यूपी: डिजिटल अरेस्ट कराने वाले सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा, चार ठिकानों पर छापे; छह अवैध सिम बॉक्स बरामद
लखनऊ में साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले अवैध सिम बॉक्स नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। चार ठिकानों पर छापेमारी में छह सिम बॉक्स समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक, सौगात अस्थान नामक संदिग्ध ने ये जगहें किराये पर ली थीं। आरोपी की तलाश जारी है।
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डिजिटल अरेस्ट व अन्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले अवैध सिम बॉक्स के नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर क्राइम की टीम ने शनिवार को शहर के चार ठिकानों पर छापा मारकर छह अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए, लेकिन किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल इंटरनेट आधारित कॉलिंग के जरिये साइबर अपराधों को अंजाम देने में किया जा रहा था।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि अवैध सिम बॉक्स के संचालन से जुड़ी सूचना मिलने के बाद जांच शुरू की गई थी। एक संदिग्ध मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और अन्य तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण किया गया। दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों से मिली जानकारी के आधार पर उस नंबर से जुड़े हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन और संदिग्ध ठिकानों को चिह्नित किया गया। इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें बनाकर छापेमारी की गई।
शनिवार को संयुक्त टीमों ने सुशांत गोल्फ सिटी के स्वाति अपार्टमेंट, पारा के आदर्श विहार स्थित आशीर्वाद बिल्डिंग, बीबीडी के गोल्ड लाइन अपार्टमेंट और चिनहट के आदर्श नगर स्थित जीजे पैराडाइज में छापा मारकर छह अवैध 32-पोर्ट सिम बॉक्स बरामद किए। इनके अलावा तीन वीपीएन गेटवे, 21 स्मार्ट स्विच, तीन स्मार्ट हब, चार इन्वर्टर और यूपीएस, 18 बैटरियां, एक लॉक टैबलेट, वाई-फाई और नेटवर्क राउटर, कैमरे समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी मिले।
लोकेशन छुपाने के लिए प्रयोग होता है अवैध सिम बॉक्स
एडीसीपी के अनुसार, 32-पोर्ट सिम बॉक्स में कई सिम कार्ड लगाए जा सकते हैं। इनके जरिये इंटरनेट आधारित कॉल को अलग-अलग मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। इस तकनीक का दुरुपयोग कर बड़ी संख्या में कॉल की जा सकती हैं और कॉल के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सकता है।
ऐसे में साइबर अपराधी किसी दूसरे देश में बैठकर कॉल करते हैं, जबकि अवैध सिम बॉक्स के जरिये कॉल भारतीय मोबाइल नंबर से आती हुई दिखाई देती है। डिजिटल अरेस्ट के मामलों में साइबर अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। फिर गिरफ्तारी और जांच का डर दिखाकर उन पर लगातार दबाव बनाते हैं और रकम ऐंठ लेते हैं।
बरामद उपकरणों की होगी तकनीकी जांच
एडीसीपी ने बताया कि बरामद सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जांच के लिए भेजा गया है। इनके इस्तेमाल, सिम कार्ड, कॉलिंग पैटर्न और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में एफआईआर भी दर्ज की गई है। पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
सौगात अस्थान चला रहा था पूरा नेटवर्क
एसीपी साइबर क्राइम शाहिदा परवीन ने बताया कि छानबीन में पता चला है कि जिन चार स्थानों से अवैध सिम बॉक्स बरामद किए गए, वे सभी सौगात अस्थान नाम के जालसाज ने किराए पर ले रखे थे। आरोपी ने जगहें किराए पर लेने के बाद वहां पूरा सिस्टम लगाया था। वह सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी भी करता था।
सौगात का नाम हाल ही में वाराणसी में पकड़े गए जालसाजों से पूछताछ के दौरान सामने आया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस को उसके दो अलग-अलग पते वाले आधार कार्ड मिले हैं। एक आधार कार्ड पर कानपुर और दूसरे पर सुशांत गोल्फ सिटी का पता दर्ज है। एसीपी ने बताया कि हाल के दिनों में लखनऊ में हुई डिजिटल अरेस्ट की घटनाओं में भी बरामद सिम बॉक्स का इस्तेमाल किया गया है।