यूपी को राष्ट्रीय स्तर पर ई-पंचायत का पहला पुरस्कार, पीएम मोदी ने किया सम्मानित
पंचायतों के सशक्तीकरण के लिए ई-सिस्टम (ऑनलाइन) के उपयोग को सुविधाजनक बनाने में अनुकरणीय प्रयासों के लिए यूपी को राष्ट्रीय स्तर पर ई-पंचायत के प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर पंचायतों के सशक्तीकरण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले राज्यों व पंचायतों को विभिन्न पुरस्कारों से वर्चुअल तरीके से सम्मानित किया। पंचायतों के सशक्तीकरण के लिए ई-सिस्टम (ऑनलाइन) के उपयोग को सुविधाजनक बनाने में अनुकरणीय प्रयासों के लिए यूपी को राष्ट्रीय स्तर पर ई-पंचायत के प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। इसके अलावा दो जिला पंचायतों, चार क्षेत्र पंचायतों व 29 ग्राम पंचायतों को विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह ने बताया कि प्रदेश की दो जिला पंचायतों हापुड़ व शामली को दीनदयाल पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार (पुरस्कार राशि, 50-50 लाख रुपए) से नवाजा गया। इसी तरह चार क्षेत्र पंचायतों बर्डपुर-सिद्धार्थनगर, नवाबगंज-उन्नाव, फिरोजाबाद-फिरोजाबाद व चमरौन रामपुर (पुरस्कार राशि, प्रत्येक को 25 लाख रुपए) को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश की 29 ग्राम पंचायतों को दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तीकरण पुरस्कार भी दिया गया है।
विशेष पुरस्कारों से सम्मानित पंचायतें
- नानाजी देशमुख राष्ट्रीय गौरव ग्राम सभा पुरस्कार- ग्राम पंचायत-साहबपुर, जिला- प्रतापगढ़। 10 लाख मिला।
- ग्राम पंचायत-कामेट, जिला-इटावा को ग्राम पंचायत विकास योजना पुरस्कार। 5 लाख मिला।
- ग्राम पंचायत अकबरपुर- जिला जालौन को बाल मैत्रिक ग्राम पंचायत पुरस्कार। 5 लाख मिला।
अब पूरे प्रदेश में स्वामित्व योजना
प्रधानमंत्री ने पंचायती राज दिवस के मौके पर पूरे देश में स्वामित्व योजना की शुरूआत की। उन्होंने घरौनी प्रमाणपत्र का वितरण भी किया। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 425 गांव के 57 हजार संपत्ति मालिकों को उनके घरौनी प्रमाण पत्र दिए गए। योजना से प्रदेश के 1409 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। अब यह योजना प्रदेश के समस्त गांवों में लागू हो गई है। स्वामित्व योजना के तहत गावों में रिहायशी जायदाद (आवास) का ड्रोन से सर्वेक्षण कर लोगों को उसके मालिकाना हक का दस्तावेज (ग्रामीण आवासीय अभिलेख/ घरौनी) मुहैया कराई जाती है।