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UP: फर्जी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ की कर चोरी करने वाले गैंग का भंडाफोड़, कारोबारियों को आईटीसी बेचता था गिरोह

Mon, 16 Feb 2026 07:25 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Mon, 16 Feb 2026 07:25 PM IST
सार

लखनऊ में फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर 2.75 करोड़ रुपये की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। साइबर सेल, सर्विलांस और इटौंजा पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि सरगना फरार है। 16 बोगस फर्मों के जरिए कारोबारियों को आईटीसी बेची जाती थी।

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UP: Gang busted for tax evasion of 2.75 crores by creating fake firms, gang used to sell ITC to businessmen
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर कारोबारियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) बेचकर 2.75 करोड़ की कर चोरी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ साइबर सेल, सर्विलांस टीम और इटौंजा पुलिस की संयुक्त टीम ने किया है। पुलिस ने गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि सरगना भागा चल रहा है। पुलिस टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं।

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डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कानपुर नगर के साकेत नगर जूही कॉलोनी निवासी तबस्सुम, कल्याणपुर का प्रशांत बेंजवाल, दीनदयाल पुरम का दौलत राम और लखनऊ के इंदिरानगर सेक्टर-11 निवासी कारोबारी सुमित सौरभ के रूप में हुई है। 
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गिरोह का सरगना तबस्सुम की बहन का दामाद सीतापुर निवासी अम्मार अंसारी है। यह पूरा मामला 2 सितंबर 2025 को तब सामने आया जब राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अभिमन्यु पाठक ने इटौंजा थाने में दौलतराम के खिलाफ एमएस स्वराज ट्रेडर्स फर्म के माध्यम से 52 लाख रुपये की कर चोरी का मामला दर्ज कराया था। जांच में पता चला कि गिरोह ने स्वराज ट्रेडर्स की तरह करीब 15 और बोगस फर्में भी बना रखी थीं। इनका पंजीकरण प्रशांत, तबस्सुम और अम्मार अंसारी ने कराया था।

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अधिक धन कमाने के लिए किया फर्जीवाड़ा

डीसीपी के मुताबिक, तबस्सुम ने बताया कि उसकी पहली शादी एजाज अहमद से हुई थी। एजाज ने उसे बेच दिया था। फिर कानपुर में उसने नरेंद्र से शादी की। 2017 में उसके शादीशुदा होने की जानकारी होने पर नरेंद्र ने उसे छोड़ दिया। 


2020 में उसकी पहचान कानपुर स्थित वी मार्ट में कैशियर प्रशांत से हुई। प्रशांत का वेतन 10 हजार रुपये था। दोनों साथ रहकर टिफिन सर्विस चलाने लगे। आमदनी कम होने और कम समय में अधिक धन कमाने के लिए दोनों ने अम्मर अंसारी से संपर्क किया। तीनों ने फर्जी जीएसटी तैयार कर आईटीसी बेचने के फर्जीवाड़े की साजिश रची।

प्रति फर्म तबस्सुम और प्रशांत को मिलते थे एक लाख रुपये

डीसीपी ने बताया कि तबस्सुम और प्रशांत ऐसे लोगों की तलाश करते जो फर्जी फर्म बनवाने के लिए आधार, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर, बैंक खाते जैसे दस्तावेज देने के लिए तैयार हो जाते थे। इन दस्तावेज को वे अम्मार को देते थे।  आरोपियों ने कुल 16 फर्मों का पंजीकरण कराया था।



इनमें से एक फर्म का मालिक दौलतराम को बनाया गया था, जो कानपुर की फैक्टरी में मजदूर है। अम्मार दोनों को प्रति फर्म के हिसाब से एक लाख रुपये देता था। अम्मार जीएसटी का रजिस्ट्रेशन, फर्जी किरायानामा और इन्हीं फर्जी फर्माें की आईटीसी जनरेट करता था। इन्हीं फर्जी फर्मों के जरिये कारोबारी कर चोरी करते थे।



 

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