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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: High Court's strict ruling—surrogacy age limits do not apply to couples who had embryos frozen before 2021

UP: हाईकोर्ट का सख्त फैसला, 2021 से पहले फ्रीज कराए भ्रूण वाले दंपतियों पर सरोगेसी की आयु सीमा लागू नहीं

Tue, 14 Jul 2026 10:25 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Tue, 14 Jul 2026 10:25 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि जिन दंपतियों ने सरोगेसी कानून लागू होने से पहले भ्रूण फ्रीज कराए थे, उन पर आयु सीमा लागू नहीं होगी। अदालत ने इसे प्रजनन स्वायत्तता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में आवेदन पर कानून और न्यायिक निर्णयों के अनुसार फैसला करने का निर्देश दिया।

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UP: High Court's strict ruling—surrogacy age limits do not apply to couples who had embryos frozen before 2021
lawyer advocate and court - फोटो : AI

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत आयु प्रतिबंध उन दंपतियों पर लागू नहीं किया जा सकता है जिन्होंने कानून के लागू होने से पहले भ्रूण बनाए और उन्हें फ्रीज कर दिया था। सरोगेसी वह प्रक्रिया है जिसमें दंपती बच्चे को जन्म देने के लिए किराए की कोख लेते हैं।

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न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने लखनऊ के एक दंपत्ति द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार का पूर्वव्यापी प्रभाव दंपत्ति के प्रजनन संबंधी स्वायत्तता में हस्तक्षेप करेगा, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का एक हिस्सा है।
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न्यायालय ने कहा, " सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत आयु प्रतिबंध का कठोर अनुप्रयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के एक भाग के रूप में मान्यता प्राप्त प्रजनन स्वायत्तता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। "
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अधिनियम की धारा 4(iii)(सी)(I) के अनुसार सरोगेसी के लिए पात्र होने के लिए महिला की आयु 23 से 50 वर्ष और पुरुष की आयु 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिए।हालांकि, न्यायालय ने यह माना कि यह प्रतिबंध उन मामलों में लागू नहीं होगा जहां दंपति ने 25 जनवरी, 2022 को अधिनियम के लागू होने से पहले सरोगेसी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।


 

सरोगेसी का सहारा लेने की सलाह दी

अदालत लखनऊ के एक दंपत्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी शादी को 17 साल से अधिक हो चुके थे, लेकिन प्रजनन उपचार कराने के बावजूद वे स्वाभाविक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रहे थे। भ्रूण स्थानांतरण के कई प्रयास भी विफल रहे। जिसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें सरोगेसी का सहारा लेने की सलाह दी।

इसके बाद दंपति ने 18 जुलाई, 2015 को तीन भ्रूणों को संरक्षित कराया। हालांकि, जब उन्होंने सरोगेसी की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की, तब तक पत्नी 50 वर्ष की वैधानिक ऊपरी आयु सीमा को पार कर चुकी थी।इसलिए, उन्होंने आयु प्रतिबंध के बावजूद परोपकारी सरोगेसी की अनुमति प्राप्त करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया। 

वैधानिक आयु प्रतिबंध लागू नहीं होता

खंडपीठ ने अरुण मुथुवेल बनाम भारत संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी उल्लेख किया, जहां सरोगेसी अधिनियम के लागू होने से पहले भ्रूणों को फ्रीज कराने वाले एक इच्छुक दंपति को राहत दी गई थी। कई नजीरों का हवाला देकर हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ताओं पर वैधानिक आयु प्रतिबंध लागू नहीं होता है।

इस प्रकार, कोर्ट ने दंपति को सरोगेसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और अधिनियम की धारा 35 के तहत तीन सप्ताह के भीतर उपयुक्त प्राधिकारी या मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ को आवेदन करने की अनुमति दी।कोर्ट ने प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह उनकी बात सुने और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और अधिनियम के प्रावधानों पर विचार करने के बाद तर्कसंगत आदेश पारित करे।

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