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यूपी: औद्योगिक भू परिवर्तन, पैमाइश और घरौनी में लेटलतीफी पर सरकार सख्त, 124 अफसरों को कारण बताओ नोटिस
Mon, 10 Jun 2024 10:13 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Mon, 10 Jun 2024 10:13 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के तहत पैमाइश के मामलों को भी कोर्ट लगाकर अभियान के तहत निपटाने के लिए कहा गया है।
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industrial land change
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
प्रदेश में उद्योगों के लिए भू उपयोग परिवर्तन, पैमाइश और घरौनी के मामलों में लेटलतीफी पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राजस्व परिषद के चेयरमैन डॉ. रजनीश दुबे ने इन मामलों में 124 राजस्व अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भू उपयोग परिवर्तन में लखनऊ, प्रयागराज और बाराबंकी में स्थिति खराब है। वहीं, घरौनी तैयार करने में 13 जिले पीछे चल रहे हैं। राजस्व परिषद ने पैमाइश के प्रकरण महीने भर के भीतर निस्तारित करने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. रजनीश दुबे ने राजस्व परिषद स्थित सभागार में 36 जिलों के अपर जिलाधिकारियों व मुख्य राजस्व अधिकारियों के साथ कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने 30 जून तक ई-खतौनी (रियल टाइम खतौनी) को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने औद्योगिक निवेश के मद्देनजर विभिन्न जिलों में पेंडिंग लैंड यूज परिवर्तन के मामलों पर नाराजगी जताई। इन मामलों को 30 जून तक निस्तारित करने के निर्देश दिए।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के तहत पैमाइश के मामलों को भी कोर्ट लगाकर अभियान के तहत निपटाने के लिए कहा गया है। बैठक में पैमाइश और कब्जे से जुड़े गांवों के सीमा स्तंभों पर भी विचार हुआ। राजस्व परिषद के चेयरमैन ने निर्देश दिए कि प्रदेश में क्षतिग्रस्त करीब ढाई लाख सीमा स्तंभों को दुबारा स्थापित करने का काम एक महीने में पूरा किया जाए।
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यहां घरौनी का काम पीछे
दो दिन पहले पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के जिलों की भी समीक्षा की गई थी। कुल 13 जिलों में स्वामित्व योजना (घरौनी) में 13 जिलों की स्थिति खराब पाई गई। इसके लिए संबंधित जिलों के नोडल अपर जिलाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। ये जिले हैं-वाराणसी, सहारनपुर, पीलीभीत, श्रावस्ती, अयोध्या, कानपुर नगर, फिरोजाबाद, आगरा, औरेया, सुल्तानपुर, जौनपुर, चंदौली और गोंडा।
रियल टाइम खतौनी में असंतोषजनक कार्य के चलते 62 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। राजस्व वादों के निस्तारण में देरी पर लापरवाही बरतने वाले सी श्रेणी के 26 अपर जिलाधिकारियों, 7 उप जिलाधिकारियों, 7 तहसीलदारों और 9 नायब तहसीलदारों का भी जवाब तलब किया गया है।
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डॉ. रजनीश दुबे ने राजस्व परिषद स्थित सभागार में 36 जिलों के अपर जिलाधिकारियों व मुख्य राजस्व अधिकारियों के साथ कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने 30 जून तक ई-खतौनी (रियल टाइम खतौनी) को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने औद्योगिक निवेश के मद्देनजर विभिन्न जिलों में पेंडिंग लैंड यूज परिवर्तन के मामलों पर नाराजगी जताई। इन मामलों को 30 जून तक निस्तारित करने के निर्देश दिए।
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उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के तहत पैमाइश के मामलों को भी कोर्ट लगाकर अभियान के तहत निपटाने के लिए कहा गया है। बैठक में पैमाइश और कब्जे से जुड़े गांवों के सीमा स्तंभों पर भी विचार हुआ। राजस्व परिषद के चेयरमैन ने निर्देश दिए कि प्रदेश में क्षतिग्रस्त करीब ढाई लाख सीमा स्तंभों को दुबारा स्थापित करने का काम एक महीने में पूरा किया जाए।
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यहां घरौनी का काम पीछे
दो दिन पहले पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के जिलों की भी समीक्षा की गई थी। कुल 13 जिलों में स्वामित्व योजना (घरौनी) में 13 जिलों की स्थिति खराब पाई गई। इसके लिए संबंधित जिलों के नोडल अपर जिलाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। ये जिले हैं-वाराणसी, सहारनपुर, पीलीभीत, श्रावस्ती, अयोध्या, कानपुर नगर, फिरोजाबाद, आगरा, औरेया, सुल्तानपुर, जौनपुर, चंदौली और गोंडा।
रियल टाइम खतौनी में असंतोषजनक कार्य के चलते 62 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। राजस्व वादों के निस्तारण में देरी पर लापरवाही बरतने वाले सी श्रेणी के 26 अपर जिलाधिकारियों, 7 उप जिलाधिकारियों, 7 तहसीलदारों और 9 नायब तहसीलदारों का भी जवाब तलब किया गया है।