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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP Climate Change Conference 2021: Sri Sri Ravi Shankar said, even with a positive mindset, we can control climate change

उप्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2021 : श्रीश्री रविशंकर बोले, सकारात्मक मानसिकता से भी कर सकते हैं जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण

Fri, 29 Oct 2021 07:50 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 29 Oct 2021 07:50 PM IST
सार

श्रीश्री ने कहा कि हिंदू संस्कृति में किसी भी नए प्रतिष्ठान से पहले बीज बोना उस प्रतिष्ठान की सफलता और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी योगदान देता है।

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विस्तार

इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश जलवायु परिवर्तन सम्मेलन- 2021 में आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा कि सकारात्मक मानसिकता रखने से भी जलवायु परिवर्तन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।शुक्रवार को सम्मेलन के दूसरे दिन का शुभारंभ श्रीश्री रविशंकर एवं केंद्रीय इस्पात तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने किया। इस अवसर पर श्रीश्री ने कहा कि हिंदू संस्कृति में किसी भी नए प्रतिष्ठान से पहले बीज बोना उस प्रतिष्ठान की सफलता और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है। साथ ही यह जलवायु परिवर्तन को कम करने में भी योगदान देता है।

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उन्होंने कहा कि पौधरोपण और सकारात्मक मानसिकता रखने से भी जलवायु परिवर्तन को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जल की सफाई न केवल जलवायु और स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि देवी लक्ष्मी को भी आकर्षित करती है। उन्होंने प्लास्टिक को जलाकर खतरनाक उत्सर्जन पर भी विचार-विमर्श किया। विमर्श हुआ कि  यह वातावरण में डाइऑक्सिन, फ्यूरान, पारा और पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल जैसी जहरीली गैसों का उत्सर्जन करता है तथा वनस्पति, और मानव एवं पशु स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है।
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मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि चाहे पौधरोपण हो या नदियों की सफाई की गई हो, इससे उप्र हाल के वर्षों में बदल गया है। नागरिकों में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता कई गुना बढ़ी है और सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं। अपर मुख्य सचिव पर्यावरण मनोज सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में, पूरी दुनिया ने जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों को देखा है। इसने वैश्विक पारिस्थितिक तंत्र, स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। सम्मेलन में विशेषज्ञों, पर्यावरणविदें, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदें, सरकारी प्रतिनिधियों और विद्वानों के विचार-विमर्श के कुल 11 शैक्षिक, तकनीकी सत्र दो दिनों में सम्पन्न हुए। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील पांडेय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव पवन शर्मा, मुकेश कुमार, आशीष तिवारी,  मुकेश सिंह, ब्रजेश सिंह, आशीष चतुर्वेदी आदि मौजूद थे।

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