यूपी चुनाव 2022: पिछड़ों के बीच माहौल बनाने निकलेंगे भाजपा के नेता, घर-घर जाएंगे भाजपा के पिछड़े कार्यकर्ता
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने प्रदेश में पिछड़ों के बीच माहौल बनाने की कमान संभाल ली है। इसके लिए पिछड़े वर्ग की बस्तियों में भाजपाई घर घर दस्तक देंगे।
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पिछड़े वर्ग के मंत्रियों और विधायकों के भाजपा छोड़कर जाने से बिगड़े माहौल को सुधारने के लिए भाजपा के पिछड़ी जातियों के नेता पूरे प्रदेश में निकलेंगे। पार्टी ने एक बार फिर सरकार बनाने के लिए पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को साधने की कमान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को सौंपी है।
केशव प्रसाद मौर्य पूरे माहौल को सुधारने के साथ खासतौर पर मौर्या समाज के बीच पार्टी की बात रखेंगे। केशव अपने समाज के लोगों को समझाने का प्रयास करेंगे कि स्वामी प्रसाद ने समाज के लिए नहीं बल्कि अपने परिवार के लिए भाजपा छोड़ी है। केशव और उनके समर्थक समाज के बीच जाकर बताएंगे कि भाजपा ने मौर्य समाज को सरकार और संगठन में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। उधर, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव भी सभी समाजों से समन्वय के साथ हर जिले में कुर्मी समाज के लोगों को साधेंगे।
केंद्रीय राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति निषाद समाज, केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा लोधी समाज, केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी कुर्मी समाज और संजीव बालियान को जाट समाज को साधने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने पिछड़े वर्ग के सांसदों के साथ राष्ट्रीय पदाधिकारियों, निगम, आयोग और बोर्ड के अध्यक्षों व सदस्यों को भी उनकी जातियों में सक्रिय कर दिया है।
हर विधानसभा क्षेत्र में सौ नेता उतारे
भाजपा ने पिछड़े वर्ग को साधने के लिए हर विधानसभा क्षेत्र में पिछड़ी जातियों के सौ-सौ नेता और कार्यकर्ताओं को उतार दिया है। पिछड़े वर्ग की अलग-अलग जातियों से जुड़े नेता उनकी जाति से जुड़ी बस्तियों और प्रमुख लोगों से घर घर जाकर संपर्क करेंगे।
समाज के लोगों की छोटी-छोटी बैठक कर उनके बीच योगी-मोदी सरकार में पिछड़े वर्ग को मिले लाभ को बताएंगे। साथ ही यह भी बताने का प्रयास करेंगे कि सपा में केवल पिछड़े वर्ग की एक ही जाति और परिवार के लोगों को आगे बढ़ाया जाता है।
भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप बताते हैं कि प्रदेश और प्रदेश के बाहर से आए पिछड़े वर्ग के दस हजार से अधिक कार्यकर्ता विधानसभा क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं।