इंजीनियरिंग पर फोकस किया। हमेशा भाजपा का साथ देने वाले शाक्य और दोहरे बिरादरी के मतदाताओं को भी पार्टी से जोड़ा। यह कारगर साबित हुआ। 


 

मैनपुरी में डिंपल यादव 2.21 लाख मतों से विजयी रहीं। उन्हें 56.79 फीसदी वोट मिले और भाजपा को 35.76 फीसदी। वर्ष 2019 में सपा को 53.75 फीसदी और भाजपा को 44.09 फीसदी वोट मिले थे। हालांकि 2022 के उपचुनाव में यहां सपा को 64.08 फीसदी वोट मिले थे। इस तरह सामान्य चुनाव में सपा का वोटबैंक बढ़ा है। इटावा में सियासी तौर पर कठेरिया बनाम दोहरे बिरादरी के बीच संघर्ष होता है। भाजपा ने सांसद रामशंकर कठेरिया को दोबारा मौका दिया तो सपा ने बसपा से आए जितेंद्र सिंह दोहरे पर दांव लगाया और करीब 58 हजार वोट से चुनाव जीत लिया।

 

यहां सपा को 47 और भाजपा को 41.82 फीसदी वोट मिले। वर्ष 2019 में सपा को 44.53 और भाजपा को 50.80 फीसदी वोट मिले थे। इसी तरह कन्नौज में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 1.70 लाख से जीते हैं। उन्हें 52.74 फीसदी और भाजपा के निवर्तमान सांसद सुब्रत पाठक को 38.71 फीसदी वोट मिले। वर्ष 2019 में भाजपा को 49.37 और सपा को 48.29 फीसदी वोट मिले थे। फिरोजाबाद में सपा के अक्षय प्रताप यादव ने भाजपा प्रत्याशी विश्वदीप सिंह को करीब 89 हजार वोट से हराया। 

 

यहां भाजपा ने सांसद चंद्रसेन जादौन का टिकट काट दिया था। ऐसे में यहां भितरघात का भी सपा को फायदा मिला। सपा को 49.09 और भाजपा को 40.98 फीसदी मत मिले। वर्ष 2019 में सपा को 43.41 और भाजपा को 46.09 फीसदी वोट मिले थे। एटा में राजवीर सिंह राजू को सपा के देवेश शाक्य ने करीब 25 हजार वोटों से हराया। यहां सपा को 47.07 और भाजपा को 44.34 फीसदी वोट मिले, जबकि वर्ष 2019 में भाजपा को 54.52 और सपा को 42.25 फीसदी वोट मिले थे।

 

फर्रुखाबाद ने लगाई हैट्रिक
फर्रुखाबाद से मुकेश राजपूत 2678 वोट से जीतकर तीसरी बार सांसद चुने गए हैं। उन्हें 47.2 फीसदी और सपा के डाॅ. नवल किशोर शाक्य को 46.94 फीसदी वोट मिले। वर्ष 2019 में भाजपा को 56.82 और बसपा को 34.72 फीसदी एवं कांग्रेस को 5.72 फीसदी वोट मिले थे। बसपा के मनोज अग्रवाल इस चुनाव में सपा के साथ थे।
 
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