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एंटीबायटिक, दिल की बीमारियों, एंटी रैबीज जैसी दवाओं की कमी से जूझ रहे प्रदेश के अस्पताल

Mon, 07 Oct 2019 08:41 PM IST
Amulya Rastogi अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 07 Oct 2019 08:41 PM IST
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up hospitals suffering from drug scarcity like antibiotic, heart disease etc
medicine
प्रदेश के सरकारी अस्पताल दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। नॉर्मल सलाइन, एंटीबायटिक, दिल की बीमारियों, कैल्शियम की दवाओं की भी कमी है। दवा काउंटर पर मरीजों को लंबी लाइन के बाद डॉक्टरों की लिखी आधी दवाएं ही मिल रही हैं। यूपी मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन दवाओं की आपूर्ति में फेल हो गया है। 
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प्रदेश में 242 छोटे-बड़े अस्पताल हैं। इनमें जिला महिला, जिला पुरुष, संयुक्त चिकित्सालय और सीएमओ ऑफिस शामिल हैं। इन सभी अस्पतालों को पहले स्वास्थ्य महानिदेशालय के केंद्रीय औषधि भंडार (सीएमएसडी) से दवाओं की आपूर्ति होती थी। 
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बीते साल केंद्रीय औषधि भंडार की जगह यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन लिमिटेड बनाकर इसके माध्यम से दवाओं और उपकरणों की आपूर्ति की शुरुआत की गई, लेकिन एक साल बाद भी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता में दिक्कतें बरकरार हैं। बेहोशी की दवा किटामाइन बहुत अधिक मात्रा में आपूर्ति की गई है, जबकि यह कम इस्तेमाल होती है। 
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अस्पतालों के सीएमएस और सीएमओ कहते हैं कि यूपी मेडिकल सप्लाइज कॉर्पोरेशन दवाओं की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है। वहीं कॉर्पोरेशन के अधिकारियों का कहना है कि एक साल तक स्वास्थ्य महानिदेशालय यह नहीं बता पाया कि कौन-से अस्पताल में दवाओं की कितनी खपत है। जो दवाएं आपूर्ति की जाती हैं, उनमें से अधिकतर गैरजरूरी बताकर वापस कर दी जाती हैं।

इन दवाओं की है कमी

पेशाब के मरीजों के लिए यूरीमैक्स डी, एंटीबायोटिक सेफरेक्जाइम 250/500 मिग्रा, सेफिक्जाइम 200/400, हृदय रोग में दी जाने वाली डिलीटाजेम 30/60, सारबिट्रेट, नेबुलाइजिंग सॉल्यूशन, डायबिटीज के मरीजों को दी जाने वाली जेलवस, नेफिडापाइन, दर्द निवारक ट्यूब, एंटी फंगल ट्यूब क्लोट्रिमाजॉल भी अस्पतालों में नहीं हैं। 

सूत्र बताते हैं कि सिर्फ माइकोनाजॉल की थोड़ी-बहुत आपूर्ति हो पाई है, जबकि पहले 4 से 6 साल्ट की ट्यूब उपलब्ध रहती थी। आईवी फ्ल्यूड, कैल्शियम टैबलेट, विटामिन डी शैशे की भी कमी बनी रहती है। कुत्ता काटने से गंभीर रूप से घायल मरीजों को दिया जाने वाला एंटी रैबीज सीरम भी अस्पतालों में नहीं है। मल्टी विटामिन और बच्चों को दस्त होने पर दिए जाने वाले मेट्रोजिल आईवी की आपूर्ति भी नहीं हो रही है। 

एसेंशियल ड्रग लिस्ट (ईडीएल) बनाई गई है। अस्पतालों में इनकी 100 फीसदी उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। अस्पतालों से भी उनकी जरूरत पूछी गई है। दवाओं की कमी नहीं होने दी जाएगी।
- जयप्रताप सिंह, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री  
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