UP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में FIR, ट्रस्टी अनिल मिश्रा के दो रिश्तेदार, चंपत के ड्राइवर टिन्नू समेत आठ नामजद
राम मंदिर की दानराशि और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के बाद पहली प्राथमिकी दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन, दान प्रबंधन और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। मामले में आगे और खुलासे तथा कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई। एसआईटी की रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के दो दिन बाद दर्ज हुए मुकदमे में ट्रस्ट के प्रभावशाली पदाधिकारियों से जुड़े लोगों के नाम सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और चढ़ावा राशि की चोरी के आरोप में केस दर्ज कर जांच तेज कर दी है। आरोपियों के खिलाफ धारा 305, 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, 3(5) बीएनएस व 13(1)(a) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार, छह जून को राम मंदिर के चढ़ावे में अनियमितता और चोरी का मामला उजागर हुआ था। प्रारंभिक स्तर पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने खुद संदिग्धों को पकड़कर पूछताछ की थी। बढ़ते विवाद के बीच 13 जून को एसआईटी गठित की गई, जिसने जांच पूरी कर मंगलवार को शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी।
इन आठ लोगों के नाम FIR में शामिल
बृहस्पतिवार को ट्रस्टी कृष्ण मोहन की तहरीर पर अयोध्या के कोतवाली रामजन्मभूमि में मुकदमा दर्ज किया गया। एफआईआर में ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा, महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को नामजद किया गया है। इसके अलावा कई अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से साजिश रचकर चढ़ावा राशि के साथ धोखाधड़ी की और धनराशि का गबन किया। पुलिस ने नामजद आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। मामले में आगे और लोगों की भूमिका सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
सांसद संजय सिंह ने SIT को सौंपे थे 11 दस्तावेज
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को एसआईटी से मिलकर जमीन की खरीद-फरोख्त संबंधी 11 दस्तावेज सौंपे। दावा किया कि इन जमीनों की बिक्री व खरीदारी में करोड़ों रुपये का हेरफेर व घोटाला किया गया। एसआईटी अब दस्तावेजों की तस्दीकर जांच शुरू की है।
सांसद ने आरोप लगाया है कि मंदिर के लिए कई जमीनें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं, जिससे चंदे की रकम को भारी नुकसान पहुंचाया गया। एसआईटी अध्यक्ष व लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और सदस्य नील रतन से मिलकर संजय सिंह ने कहा है कि जिन लोगों के नाम हाल ही में मंदिर के चढ़ावे और दानपात्र में अनियमितताओं के मामले में सामने आए हैं, उन्हीं लोगों की भूमिका जमीन खरीद के विवादित सौदों में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने दस्तावेज देने के साथ मामले की गहनता से जांच कर कार्रवाई की मांग की।
2 करोड़ की जमीन कुछ ही मिनटों में 18.5 करोड़ की
संजय सिंह द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार 18 मार्च 2021 को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से गाटा संख्या 243, 244 और 246 की जमीन दो करोड़ रुपये में खरीदी।
आरोप है कि उसी दिन कुछ ही देर बाद यही जमीन ट्रस्ट को 18.5 करोड़ रुपये में बेच दी गई। सांसद का दावा है कि इस एक सौदे में करीब 16.5 करोड़ रुपये का अंतर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बैनामे के गवाह तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा थे।