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यूपी : उपचुनाव से दूरी बनाकर कांग्रेस ने साधे कई निशाने, महाराष्ट्र में सपा नहीं बना सकी पार्टी पर दबाव

Fri, 22 Nov 2024 12:23 AM IST
रोहित मिश्र चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चन्द्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Fri, 22 Nov 2024 12:23 AM IST
सार

UP by-election: यूपी के उपचुनावों में कांग्रेस ने दूरी बना ली थी। वह चार सीटें मांग रही थी। दो सीटें मिलने के दशा में उसने चुनाव से दूर रहने का फैसला किया। इस फैसले की अब समीक्षा हो रही है। 

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UP: Congress targeted many targets by keeping distance from by-elections, SP could not put pressure on the par
चुनाव प्रचार में अखिलेश के साथ नहीं दिखे राहुल और प्रियंका। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपचुनाव का परिणाम चाहे जो हो, लेकिन कांग्रेस ने इस चुनाव से दूरी बनाकर कई निशाने साधे हैं। गठबंधन की दुहाई देने के बाद पार्टी के बड़े नेता उपचुनाव में सपा के मंच पर नहीं दिखे। सिर्फ विधानसभा क्षेत्र प्रभारी ही नजर आए। सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने इस रणनीति से भविष्य की सियासत साधी है। अब उसके हाथ खुले हैं। भविष्य में सपा ने साथ नहीं लिया तो दूसरे विकल्पों पर भी वे विचार कर सकते हैं।

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लोकसभा चुनाव के बाद हुए विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटें मांगी थीं, लेकिन सपा ने सिर्फ गाजियाबाद और खैर देने की बात कही। ऐसे में कांग्रेस ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। उसकी इस रणनीति के पीछे अन्य राज्यों के चुनाव भी थे। उपचुनाव में कांग्रेस के पैर पीछे खींचने का नतीजा रहा कि सपा महाराष्ट्र में सीट के लिए दबाव नहीं बना सकी। यूपी में हुईं जनसभाओं के दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय मंच पर नजर नहीं आए। ये दोनों पहले वायनाड और फिर महाराष्ट्र में सक्रिय रहे।

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कांग्रेस अध्यक्ष बोले गठबंधन अभी जारी 

UP: Congress targeted many targets by keeping distance from by-elections, SP could not put pressure on the par
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय। - फोटो : amar ujala

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। उनके मुताबिक गठबंधन जारी है, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। सपा की ओर से इन्हें मंच पर बुलाने की कोई सकारात्मक पहल भी नहीं हुई। ऐसे में कांग्रेस नेताओं ने अपना सम्मान और स्वाभिमान बचाने के लिए वैकल्पिक रास्ता अपनाया और वे दूसरे राज्यों का रुख कर गए। फूलपुर से कांग्रेस से निकाले गए पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेश यादव अंत तक मैदान में डटे रहे। सियासी जानकारों का कहना है कि यदि सपा उपचुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को अपने साथ रखती तो यह उसके लिए फायदेमंद होता। अब वर्ष 2027 के चुनाव में कांग्रेस सपा के साथ रहने के लिए विवश नहीं होगी। उसके भी हाथ खुले रहेंगे। सपा की ओर से तवज्जो न मिलने पर वह दूसरे दलों के साथ भी जा सकती है।

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