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यूपी: छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर सरकार सरकार का एक्शन, 14 अधिकारियों पर गिरी गाज

Wed, 03 Sep 2025 06:37 AM IST
रोहित मिश्र अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 03 Sep 2025 06:37 AM IST
सार

Scholarship in UP: प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई करती है।

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UP: Government takes action after fee reimbursement to six lakh eligible students is not done, 14 officials a
सीएम योगी ने दिए निर्देश। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अयोध्या, बहराइच, रायबरेली व सीतापुर समेत 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। जबकि, सबसे ज्यादा गड़बड़ वाले जिला बरेली के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित कर दिया गया है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कुल 100 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसमें कई विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी और आईटीआई के आठ मंडलों के संयुक्त निदेशक भी शामिल हैं।

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प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई करती है। वर्ष 2024-25 में शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अधिकारियों की लापरवाही से सभी वर्गों के करीब 6 लाख पात्र छात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। कहीं लापरवाह अधिकारियों ने डाटा लॉक नहीं किया तो कहीं शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन आवेदन आगे ही नहीं बढ़ाए।
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इस प्रकरण में अलीगढ़ की जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, औरेया की समाज कल्याण अधिकारी इंदिरा सिंह, अयोध्या के रणविजय सिंह, बहराइच के रमाशंकर, बलिया के तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव, बरेली के सुधांशु शेखर, बिजनौर के जागेश्वर सिंह, गौतमबुद्धनगर के सतीश कुमार, गाजियाबाद के वेद प्रकाश मिश्रा, कन्नौज के सत्य प्रकाश सिंह, प्रतापगढ़ के नागेंद्र मौर्य, रायबरेली की सृष्टि अवस्थी, सीतापुर के हर्ष मवार और वाराणसी के जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश दुबे को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।

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कार्रवाई की जद में आया एक अधिकारी अब आईआरएस

कार्रवाई की जद में आया में बलिया का तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव अब विभाग छोड़ चुका है। उनका भारतीय राजस्व सेवा में (आईआरएस) में चयन हो चुका है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विधिक राय लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।

बरेली में सबसे ज्यादा 40 संस्थानों के 1600 विद्यार्थी प्रभावित
बरेली में सबसे ज्यादा 40 शिक्षण संस्थानों के 1600 पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला। इसलिए वहां के बाबू प्रमोद जोशी को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया। बाराबंकी के समाज कल्याण बाबू प्रभात सिंह, हापुड़ के दीपक, झांसी के मनोज वर्मा और प्रयागराज के रामचंद्र यादव को कठोर चेतावनी जारी की गई है।
 

इन जिलों के समाज कल्याण बाबुओं को भी प्रतिकूल प्रविष्टि

विपिन कुमार व प्रवीन माहेश्वरी (अलीगढ़), विष्णु चंद्र वर्मा व भूपेंद्र सिंह (औरेया), विकास श्रीवास्तव (अयोध्या), मसीह उल्लाह अंसारी व नवनीत आर्या (बहराइच), विकास पाठक (बलिया), अंकित कुमार (बिजनौर), सारांश श्रीवास्तव (गौतमबुद्धनगर), संजीव शर्मा (गाजियाबाद), जितेंद्र कुमार (कन्नौज), मनोज कुमार व अनूप कुमार (प्रतापगढ़), आशीष पांडे (रायबरेली), सुरेश गौतम व अरुण वर्मा (सीतापुर), उत्तम कुमार (वाराणसी)।

ये भी आए कार्रवाई की जद में

सीएम ने इस मामले में लापरवाही करने वाले राज्य विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विवि, संबद्धता देने वाली एजेंसियों और निजी विश्वविद्यालयों के 66 नोडल अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर से कार्रवाई कराने के भी निर्देश दिए हैं। 14 राज्य विश्वविद्यालयों और 19 निजी विश्वविद्यालयों को कठोर चेतावनी जारी की जा रही है। आयुष विभाग के दो नोडल अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आयुष विवि गोरखपुर, स्टेट मेडिकल फैकल्टी, अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया संस्थान, एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विवि के छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, लखनऊ, चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर के आईटीआई के संयुक्त निदेशकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

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