यूपी: साइबर सुरक्षा में सेंध लगा रहे चीन-पाकिस्तान, देश में सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना जरूरी
Cyber security in UP: लखनऊ में हुए इस सेमिनार में ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में बताया।
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चीन-पाकिस्तान देश की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, जिस पर लगाम लगाने की जरूरत है। इसका सामना करने के लिए सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत है। साइबर किल-चेन को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। फोरेंसिक के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता और दोषियों को दंड दिलाया जा सकता है। ये बातें विशेषज्ञों ने यूपी स्टेट इंस्ट्टीयूट ऑफ फोरेंसिक साइंसेज में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कही।
बुधवार को साइबर सुरक्षा, फॉरेंसिक साइंस की उन्नति समेत कई विषयों पर पैनल डिस्कशन हुआ। समापन सत्र के मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान तथा अति विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति राजीव सिंह के साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. पोरवी पोखरियाल निदेशक एनएफएसयू दिल्ली, राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के कुलपति अमरपाल सिंह ने भी संबोधित किया। न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने कहा कि आज के समय में फोरेंसिक विज्ञान का महत्व बढ़ता जा रहा है।
यह संस्थान भविष्य के फोरेंसिक वैज्ञानिकों व कानूनी विशेषज्ञों के लिए मील का पत्थर साबित होगा। न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने कहा कि भारत में फोरेंसिक विज्ञान तेजी से बदल रहा है और इस क्षेत्र में यूपीएसआईएफएस अग्रणी भूमिका निभाएगा। अमर पाल सिंह ने चेताया कि तकनीकी विकास की गति इतनी तेज है कि कानून उसके पीछे छूट जाता है।
अतिथि वक्ता प्रो. पूर्वी पोखरियाल ने साइबर अपराध को सीमाहीन अपराध बताते हुए कहा कि भारत को यूरोप, अमेरिका और चीन के अनुभवों से सीखना होगा। आईपीएस ब्रजेश सिंह ने कहा कि छोटा सा परिवर्तन बड़ा असर डाल सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। एक मालवेयर की वजह से देश का सबसे बड़ा पोर्ट तीन माह तक ऑपरेट नहीं हो पाया। लॉकबिट तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ काम करना पड़ा। यूपीएसआईएफएस के फाउंडिग डायरेक्टर जीके गोस्वामी ने कहा कि अगर हमारे साक्ष्य सही हैं, तभी हम न्याय दिला सकेंगे।
विषय विशेषज्ञों ने भी दी जानकारी
ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में बताया। निर्भया व गुड़िया रेप केस का उदाहरण देकर ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट शांतनु भट्टाचार्य ने मिक्स्ड डीएनए एनालिसिस की जटिल प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि इससे केस सुलझाने में आसानी होती है। सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग डायग्नॉन्टिक्स (उप्पल) हैदराबाद के स्टाफ साइंटिस्ट व ग्रुप हेड डॉ मधुसूदन रेड्डी नंदी नेनी ने नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग, रैपिड डीएनए टेक्नोलॉजी, मिनिएचर व पोर्टेबल डिवाइस की जानकारी दी।
कार्यक्रम में एनसेस्ट्री इंटरफेस व फॉरेंसिक केसवर्क के विभिन्न पहलुओं पर सीडीआरआई लखनऊ के साइंटिस्ट राजेंद्र सिंह, आईईएसआर नोएडा के सीईओ आशीष दूबे, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलेयोसाइंसेस लखनऊ के साइंटिस्ट डॉ. नीरज राय व हैदराबाद के बायोएक्सिस कंपनी के सीईओ अमित कुमार, अमेरिकी साइबर एक्सपर्ट पवन शर्मा, आईआईआईटी लखनऊ के निदेशक एएम शेरी, बायोटॉक्स सॉल्यूशन के निदेशक शिव पूजन, एसआईएफएस नई दिल्ली के सीईओ रंजीत सिंह, केजीएमयू के फॉरेंसिक मेडिसन व टॉक्सिकॉलोजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. शिवली, एनआईपीईआर रायबरेली के फैकल्टी डॉ. निहार रंजन, बायोटॉक्स सॉल्यूशंस के निदेशक डॉ. शिव पूजन ने भी शिरकत की।