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UP Election Result 2024: जाटलैंड में भाजपा को झटका, फायदे में रालोद... दस साल का सूखा खत्म; इस बार खुला खाता
Thu, 06 Jun 2024 09:35 AM IST
शाहरुख खान
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 06 Jun 2024 09:35 AM IST
सार
लोकसभा चुनाव में यूपी में जाटलैंड में भाजपा को झटका लगा है। रालोद को फायदा मिला है। रालोद ने दोनों सीटें जीतकर दस साल का सूखा खत्म कर दिया। सपा से नाता तोड़कर रालोद इस चुनाव में भाजपा के साथ रहा।
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UP Chunav Results 2024
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नौ फरवरी 2024...पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने के बाद रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए का दामन थाम लिया। प्रतिक्रिया दी...दिल जीत लिया। पलटवार आया...दल जीत लिया। इस सारी कवायद के बाद परिणाम आए तो जाटलैंड में रालोद का दस साल का सूखा खत्म हो गया।
रालोद को संजीवनी मिली, पर भाजपा को बड़ा झटका लगा। पश्चिमी उप्र को जाट, मुस्लिम, दलित और ओबीसी बाहुल्य माना जाता है। यहां लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं, जिन पर रालोद का प्रभाव रहा है । वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी।
आठ सीटों पर सपा, बसपा, रालोद महागठबंधन जीता। चार सपा और चार सीटें बसपा के खाते में आई थी, पर रालोद का खाता ही नहीं खुला। बागपत से चौधरी जयंत हारे तो मुजफ्फरनगर से उनके पिता चौधरी अजित सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
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सत्ता के खिलाफ किसानों के विरोध और तमाम मुद्दों के बावजूद रालोद चुनावी दंगल में चारों खाने चित हो गया। इससे पहले के लोकसभा चुनाव 2014 में भी रालोद का खाता नहीं खुल पाया था। रालोद ने वर्ष 2014 व 2019 के आम चुनाव में कुल 11 सीटों पर चुनाव लड़ा।
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रालोद को संजीवनी मिली, पर भाजपा को बड़ा झटका लगा। पश्चिमी उप्र को जाट, मुस्लिम, दलित और ओबीसी बाहुल्य माना जाता है। यहां लोकसभा की कुल 27 सीटें हैं, जिन पर रालोद का प्रभाव रहा है । वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने इनमें से 19 सीटों पर जीत हासिल की थी।
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आठ सीटों पर सपा, बसपा, रालोद महागठबंधन जीता। चार सपा और चार सीटें बसपा के खाते में आई थी, पर रालोद का खाता ही नहीं खुला। बागपत से चौधरी जयंत हारे तो मुजफ्फरनगर से उनके पिता चौधरी अजित सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
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सत्ता के खिलाफ किसानों के विरोध और तमाम मुद्दों के बावजूद रालोद चुनावी दंगल में चारों खाने चित हो गया। इससे पहले के लोकसभा चुनाव 2014 में भी रालोद का खाता नहीं खुल पाया था। रालोद ने वर्ष 2014 व 2019 के आम चुनाव में कुल 11 सीटों पर चुनाव लड़ा।
सभी सीटों पर उसे हार मिली थी। ऐसे में रालोद के सामने भी चुनौती बड़ी थी। हालांकि वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में रालोद ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और आठ सीटों पर सफलता हासिल की। बाद में खतौली उपचुनाव जीतकर यह संख्या नौ हो गई।
इस चुनाव में खुला खाता
जाट मतदाता रालोद के सबसे मजबूत वोट बैंक माने जाते रहे हैं। यही कारण रहा कि भाजपा ने रालोद का साथ पकड़ा। रालोद को बिजनौर और बागपत सीटें दीं और रालोद ने दोनों सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया। उधर, जिन सीटों पर रालोद का प्रभाव माना जा रहा था, उनमें से अधिकतर पर भाजपा चारों खाने चित हो गई।
जाट मतदाता रालोद के सबसे मजबूत वोट बैंक माने जाते रहे हैं। यही कारण रहा कि भाजपा ने रालोद का साथ पकड़ा। रालोद को बिजनौर और बागपत सीटें दीं और रालोद ने दोनों सीटों पर जीत का परचम लहरा दिया। उधर, जिन सीटों पर रालोद का प्रभाव माना जा रहा था, उनमें से अधिकतर पर भाजपा चारों खाने चित हो गई।
सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, नगीना, फिरोजाबाद व मुरादाबाद आदि सीटों पर भाजपा पस्त हो गई। हालांकि बागपत सीट पर डॉ. राजकुमार सागवान और बिजनौर पर चंदन चौहान चुनाव जीत गए। दोनों ही रालोद उम्मीदवार थे।
माना जा रहा है कि भाजपा के काडर वोटर का रालोद को लाभ मिला लेकिन रालोद के वोटरों का लाभ भाजपा उम्मीदवारों को उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाया। हालांकि रालोद दिग्गजों का कहना है कि उसका परिणाम शत प्रतिशत सफल रहा है।