पूर्वांचल की जमीन पर फिर पांव जमाने में जुटे वाम दल
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मार्क्सवादी राजनीति के लिए कभी काफी उर्वर रही पूर्वांचल की जमीन पर वामदल एक बार फिर पांव जमाने की कोशिश कर रहे हैं। छठे और सातवें चरण में शामिल पूर्वांचल के 14 जिलों में चुनाव प्रचार के लिए दिग्गज वाम नेताओं ने डेरा डाल दिया है। वाम मोर्चे को पूरी उम्मीद है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल में उनका खाता जरूर खुलेगा।
एक दौर था कि बनारस के गंगापुर (अब सेवापुरी रोहनिया) विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार वाम प्रत्याशी जीते। अकबरपुर, फैजाबाद, मेंहनगर, मऊ, पडरौना, घोसी और रसड़ा आदि क्षेत्रों से भी माकपा और भाकपा के प्रत्याशी विधानसभा में पहुंचते रहे, पर वर्ष 2002 के बाद यूपी के चुनावों में वाम दलों का खाता भी नहीं खुला।
यही वजह है कि इस बार छह वाम दलों ने न सिर्फ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया, बल्कि पूर्वांचल में पूरी शिद्दत के साथ चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं।
भाकपा के कई स्टार प्रचारक भी लगातार जनसभाएं कर रहे हैं।
भाकपा माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य की कई सभाएं हो चुकी हैं। वे दो व तीन मार्च को गाजीपुर, चार मार्च को चंदौली और पांच को मिर्जापुर जिले में भी पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे। माकपा के स्टार प्रचारक और लोकसभा सांसद मो. सलीम दो मार्च को वाराणसी और तीन मार्च को चंदौली में मतदाताओं से मुखातिब होंगे।
वे सोमवार की शाम ही मतदाताओं से संपर्क करते हुए देवरिया से वाराणसी पहुंचे। माकपा की दूसरी स्टार प्रचारक सुभाषिनी अली 4 मार्च को मिर्जापुर और 5 मार्च को वाराणसी में सभाएं करेंगे। सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जेएस मजूमदार भी पिछले कई दिनों से पूर्वांचल में डेरा जमाए हुए हैं।
माकपा के राज्य सचिव हीरा लाल यादव भी सजातीय लोगों के अलावा अन्य जाति के मतदाताओं को पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में लाने के लिए जुटे हुए हैं। भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश समेत कई स्टार प्रचारक भी लगातार जनसभाएं कर रहे हैं। यहां बता दें कि वर्ष 2002 के बाद हुए चुनाव पूर्व सर्वे में पहली बार यूपी में वाम दलों का खाता खुलने की संभावना भी जताई गई है।