खुशखबरीः यूपी में लाखों लोगों का बीमा कराएगी सरकार
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बीमा से वंचित सूबे के 12.37 लाख भूमिहीन गरीब परिवारों के मुखिया का प्रदेश सरकार जल्द बीमा कराएगी। इसके लिए मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सूबे के सभी जिला अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें प्राकृतिक मृत्यु से लेकर दुर्घटना में अपंगता तक की स्थिति में मुआवजे की व्यवस्था है।
मुख्य सचिव ने सूबे में इतनी बड़ी संख्या में भूमिहीन गरीब परिवारों का बीमा न कराए जाने पर अप्रसन्नता जताई है। बीमा क्लेम बहुत कम किए जाने पर भी हैरानी जताई है।
उन्होंने कहा है कि सरकार यह भी तय करने जा रही है कि यदि किसी बीमाधारक की मृत्यु होती है और उसका आश्रित लाभ से वंचित रह जाता है तो इसके लिए इलाकाई ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी व राजस्व लेखपाल जिम्मेदार होंगे।
इनकी जिम्मेदारी है कि बीमित व्यक्ति की यदि मृत्यु होती है या किसी हादसे का शिकार होता है तो उसे हर हाल में बीमे का लाभ मिले।
प्रदेश में 68,23,411 भूमिहीन परिवार हैं। इनमें 55,86,077 परिवारों का एक अप्रैल 2015 तक बीमा हो चुका है। बाकी 12,37,334 परिवारों का बीमा होना बाकी है। इस साल एक अप्रैल से अब तक बीमा क्लेम के मात्र 2308 मामले आए।
मुख्य सचिव का कहना है कि इससे पता चलता है कि बीमित होने के बावजूद लोगों में इसके प्रति जागरूकता नहीं है। ऐसे में जिलाधिकारियों से कहा गया है कि लाभार्थियों तक योजना का प्रचार-प्रसार करें।
इन परिस्थितियों में ये लाभ
प्राकृतिक मृत्यु पर 30 हजार रुपये
दुर्घटना में मृत्यु पर 75 हजार रुपये
पूर्ण अपंगता पर 75 हजार रुपये
आंशिक अपंगता पर 37,500 रुपये
लाभान्वित परिवार के अधिकतम दो बच्चों को कक्षा नौ से 12 तक पढ़ाई के लिए 100 रुपये प्रतिमाह की दर से छात्रवृत्ति भी दी जाती है।
भूमिहीनों से एक पाई भी प्रीमियम नहीं
राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि केंद्र सरकार ने भूमिहीन गरीब परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए नवंबर 2008 में आम आदमी बीमा योजना लॉन्च की थी। 18 से 59 साल के लोग इसका लाभ ले सकते हैं।
बीमा परिवार के मुखिया का होता है।
इसमें प्रति लाभार्थी 200 रुपये प्रीमियम अदा करना होता है। सरकार लाभार्थियों से एक पैसा नहीं लेती है। 100 रुपये केंद्र व 100 रुपये राज्य सरकार अदा करती है। भूमिहीन परिवारों का बीमा एलआईसी करती है जो नो प्रॉफिट-नो लॉस पर काम करती है।