हर तहसील में पांच लाख के कंबल बांटेगी सरकार
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राज्य सरकार ने निराश्रित व असहाय लोगों को ठंड से बचाने के लिए हर साल राजस्व विभाग से बंटने वाले कंबल के वितरण का कार्यक्रम तय कर दिया है। इसके तहत निराश्रित व असहाय लोगों को एक दिसंबर तक चिह्नित किया जाएगा। इसके बाद 10 दिसंबर तक कैंप लगाकर कंबल बांट दिए जाएंगे।
इसके लिए हर तहसील को पांच लाख रुपये कंबल और 50 हजार रुपये अलाव के लिए दिए गए हैं। शासन ने कंबल के लिए 16.35 करोड़ रुपये और एक करोड़ 63 लाख 50 हजार रुपये अलाव के लिए जारी कर दिए हैं।
सचिव एवं राहत आयुक्त लीना जौहरी ने ठंड के मद्देनजर समस्त जिलाधिकारियों को कंबल वितरण व अलाव जलवाने को लेकर विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिया है। कंबल की खरीद किन-किन संस्थाओं से की जानी है, यह भी स्पष्ट कर दिया गया है। लाभार्थियों का विवरण जिले की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा। जौहरी ने कहा कि कंबल की गुणवत्ता में कमी के लिए जिलाधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे।
इन लोगों को दी जाएगी प्राथमिकता
इसमें वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, अंत्योदय कार्ड की प्रतीक्षा सूची, भूमिहीन, बीमार व बुजुर्गों को प्राथमिकता दी जाएगी। जबकि विधवा पेंशन की प्रतीक्षा सूची में से अल्पसंख्यक वर्ग की बुजुर्ग महिलाओं व उन महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें बच्चे हैं। तो नगरों में मलिन बस्तियों व ग्रामीण क्षेत्र के पिछड़े मजरों में कमजोर वर्ग के बुजुर्गों व बीमार लोगों को तवज्जो मिलेगी।
कंबल पर अंकित होगा लंबाई, चौड़ाई व वजन
शासन ने तय किया है कि कंबल की लंबाई 235 सेमी व चौड़ाई 140 सेमी और वजन कम से कम 2.200 किलो होनी चाहिए। आपूर्तिकर्ता को कंबल पर लंबाई, चौड़ाई व वजन संबंधी एक टैग लगाना होगा। साथ ही यह भी अंकित करना होगा कि कंबल राजस्व विभाग के सौजन्य से नि:शुल्क वितरण के लिए है।
सरकार शुरू नहीं कर सकी साड़ी-कंबल योजना
विधानसभा चुनाव की घोषणा पत्र में समाजवादी पार्टी ने गरीब महिलाओं को दो-दो साड़ी व बुजुर्गों को कंबल देने का वादा किया था। लेकिन सपा सरकार बजट की कमी की वजह से यह योजना शुरू नहीं कर पाई।