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यूपी : मरीज की स्थिति के बारे में देनी होगी जानकारी, सीएमओ और डीएम हर हाल में भर्ती कराएंगे मरीज

Mon, 03 May 2021 01:27 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 03 May 2021 01:27 AM IST
सार

यूपी के सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि कोविड मरीजों के बारे में उनके परिजनों को हर हाल में जानकारी दी जाए। हर दिन शाम तीन से पांच बजें के बीच मरीज की स्थिति से परिवारीजनों को अवगत कराना होगा। 

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UP: information has to be given about the condition of the patient, CMO and DM will admit the patient in every situation
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

विस्तार

यूपी के सभी चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि कोविड मरीजों के बारे में उनके परिजनों को हर हाल में जानकारी दी जाए। हर दिन शाम तीन से पांच बजें के बीच मरीज की स्थिति से परिवारीजनों को अवगत कराना होगा। 

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कोविड मरीजों के परिजनों की शिकायतों के निस्तारण को लेकर शासन की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी गई है। रविवार को शासन सचिव सौरव बाबू ने केजीएमयू कुलसचिव, पीजीआई, लोहिया संस्थान, कैंसर संस्थान सहित अन्य चिकित्सा संस्थानों के निदेशकों, सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य और निजी मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्य को निर्देश भेज दिया गया है। 
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इसके तहत अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों कि परिजनों के बैठने और पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य रूप से कराने का निर्देश दिया गया है। इसी तरह बीमार मरीजों के तीमारदारों को भर्ती के समय ही मरीज की स्थिति से भी अवगत कराना होगा। मरीज के परिजनों को शाम तीन से पांच बजे के बीच उनकी स्थिति के बारे में भी जानकारी देनी होगी। जिन मरीजों के परिजन उपलब्ध नहीं हैं उनको फोन के जरिए जानकारी देनी होगी। 
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शासनादेश में डीएम और सीएमओ को हर हाल में मरीज भर्ती कराने का निर्देश दिया गया है। यदि सरकारी अस्पताल में मरीज को भर्ती  नहीं मिल पाता है तो उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। जिन मरीजों द्वारा निशुल्क उपचार करने का निवेदन किया जाएगा उन्हें कोविड कंट्रोल रूम के जरिए सरकारी अस्पताल में ही भर्ती कराया जाएगा। 


सरकारी मेडिकल कॉलेज या चिकित्सालय में बेड नहीं है तो कोविड कंट्रोल रूम के जरिए इसका प्रमाण पत्र जारी करते हुए निजी अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। इस दौरान मरीज का इलाज का खर्च आयुष्मान भारत की दर पर राज्य सरकार द्वारा वाहन किया जाएगा। 

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