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थानाभवन, मीरापुर व बाह विधानसभा क्षेत्र: चीनी के कटोरे में गन्ना मंत्री सुरेश राणा का असल इम्तिहान

Tue, 01 Feb 2022 12:54 PM IST
ishwar ashish गौरव त्यागी, अमर उजाला, शामली
गौरव त्यागी, अमर उजाला, शामली Published by: ishwar ashish Updated Tue, 01 Feb 2022 12:54 PM IST
सार

भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच हो रही गन्ना किसानों को लुभाने की कोशिशों के बीच यह चुनाव गन्ना मंत्री सुरेश राणा के लिए एक इम्तिहान है। रालोद-सपा गठबंधन ने अशरफ  अली खान, बसपा ने जहीर मलिक, कांग्रेस ने सत्यम सैनी और आम आदमी पार्टी ने अरविंद देशवाल को मैदान में उतारा है।

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UP Chunav 2022: Read about the political situation of thanabhawan.
भाजपा प्रत्याशी सुरेश राणा, रालोद-सपा उम्मीदवार अशरफ अली खान व बसपा प्रत्याशी जहीर मलिक। - फोटो : amar ujala

विस्तार

दरिया के तलातुम से तो बच सकती है कश्ती।

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कश्ती में तलातुम हो तो साहिल न मिलेगा। -मलिकजादा मंजूर अहमद

तलातुम यानी तूफान जोरों पर है। तूफान में ही कश्ती है। मौजें भी बेताब हैं, नाविक की कुशलता का इम्तिहान लेने को। पर, खतरा सिर्फ लहरों से ही नहीं। खतरा सिर्फ उठते तूफान से ही नहीं। उससे तो लड़ ही लेंगे। लड़ भी रहे हैं। पर, जो बवंडर कश्ती के अंदर है, उसका क्या? वो बवंडर जो तूफान से भी ज्यादा बेताब है कश्ती को डुबोने को...। यूपी में चुनावी रणभूमि का कुछ ऐसा ही हाल है। यहां पग-पग पर खतरे हैं। बाहर भी, घर के भीतर भी...। कुल मिलाकर कहें तो इम्तिहान कठिन है...। भितरघातियों से पार पाने की हर दल के सामने चुनौती है। बहरहाल, आज पढ़ें थानाभवन, बाह और मीरापुर विधानसभा क्षेत्रों में कैसे समीकरण बन रहे हैं...

सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और हरियाणा की सीमाओं से जुड़ी शामली जिले की थानाभवन सीट चीनी का कटोरा कहे जाने वाले क्षेत्र का हिस्सा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में गन्ना और गन्ना किसान हमेशा से बड़ा मुद्दा रहे हैं। विपक्ष और किसान संगठन गन्ना मूल्य भुगतान, गन्ना मूल्य वृद्धि के मुद्दे पर सरकार को घेरते रहे हैं, तो भाजपा सरकार पूर्व सरकारों से बेहतर भुगतान दर होने का दावा करती रही है।
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भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच हो रही गन्ना किसानों को लुभाने की कोशिशों के बीच यह चुनाव गन्ना मंत्री सुरेश राणा के लिए एक इम्तिहान है। रालोद-सपा गठबंधन ने अशरफ  अली खान, बसपा ने जहीर मलिक, कांग्रेस ने सत्यम सैनी और आम आदमी पार्टी ने अरविंद देशवाल को मैदान में उतारा है।
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सुरेश राणा और अशरफ  अली खान इससे पहले 2012 के चुनाव में भी आमने-सामने थे। तब दोनों के बीच कांटे मुकाबला हुआ था और महज 265 वोटों के अंतर से सुरेश राणा ने जीत दर्ज की थी। सुरेश राणा को 53,719 वोट मिले थे। उस समय दो मुस्लिम प्रत्याशियों में रालोद के अशरफ अली को 53,454 और बसपा के अब्दुल वारिस को 50 हजार वोट मिले थी। 2017 में सुरेश राणा ने फिर जीत दर्ज की। क्षेत्र के मौजूदा सियासी मिजाज की बात करें, तो गन्ना मूल्य भुगतान सहित किसानों के अन्य मुद्दे, कानून-व्यवस्था और विकास को लेकर बहस छिड़ी हुई है।

थानाभवन निवासी अरविंद बताते हैं, इस बार यहां चुनाव में कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं। वह कहते हैं, कृषि कानूनों को लेकर हुए आंदोलन का असर अब भी बरकरार है। हिरनवाड़ा निवासी बिजेंद्र सिंह कहते हैं, केंद्र सरकार ने कानूनों को वापस ले लिया, इससे भाजपा को बड़ा नुकसान होने से बच गया है। कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दे का फायदा उसे मिल रहा है।

कस्बा जलालाबाद निवासी अकरम का कहना है, भाजपा बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर विफल साबित हुई है। पर, चुनाव में अंतिम समय में माहौल बदल जाते हैं। क्योंकि, धर्म और जाति के आधार पर ही ज्यादातर लोग वोट करते हैं। बुंटा निवासी साजिद का कहना है, सरकारी योजनाओं का लाभ सभी वर्गों को मिला है। यह सही है। लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि महंगाई बेतहाशा बढ़ी है और कोरोना महामारी के चलते आमदनी घट गई है।

थानाभवन मिल गन्ना भुगतान में फिसड्डी

शामली जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक चीनी मिल हैं। इनमें शामली विधानसभा क्षेत्र में अपर दोआब शुगर मिल, कैराना विधानसभा क्षेत्र में राणा ग्रुप की ऊन चीनी मिल और थानाभवन विधानसभा क्षेत्र में बजाज समूह की चीनी मिल हैं। तीनों मिलों में से ऊन चीनी मिल ने ही अभी तक पिछले पेराई सत्र के गन्ना मूल्य का भुगतान किया है। थानाभवन मिल भुगतान के मामले में फिसड्डी चल रही है।

जातीय समीकरणों में उम्मीदवारों के फिट बैठने की चुनौती
- थानाभवन सीट ऐसी है कि जहां जातीय समीकरण सभी दलों का इम्तिहान लेते हैं।
- मुस्लिम मतदाताओं की संख्या यहां करीब 98 हजार है। अन्य जातियों में अनुसूचित जातियां करीब 60 हजार, जाट 40 हजार, सैनी 35 हजार, कश्यप 30 हजार, ठाकुर 22 हजार,  ब्राह्मण 14 हजार, वैश्य 10 हजार, अन्य मतदाता 18 हजार हैं। इस सीट के जातिगत समीकरण की बदौलत मुस्लिम, वैश्य, ठाकुर, सैनी, कश्यप  भी विधायक बन चुके हैं।

मीरापुर : कांटे की जंग की बन रही पृष्ठभूमि, अगर-मगर से किसी भी राजनीतिक दल की राह आसान नहीं

(मदन बालियान, मुजफ्फरनगर)। मीरापुर वही विधानसभा क्षेत्र है, जिसके कवाल गांव में नौ साल पहले भड़की दंगे की चिंगारी से मुजफ्फरनगर जल उठा था। हिंदुत्व की लहरों पर सवार होकर भाजपा पहले केंद्र और फिर प्रदेश की सत्ता पर काबिज हो गई। इस बार भी चुनावी समर में सियासी मंचों पर चल रहे शब्दबाणों से पुराने घाव कुरेदे जा रहे हैं। अगर और मगर में समीकरण ऐसे उलझे हैं कि किसी भी राजनीतिक दल की राह यहां आसान नहीं है।

करीब 1.20 लाख मुस्लिम मतदाताओंं की चाल पर सबकी निगाहें हैं। बसपा से मोहम्मद सालिम और कांग्रेस से पूर्व विधायक मौलाना जमील कासमी मैदान में हैं। 2012 के चुनाव में बसपा के टिकट पर मौलाना जमील अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतों के गठजोड़ से विधायक बने थे। 2017 में लहर के बावजूद भाजपा के अवतार सिंह भड़ाना सपा-कांग्रेस गठबंधन के लियाकत अली से महज 193 वोटों के अंतर से जीते थे। मामूली वोटों के अंतर से हुई यही जीत भाजपा के रणनीतिकारों की मुश्किलें बढ़ा रही है। इस बार भी मुस्लिम मतदाताओं का रुझान काफी हद तक नतीजे तय करेगा।

मुस्लिम मतों के बंटवारे पर भाजपा की निगाहें टिकी हैं। विधायक अवतार सिंह भड़ाना की क्षेत्र से बेरुखी और फिर रालोद में चले जाने से मतदाताओं के बीच नाराजगी है। भाजपा ने इस बार पूर्व एमएलसी प्रशांत गुर्जर को प्रत्याशी बनाया है। अवतार  से जो नाराजगी है उससे ही प्रशांत गुर्जर को जूझना पड़ रहा है। भड़ाना की तरह वह भी जिले से बाहर के हैं। भाजपा की नजर पिछड़े और अति पिछड़े वोट बैंक के साथ जाटों और गुर्जरों के मतों में सेंधमारी पर भी है।

सपा-रालोद गठबंधन से चंदन चौहान मैदान में हैं। उनके दादा नारायण सिंह प्रदेश के उप मुख्यमंत्री, पिता संजय चौहान सांसद व विधायक रह चुके हैं। चंदन की हार-जीत मुस्लिम, जाट, गुर्जर मतों के समीकरण पर टिकी है। बसपा के अनुसूचित जाति और मुस्लिम समीकरण का भी चुनाव में इम्तिहान है। रालोद छोड़कर ऐन वक्त पर कांग्रेस से टिकट पाने वाले मौलाना जमील पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहते हैं। बसपा ने 2017 में उन्हें टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह पूर्व विधायक नवाजिश आलम को चुनाव लड़ाया था। मुद्दों की बात करें तो यहां कानून-व्यवस्था, शिक्षा, चिकित्सा, किसान और सड़कें सबसे बड़ा मुद्दा हैं।

वोटों का गणित
मुस्लिम     1.20 लाख
अनुसूचित जाति     53 हजार
जाट     34 हजार
गुर्जर     18 हजार
ठाकुर     10 हजार
सैनी     21 हजार
कश्यप, प्रजापति     24 हजार
पाल    16 हजार
अन्य     19 हजार

बाह : चंबल के बीहड़ों में राजघराने की घेरेबंदी, भाजपा ने दूसरी बार रानी पक्षालिका को बनाया प्रत्याशी

(देश दीपक तिवारी, आगरा)। सूबे की सियासत में कोई भी आए या जाए चंबल के बीहड़ों में राजघराने का वर्चस्व रहा है। पिछले 17 चुनावों में यहां 11 बार भदावर घराने का ही सदस्य विधायक चुना गया। एक बार फिर भाजपा ने इस सीट से रानी पक्षालिका सिंह को प्रत्याशी बनाया है। सपा-रालोद गठबंधन से मधुसूदन शर्मा उम्मीदवार हैं। जबकि, कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी मनोज दीक्षित और बसपा ने निषाद समाज के नए चेहरे नितिन वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है।

क्षत्रिय, ब्राह्मण व निषाद (मल्लाह) बहुल इस क्षेत्र में फिर विपक्षी दल राजघराने की घेरेबंदी में जुटे हैं। 1962 में पहली बार इस सीट पर भदावर घराने का परचम लहराया। तब महाराज महेंद्र रिपुदमन सिंह यहां से निर्दलीय लड़े और जीते। इसके बाद से 11 बार चुनावों में राजघराने का ही कोई सदस्य यहां झंडा बुलंद करता रहा है।

 2007 में बसपा से उतरे मधुसूदन शर्मा ने राजघराने का वर्चस्व तोड़ा था। महेंद्र अरिदमन सिंह को हरा कर तब मधुसूदन ने बड़ा उलटफेर किया था। पर, पांच साल बाद ही फिर सीट राजघराने के कब्जे में चली गई। 2012 में अरिदमन ने सपा की टिकट पर यहां वापसी की। राज्य में कैबिनेट मंत्री बने। 2017 के चुनाव में राजा की जगह रानी पक्षालिका भाजपा से विधायक बनीं। मधुसूदन के सपा-रालोद से उतरने से इस बार यहां सियासी मुकाबला दिलचस्प है।

मुद्दों पर मुखर हैं मतदाता
जरार रोड पर मिले परचून दुकानदार अनूप सिंह कहते हैं, क्षेत्र में सड़कें खराब पड़ी हैं। कोई काम-धंधा नहीं है। वहीं, जरार निवासी खजान सिंह कहते हैं, विधायक की छवि अच्छी है। कोरोना में बहुत मदद की। कैंजरा रोड निवासी मालती देवी इस बात से इत्तफाक नहीं रखतीं। वह कहती हंै, यहां कोई काम नहीं हुए। पडुआपुरा निवासी मनोहर चतुर्वेदी कहते हैं, राजघराना सिर्फ चुनाव के वक्त ही जनता के बीच आता है। पिनाहट निवासी निवासी मुरलीदास का कहना है कि बाह में चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं। अगर कोई आकस्मिक स्थिति बन जाए तो मरीज को 80 किमी. दूर आगरा लेकर भागना पड़ता है या सैफई।

30 करोड़ से शुरू कराई चंबल डाल नहर

भाजपा विधायक रानी पक्षालिका सिंह ने कहा कि चंबल डाल योजना से सिंचाई के लिए 30 करोड़ रुपये से नए पंप लगवाए हैं। पिनाहट से तासौड़, जैतपुर से लेकर ऊदी मोड़ बॉर्डर तक 25 किमी. सड़क मंजूर हो गई है। बटेश्वर में अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव में स्मारक बनाया है। मंदिर व घाटों का जीर्णोद्धार कराया है। दो कन्या इंटर कॉलेज स्वीकृत कराए हैं।  -रानी पक्षालिका सिंह, भाजपा विधायक

बाह को बनाएंगे नया जिला
प्रत्याशी सपा-रालोद मधुसूदन शर्मा का कहना है कि बाह से बटेश्वर तक कोई विकास नहीं हुआ। सिंचाई के लिए पानी नहीं है। खेती बर्बाद हो रही है। कोई उद्योग-धंधा नहीं लगा। सड़कें टूटी पड़ी हैं। इलाज की सुविधाएं नहीं हैं। सपा सरकार बनने पर बाह को नया जिला बनाएंगे। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएंगे। ताकि बाह के लोगों को गैर राज्यों में नहीं जाना पड़े।

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