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यूपी : उपभोक्ताओं को पोस्टपेड व प्रीपेड मीटर चुनने का अधिकार, आयोग ने अपने टैरिफ आदेश पर कहा...

Mon, 24 Nov 2025 09:32 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Mon, 24 Nov 2025 09:32 PM IST
सार

यूपी विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लेने के लिए बाध्य नहीं हैं। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) उपभोक्ताओं को पोस्टपेड और प्रीपेड मीटर चुनने का अधिकार देती है। मामले पर कई अदालतों में याचिकाएं लंबित हैं, इसलिए उपभोक्ताओं की सहमति अनिवार्य मानी जाएगी।

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UP: Consumers have the right to choose between postpaid and prepaid meters, the commission said in its tariff
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

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लखनऊ में विद्युत नियामक आयोग ने टैरिफ आदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर बड़ा फैसला दिया है। इसमें स्पष्ट किया है कि भले ही आरडीएसएस स्कीम में उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर अथवा प्रीपेड मीटर देने की बाध्यता है, लेकिन राष्ट्रीय कानून विद्युत अधिनियम 2003 की 47 (5) उपभोक्ताओं को पोस्टपेड व प्रीपेड चुनने का विकल्प देता है।

आयोग ने अपने टैरिफ आदेश में यह भी कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता पर अभी आयोग कोई भी टिप्पणी इसलिए नहीं कर रहा है। क्योंकि देश के कई न्यायालय में इस मामले पर याचिकाएं लंबित है। उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं पर बिना अनुमति स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। दो दिन पहले जारी हुए बिजली दर (टैरिफ) आदेश में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता विद्युत अधिनियम 2003 में कहीं भी नहीं है, और उपभोक्ता के अधिकार सर्वोच्च हैं।

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आयोग ने अपने टैरिफ आदेश में कहा है कि विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020 तथा आरडीएसएस योजना के तहत केवल नए कनेक्शन स्मार्ट/प्रीपेड मीटर के माध्यम से देने की आवश्यकता है। लेकिन विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) की भाषा स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य नहीं बनाती।

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यानी कि उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड का विकल्प देता है। चूंकि इस विषय पर कई राज्यों के उच्च न्यायालयों में जनहित याचिकाएं लंबित हैं, इसलिए आयोग कानूनी स्थिति पर टिप्पणी से परहेज कर रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब स्वयं विद्युत नियामक आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों का विकल्प देती है, और यह मामला देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में विचाराधीन है, तो ऐसे में पावर कॉरपोरेशन किस अधिकार से उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर को उनकी सहमति के बिना अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर रहा है?

जबकि देश का राष्ट्रीय कानून उसे पोस्टपेड व प्रीपेड का विकल्प देता है । उपभोक्ता परिषद यह भी कहना चाहता है जब तक मामला अदालतों में विचाराधीन है तब तक पावर कॉरपोरेशन को कानून का पालन करते हुए उपभोक्ताओं को विकल्प देना अनिवार्य है। भारत का राष्ट्रीय कानून—विद्युत अधिनियम 2003—किसी भी नियम से हमेशा बड़ा होता है। इसलिए वही व्यवस्था लागू होनी चाहिए जो कानून में निर्धारित है।

उपभोक्ता परिषद ने निम्न मांगें रखी
 

  • पावर कॉरपोरेशन तुरंत उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प उपलब्ध कराए।
  • किसी भी उपभोक्ता के स्मार्ट मीटर को बिना सहमति के प्रीपेड मोड में परिवर्तित न किया जाए।
  • अदालत में लंबित मामलों के निर्णय तक कोई भी अनिवार्यता लागू न की जाए।
  •  

 

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