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यूपी: बाघ की दहशत से ठहरी सीतापुर की जिंदगी, वन विभाग सिर्फ तमाशबीन; बच्चों का छूटा स्कूल...हो रहा रतजगा

Sat, 30 Aug 2025 08:38 PM IST
रोहित मिश्र अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक राज, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 30 Aug 2025 08:38 PM IST
सार

Tiger terror in UP: सीतापुर जिले के 12 गांव बाघ की दहशत से बुरी तरह से प्रभावित हैं। दिन ढलते ही इलाके में दहशत फैल जाती है। सूनसान इलाकों के स्कूलों में बच्चे नहीं जा रहे हैं। 
 

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UP: Life in Sitapur has come to a standstill due to the fear of tiger, children have missed school; people of
सीतापुर में बाघ की दहशत। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दस दिन...12 गांव और करीब 50 हजार आबादी...सभी बाघ की दहशत में। ग्रामीण दिन ढलते ही घरों में कैद। खौफ में बच्चों का स्कूल छूटा। किसानों से खेती। धान की फसल पीली पड़ी। खाद के बिना गन्ना भी मुरझाया। 22 अगस्त को नरनी गांव में किसान सौरभ दीक्षित को बाघ ने निवाला बनाया और फिर पूरे क्षेत्र की दिनचर्या बदल गई। वन विभाग ट्रैप कैमरे, ड्रोन और गश्ती दल के सहारे बाघ की तलाश के दावे कर रहा है, लेकिन आठ दिनों में सिर्फ बाघ के पगचिह्न ही हाथ लग सके हैं।

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नरनी का हाल जानने हम भी बृहस्पतिवार रात गांव पहुंचे। लोग घरों के भीतर थे। बड़ी मुश्किल से कपिल, शिवम, वेद प्रकाश और इंद्रपाल से बात हो सकी। यहां से करीब 10 बजे नवनिर्मित पीएचसी में बने वन विभाग के कंट्रोल रूम में गए, जहां टीम जाल, ट्रेंकुलाइजर गन और गश्ती वाहन के साथ मौजूद थी। इसी बीच सूचना मिली कि बाघ दिखा है। इसपर हम भी डिप्टी रेंजर जहीर खान, वन दरोगा नंदलाल, केतन कुमार और पीलीभीत से आए सचिन के साथ रात करीब 10:30 बजे गश्त पर निकले। टीम हमें वहां भी लेकर पहुंची, जहां बाघ ने सौरभ को निवाला बनाया था। गन्ने की फसल टूटी पड़ी थी। पास ही खून के छींटे भी थे।
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 कुछ दूर चलने पर खेतों के बीच में बरगद का पुराना वृक्ष दिखा, जहां टीम ने बाघ की सक्रियता बताई। हम कुछ ही पल में वहां से आगे बढ़े और फिर अगले पड़ाव कोल्हौरा की तरफ बढ़ चले। कटिघरा, ब्रह्मावली, जलालपुर, श्यामजीरा, रुस्तम नगर, सीतारामपुर, रघुवर दयालपुर, भगवानपुर, सिल्हापुर और अमिरता तक पहुंचते-पहुंचते रात के करीब एक बज गए। घुप्प अंधेर में बस टार्च की लाइट और वाहनों की लाइट की रोशनी ही दिख रही थी। बाघ प्रभावित इन सभी गांवों में कोई भी बाहर नहीं दिखा। हालांकि गर्मी के समय में गांवों में लोग बाहर चारपाई पर सोते हैं। इसपर नरनी के विजय कुमार ने बताया कि जब से बाघ की दहशत है दिन ढलने के बाद कोई बाहर नहीं निकलता। सभी घर में ही दुबके रहते हैं। दिन में बच्चों ने भी घर के बाहर खेलना बंद कर दिया है। इंद्रपाल ने बताया कि पशुओं के लिए हरा चारा नहीं ला पा रहे हैं। मजबूरी में सिर्फ भूसा से काम चलाना पड़ रहा है।
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युवा शिवम मिश्रा बातचीत में गुस्से में दिखे। वह कहते हैं कि वन विभाग सिर्फ दिखावा कर रहा है। अगर जमीनी स्तर पर काम होता तो बाघ जरूर पकड़ा जाता। कपिल मिश्रा ने कहा, साहब...यहां एक-दो नहीं, पांच-पांच  बाघ सक्रिय हैं। हम इस दहशत में पांच वर्ष से जी रहे हैं। शिकायत पर वन विभाग ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। अब जब सौरभ को बाघ ने निवाला बनाया तब पूरा अमला गांव में दिख रहा है। पहले ही जिम्मेदार चेते होते तो आज नजारा कुछ और ही होता। हम इस कदर खौफ में नहीं रहते।  

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वन विभाग के लिए भी चुनौती

UP: Life in Sitapur has come to a standstill due to the fear of tiger, children have missed school; people of
बाघ का आतंक - फोटो : बाघ दिखने के बाद जुटे ग्रामीण।

गोमती, कठिना व पिरई नदियों के बीच का हिस्सा महोली वन रेंज में आता है। इन नदियों के कछार में दशकों से वन्यजीवों की चहलकदमी रही है। कठिना और पिरई नदियों के दायरे में बसे महोली के 50 गांवाें के आसपास पिछले करीब पांच वर्षों से बाघ सक्रिय है। गन्ने की घनी फसल, जलभराव, वन क्षेत्र और ऊबड़ खाबड़ जगह वन विभाग के लिए परेशानी खड़ी कर रही है।

तीन वर्ष पहले बाघ ने किया था पहला शिकार
करीब तीन वर्ष पहले चंद्रा गांव में बाड़े में बंधी गाय का बाघ ने पहली बार शिकार किया था। इस अवधि में कई बार ग्रामीणों का बाघ से आमना-सामना भी हुआ। कठिना से पिरई नदी के बीच की दूरी करीब 12 से 14 किलोमीटर है। इस परिधि में करीब पांच बाघों को ग्रामीणों ने घूमते भी देखा है। इस बीच ऐसा पहली बार हुआ है जब बाघ ने किसी मनुष्य का शिकार किया है।

इस तरह से समझिए आंकड़ों से

50  हजार आबादी बाघ से भयभीत
13  गांवों में बाघ की सक्रियता
05  वर्षों से क्षेत्र में सक्रिय हैं बाघ  
05 बाघ ग्रामीणों के अनुसार हैं सक्रिय  
15  किलोमीटर की परिधि में बाघ का मूवमेंट
20  ट्रैप कैमरे लगाए गए

टीम कर रही है गश्त

हमारी टीम अब दो हिस्सों में बंटकर गश्त कर रही है। हम बाघ के बेहद करीब हैं। जल्द ही उसे पकड़कर ग्रामीणों को खौफ से निजात दिलाएंगे। हमें ग्रामीणों से भी सहयोगी की अपेक्षा है। वह सचेत रहें। अकेले खेतों की तरफ न जाएं। अगर बाघ दिखता है तो वन विभाग को सूचित करें।   -नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सीतापुर
 
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