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UP: ईवी वाहन और एथेनॉल की बढ़ी खपत...वैट पर असर; पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग 14% तक बढ़ाई गई

Thu, 08 Jan 2026 07:25 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Thu, 08 Jan 2026 07:25 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में अब ग्रामीणों को आधार बनवाने या अपडेट करवाने के लिए घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार एक हजार ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्र खोल रही है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत इन केंद्रों में कार्य अधिकृत और पारदर्शी तरीके से होगा, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिलेगा।

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UP: Increased consumption of EV vehicles and ethanol... impacting VAT; ethanol blending in petrol increased to
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक वाहनों की तेजी से बढ़ती बिक्री और एथेनॉल की खपत का असर साफ दिखाई देने लगा है। इस वजह से वैट संग्रह में पिछले दिसम्बर के मुकाबले करीब 20 करोड रुपए की कमी आई है। प्रदेश सरकार द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के मुख्य कर-करोत्तर राजस्व विश्लेषण में सामने आया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दिसंबर माह में कुल राजस्व प्राप्ति में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, जीएसटी तथा वैट संग्रह पर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या और ईंधन में एथेनॉल के उपयोग का असर स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

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दिसंबर 2025 में जीएसटी के अंतर्गत कुल 6563.04 करोड़ की प्राप्ति हुई, जो दिसंबर 2024 के 6342.68 करोड़ से अधिक है। वहीं, वैट संग्रह में थोड़ी गिरावट देखी गई, दिसंबर 2025 में 3086.83 करोड़ बनाम दिसंबर 2024 के 3105.91 करोड़ रहा, जिससे संकेत मिलता है कि पेट्रोल-डीजल खपत में कुछ कमी का प्रभाव कर संग्रह पर पड़ा है। 
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प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता और ईंधन में एथेनॉल के उपयोग में वृद्धि ने पारंपरिक ईंधन खपत को प्रभावित किया है, जिससे पेट्रोल-डीजल आधारित वैट तथा अन्य करों में उतनी तेजी नहीं देखी गई जितनी जीएसटी में वृद्धि रही।

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ईवी की बढ़ती लोकप्रियता

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री/पंजीकरण में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां वित्तीय वर्ष 2025 तक ईवी के कुल 4.14 लाख से अधिक पंजीकरण दर्ज किए गए, जो दिल्ली और महाराष्ट्र के कुल आंकड़ों से दोगुने से अधिक हैं।वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) में 70,770 नए ईवी रजिस्ट्रेशन हुए, जिसमें मुख्यतः इलेक्ट्रिक रिक्शा और दो-पहिया वाहन शामिल हैं।

एथेनॉल उपयोग का प्रभाव

उत्तर प्रदेश में पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग 14% तक बढ़ाई गई है, जो देश के राष्ट्रीय औसत के सापेक्ष बेहतर स्थिति को दर्शाता है और पेट्रोल की पारंपरिक खपत को कुछ हद तक कम कर रहा है।

एथेनॉल उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नवंबर 2025 तक प्रदेश में 141.8 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन किया जा चुका है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रसार और बढ़ती एथेनॉल ब्लेंडिंग न केवल पर्यावरण हितैषी दृष्टिकोण से लाभकारी हैं, बल्कि राज्य के ईंधन खपत संरचना में बदलाव का संकेत भी देते हैं। 

आधारित राजस्व पर मिश्रित प्रभाव बन रहा 

जहां जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी जारी है, वहीं पारंपरिक पेट्रोल-डीजल पर आधारित करों में स्थिरता या मामूली गिरावट दिखाई दे रही है। जैसे ही ईवी ढांचे का विस्तार और एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ेगी, लंबे समय में राजस्व स्थिरता तथा आर्थिक क्रियाशीलता दोनों को बेहतर संतुलन मिलेगा।
 

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