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ग्राउंड रिपोर्ट: पहले कांग्रेस...फिर सपा और अब भाजपा का गढ़ बनी यूपी की यह सीट; रोचक है यहां का इतिहास

Sun, 05 May 2024 01:39 PM IST
शाहरुख खान विभाकर शुक्ल, अमर उजाला, लखनऊ
विभाकर शुक्ल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 05 May 2024 01:39 PM IST
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सार
यूपी की इस सीट पर भाजपा हैट्रिक लगाने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी गठबंधन और बसपा भाजपा को रोकने में जुटी है। इस सीट पर मुकाबला रोचक होने वाला है।
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UP Lok Sabha Election 2024 Ground report from Mohanlalganj seat of Lucknow Interesting contest
UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जगह-जगह बड़े -बड़े बिल्डर्स के बोर्ड और ऊंची इमारतों के बीच दम तोड़ते खेतों ने मोहनलालगंज संसदीय सीट की पूरी तस्वीर बदल दी है। कभी घोर ग्रामीण इलाका तेजी से शहर में तब्दील होता दिखता है। बदल रही इस तस्वीर ने इस सीट की तासीर भी बदल दी है। तभी तो पहले कांग्रेस और फिर समाजवादियों का गढ़ रही मोहनलालगंज संसदीय सीट पर अब भाजपा की हैट्रिक लगाने की कोशिश है तो वहीं इंडी गठबंधन और बसपा इसे रोकने की जद्दोजहद में जुटे हैं।


इस संसदीय सीट पर भाजपा लगातार दो बार से चुनाव जीत रहे केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर को ही फिर मैदान में उतारा है वहीं इंडी गठबंधन से सपा के आर.के. चौधरी और बसपा से राजेश कुमार उर्फ मनोज प्रधान मैदान में हैं। ऐसा नहीं है कि भाजपा इस सीट पर पहले लगातार दो बार नहीं जीती । भाजपा 1991 और 1996 में  लगातार दो बार जीत चुकी है। पर, उम्मीदवार बदल गए थे। 


वर्ष 1991 में छोटेलाल तो 1996 में पूर्णिमा वर्मा यहां से भाजपा सांसद चुनी गई थी। अगर एक ही उम्मीदवार और एक ही पार्टी की बात की जाए तो अब तक सिर्फ कांग्रेस की गंगादेवी ने ही इस सीट पर हैट्रिक लगाई है । वह 1962, 1967 और 1971 में लगातार तीन बार इस सीट से सांसद चुनी गईं। अब भाजपा के कौशल किशोर के सामने हैट्रिक लगाने का मौका आया है। 

पर, उनके लिए यह उपलब्धि हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण है । राजधानी की विधानसभा सीट सरोजिनीनगर, मलिहाबाद (सु.), बख्शीतालाब,  मोहनलालगंज (सु.) और सीतापुर     की मिश्रिख (सु.) सीट मिलाकर बनी इस संसदीय सीट के गांवों में चुनावी लड़ाई दो खांचों मोदी के साथ और मोदी के खिलाफ बंटी दिखती है जो इंडी गठबंधन से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे आर.के.चौधरी को ताकत दे रही है।
 

ऐसा नहीं है कि लगभग 40 प्रतिशत दलित आबादी वाली इस सीट पर बसपा के समर्थक नहीं हैं।  खूब हैं । शायद ही कोई गांव ऐसा हो जहां दलित आबादी हो और मायावती या बसपा का समर्थक न हो । पर, रमपुरवा के रावत बिरादरी से लेकर कुम्हरावां की बाजार में चाय के साथ चुनावी चर्चा में व्यस्त जाटव बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले बाबादीन तक का दर्द है कि बसपा को वोट देने से उन्हें कुछ हासिल नहीं होगा। 


 

बहुत कुरेदने पर बोलते हैं, वही पुराना वाला मामला है। भले ही सांसद जी और विधायक जी न दिखें हों लेकिन मोदी जी तो गरीबों के लिए काम कर ही रहे हैं। इनकी नजर में आर.के.चौधरी अच्छे आदमी है लेकिन मायावती को मिला धोखा इन्हें बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर रहा है। 

भाजपा लगातार सत्ता में है तो चुनाव प्रचार में ठसक अस्वाभाविक नहीं। यह ठसक तब और ज्यादा दिखती है जब वे किसी कस्बाई इलाके में या सामान्य जाति की आबादी के बीच होते हैं।  मीसा से गोसाई गंज की तरफ आगे बढ़ने गांव में एक छप्पर के नीचे बैठे राम कुमार, विश्वनाथ, हरबदीन व मिथलेश कुमार कहते हैं कि यहां तो साइकिल दौड़ेगी। 10 साल हो गए सांसद से एक हैंडपंप कहा था वह भी आज तक नहीं लगा। सड़क तो अब बनी है जब चुनाव है।

 

कभी ठेकेदारी करने वाले बुजुर्ग किशनलाल सांसद कौशल किशोर की काफी आलोचना के बावजूद धीरे से कहते हैं, हम लोग तो वोट न देबे लेकिन दिल्ली महिहा सरकार तो मोदी केर ही बनी। इमा कुछ संशय नाहीं है। मोहनलालगंज विधान सभा क्षेत्र के मीसा चौराहे पर चाय की दुकान पर चुनावी चक्कलस कर रहे निखिल मिश्र, विनय वर्मा, देवेन्द्र सिंह व निगोहा में चव्वनी की चाट पर चुनावी चर्चा कर रहे कृष्ण मोहन तिवारी, सुशील रावत, वीरेन्द्र सिंह व प्रमोद पाल के पास स्थानीय मुद्दा कम मोदी मुद्दा ज्यादा दिखा।

 

यहां अधिकतर गांव में पहुंचिए तो सांसद के क्षेत्र में न दिखाई देने या सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों तक ही संपर्क रखने की शिकायतें आम हैं। मोहनलाल गंज में इन शिकायतों को 2022 में विधानसभा की मोहनलालगंज सीट से विधायक चुने गए अमरेश कुमार ने और बढ़ाया है। इसकी एक वजह क्षेत्र में यह प्रचार है कि अमरेश कौशल के रिश्तेदार हैं।
 

लड़ाई आमने-सामने पर बिसात पर जातियों का पासा

मोहनलालगंज सुरक्षित सीट में कुल जनसंख्या 2695769 है। इसमें 75.19 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र और 24.81 प्रतिशत शहरी आबादी है। यहां हुए अब तक के 17 चुनाव में से सात बार कांग्रेस, चार बार सपा, चार बार भाजपा, जनता दल एक बार, जनता पार्टी एक बार जीती। यहां अनसूचित वोटरों की संख्या 38.7% (पासी 21% अनुसूचित जाति 14.5%), यादव 11.1%, कायस्थ 1%, मुस्लिम 14.2%, लोध 5.3%, गड़ेरिया, काछी, कहार 2-2%, कुर्मी 3.1%, ब्राह्मण 8.3% राजपूत 7.3% व 5% अन्य जातियां हैं।

 
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