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UP: कद्दावर नेता... फिर भी बुनियादी समस्याओं में उलझा कैसरगंज, 80 हजार की आबादी हर साल बाढ़ से होती प्रभावित

Sun, 07 Apr 2024 01:25 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 07 Apr 2024 01:25 PM IST
सार

कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से कई कद्दावर नेता हैं। फिर कैसरगंज बुनियादी समस्याओं में उलझा है। 80 हजार से अधिक की आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है।  

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UP Lok Sabha Election 2024 Piles of basic problems in Kaiserganj parliamentary constituency
बहराइच में शिवपुर मार्ग पर बाढ़ का पानी।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से कई कद्दावर नेताओं का कद तय करने के बाद आज भी यहां के लोग कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। यहां के मतदाताओं ने सभी दलों पर भरोसा जताकर संसद तक जरूर भेजा, लेकिन किसी भी दल के सांसद ने कैसरगंज की बुनियादी समस्या से लोगों को निजात दिलाने की पहल नहीं की। 
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हालात यह है कि आज भी कैसरगंज की करीब 80 हजार से अधिक की आबादी प्रत्येक वर्ष बाढ़ की चपेट में आकर अपना सब कुछ गवांने को विवश है। वहीं कैसरगंज और जरवलरोड कस्बा के लोगों को आज तक रोडवेज बस स्टेशन की छत तक नसीब नहीं हो सकी। यहां संपर्क मार्ग का आभाव है। सड़कें भी जर्जर हैं। कई गांव आज भी विद्युत विहिन हैं। अब एक बार फिर चुनावी समर में नेता सक्रिय होने लगे हैं। हालांकि अभी तक यहां किसी भी दल ने प्रत्याशी नहीं उतारा है।
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रोडवेज बस स्टेशन को छत नसीब नहीं
कैसरगंज लोकसभा राजधानी सीमा से सटा है। इसके बाद भी यहां के लोगों को अभी तक रोडवेज बस अड्डे की सुविधा नहीं मिल सकी। लोकसभा क्षेत्र के जरवलरोड तिराहे से देवीपाटन मंडल के चार जिले के यात्रियों का आना-जाना रहता है, वहीं कैसरगंज मुख्यालय पर भी प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में यात्री जिला मुख्यालय व राजधानी लखनऊ समेत अन्य जनपदों के लिए जाते हैं। लेकिन यात्रियों को जाड़ा, गर्मी, बरसात सभी मौसमों में खुली छत के नीचे ही बसों का इंतजार करना पड़ता है। यहां के लोगों ने कई बार बस अड्डे के निर्माण की आवाज उठाई, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।
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80 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में
कैसरगंज तहसील क्षेत्र की 80 हजार की आबादी प्रत्येक वर्ष बाढ़ की चपेट में रहती है। तहसील क्षेत्र के गोड़हिया नंबर एक, दो, तीन और चार समेत तीनसौ रेती, मतरेपुरवा गांव समेत करीब 50 ऐसे मजरे हैं जो प्रत्येक वर्ष भीषण बाढ़ की चपेट में रहते हैं। दशकों पूर्व बनाए गए बांध की मरम्मत के नाम पर हर साल लाखों का बंदरबांट होता है, लेकिन बांध
उसी हाल में रहता है। ऐसे में इन गांवों की आबादी को प्रत्येक वर्ष बाढ़ की आपदा में अपना सब कुछ गंवाना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों ने कभी भी यहां के लोगों को समस्या से निजात दिलाने की न ही कोई पहल की और न ही कार्ययोजना ही बनवा सके।

बाढ़ से बचाव को लेकर सजग है सरकार
बाढ़ से बचाव को लेकर सरकार प्रत्येक वर्ष कार्ययोजना बनाकर धरातल पर लाती है। इसी का नतीजा है कि अब कैसरगंज में बाढ़ की त्रासदी काफी हद तक कम हुई है। सरकार ने सड़कों का जाल भी बिछाया है। बहराइच-बाराबंकी हाईवे फोरलेन होने वाला है। भाजपा के विकास के लिए कटिबद्ध है।-बृजेश पांडेय-जिलाध्यक्ष भाजपा

 

जाति धर्म के नाम पर बांट रही भाजपा
भाजपा सिर्फ जाति-धर्म के नाम पर लोगों को बांटने में जुटी है। विकास से उसका कोई सरोकार नहीं। केंद्र में अगर सपा की सरकार बनती है, तो लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर बहराइच से जरवल व जरवल से प्रभुश्रीराम के मंदिर तक एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया जाएगा। -रामहर्ष यादव-जिलाध्यक्ष सपा
 
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