फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: High Court's big decision - collecting congratulations in auspicious functions is not the legal right of e

हाईकोर्ट की टिप्पणी: मांगलिक कार्यों में बधाई वसूलना किन्नरों का कानूनी अधिकार नहीं, यह इच्छा पर निर्भर

Tue, 28 Apr 2026 08:42 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 28 Apr 2026 08:42 PM IST
सार

Lucknow High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने किन्नरों को दी जाने वाली बधाई पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यह उनका कानूनी अधिकार नहीं। 

 

विज्ञापन
UP: High Court's big decision - collecting congratulations in auspicious functions is not the legal right of e
कई बार किन्नर मांगलिक कार्यो में जबरन पैसा मांगते हैं। फाइल फोटो।

विस्तार

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किन्नरों (ट्रांसजेंडर व्यक्तियों) को शुभ अवसरों पर दी जाने वाली पारंपरिक भेंट या उपहार (बधाई ) लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।  न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह फैसला गोंडा जिले की किन्नर रेखा देवी द्वारा दायर याचिका को खारिज करके दिया। याची ने अन्य किन्नरों द्वारा उनके "क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र" पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ सुरक्षा के लिए याचिका दायर की थी।याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस प्रकार की वसूली कई वर्षों से हो रही है और इसे प्रथागत अधिकार माना जाता है। हालांकि, अदालत ने फैसला सुनाया कि इसका कोई कानूनी आधार नहीं है।

विज्ञापन


अदालत ने कहा, कानून के दायरे में रहते हुए किसी भी व्यक्ति से किसी भी प्रकार का धन, कर, शुल्क या उपकर वसूलने का कोई वैध या कानूनी आधार नहीं है। याचिकाकर्ता द्वारा मांगे गए ऐसे अधिकार ,कानून द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं हैं। कोर्ट ने याचिका में किए गए अनुरोध को स्वीकार करने से यह कहकर इनकार कर दिया कि इस तरह से धन की वसूली को किसी भी तरह से वैध नहीं ठहराया जा सकता है।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता का कहना था कि वह गोंडा जिले के किन्नर समुदाय से संबंध रखता है और एक विशेष क्षेत्र में लंबे समय से बधाई वसूलने के अपने पारंपरिक अधिकार का प्रयोग करता आ रहा है। याचिका में बधाई वसूलने के लिए क्षेत्रों के सीमांकन का निर्देश देने की भी मांग की गई थी । कोर्ट ने कहा कि चूंकि बधाई वसूलने का कोई अधिकार मौजूद नहीं है, इसलिए वह इस तरह की प्रथा का संरक्षण नहीं कर सकता। इस टिप्पणी के साथ, न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed