बेसिक शिक्षा निदेशालय के गठन पर सरकार अडिग, जल्द लिया जाएगा फैसला
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उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा महानिदेशालय के गठन पर अडिग है। सरकार का मानना है कि महानिदेशालय बनने से लंबे समय से बेपटरी बेसिक शिक्षा और स्कूलों की व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। विभाग में संचालित पांच निदेशालयों के अधिकारियों के बीच खींचतान से व्यवस्थाएं नहीं सुधर सकीं। इसे देखते हुए ही महानिदेशालय गठन का प्रस्ताव तैयार किया गया है जिसे अगली कैबिनेट में पेश किया जा सकता है।
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि दो दशकों में परिषदीय स्कूल भवनों के निर्माण और अवस्थापना सुविधाओं पर ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ है। लेकिन स्कूलों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
अवस्थापना सुविधाओं के लिए बजट सर्व शिक्षा अभियान से जारी किया जाता है। लेकिन जिलों में न तो बजट समय पर खर्च होता है न रिपोर्ट एसएसए को भेजी जाती है। पाठ्यपुस्तक, स्कूल यूनिफॉर्म वितरण में भी समन्वय के अभाव से परेशानी होती है।
सरकार ने जनप्रतिनिधियों, समाज सेवियों और शिक्षकों की मदद से मिशन कायाकल्प शुरू किया तो हजारों स्कूलों की सूरत बदल गई। यह बात भी सामने आई कि छोटे-छोटे मामलों में निदेशालय स्तर पर समन्वय न होने से न्यायालयों में बड़ी संख्या में वाद दायर हो रहे हैं। इसकी निगरानी भी ठीक से नहीं हो रही है। मौजूदा सिस्टम में अधिकारियों का फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यवस्था में सुधार की जगह सामग्री खरीद और निर्माण से जुड़े कार्यों पर अधिक है।
जल निगम में नहीं चला पाया विरोध
सरकार ने गत दिनों जल निगम में भी प्रबंध निदेशक व संयुक्त निदेशक के पदों पर आईएएस अधिकारी की तैनाती की। पहले इन पदों पर इंजीनियर तैनात होते थे।
जल निगम में विभिन्न स्तर पर घपले सामने आने के बाद सरकार ने प्रशासनिक नियंत्रण प्रभावी बनाने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती का फैसला किया था। इसका निगम के इंजीनियरों ने विरोध किया था। इसके बावजूद वहां नई व्यवस्था संचालित है।