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यूपी : मुख्यमंत्री ने कहा, गो आश्रय स्थलों में शानदार काम का नेतृत्व करें जिला पंचायत अध्यक्ष, गांव-गोवंश आदि से ऋषि व कृषि परंपरा की आधार
Tue, 28 Sep 2021 11:16 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 28 Sep 2021 11:16 PM IST
सार
उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्षों से कहा है कि वे जिला पंचायत को सरकारी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ने की जगह उसके कस्टोडियन के रूप में स्वयं देखभाल, विकास कर आगे बढ़ाएं।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो आश्रय स्थलों की बेहतर व्यवस्था का नेतृत्व जिला पंचायत अध्यक्षों को करने का आह्वान किया है। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्षों से कहा है कि वे जिला पंचायत को सरकारी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ने की जगह उसके कस्टोडियन के रूप में स्वयं देखभाल, विकास कर आगे बढ़ाएं।
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मुख्यमंत्री मंगलवार को योजना भवन में जिला पंचायत अध्यक्षों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गांव व गोवंश आदि से ऋषि व कृषि परपंरा की आधार रही हैं। हमारा कोई यज्ञ गौमाता के बिना पूरा नहीं होता। देश धन-धान्य से पूर्ण हो, इसका आधार गोमाता रही हैं। इधर आधुनिकता की दौड़ में इस परंपरा से काटने का प्रयास हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष निराश्रित गो आश्रय स्थलों की चिंता करें।
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पहले जिला पंचायतें कांजी हाउस चलाती थीं, जो क्रूरता की प्रतीक थीं। ये बंद हो गईं। आज कांजी हाउस नहीं, गोरक्षा व गो संवर्धन केंद्र चलाने हैं। पशुपालन विभाग का सहयोग लेकर यहां शानदार कार्य करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि गो आश्रय स्थलों से ऊर्जा की भी बचत होगी। उन्होंने गोरक्षनाथ मंदिर में गोबर गोबर गैस प्लांट मॉडल का उल्लेख कर बताया कि इस तरह गो आश्रय स्थलों पर भी किया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री ने गुणवत्ता पूर्ण कार्य की वकालत करते हुए कहाकि जिला पंचायत अध्यक्ष अपने घर की तरह जिला पंचायतों का काम करें। इसके कस्टोडियन की तरह भूमिका निभाएं। संपत्तियों की सुरक्षा, रंगाई-पोताई, मेंटीनेंस के साथ इसमें वृद्धि के प्रयास करें।
समय पर काम हो तो कांट्रैक्टर को भुगतान के लिए गुहार न लगानी पड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्य की गुणवत्ता कार्य के समय से ही सुनिश्चित की जानी चाहिए। पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित होना चाहिए। कार्यों की साप्ताहिक, पाक्षिक व मासिक समीक्षा हो और समयसीमा, गुणवत्ता से काम हो। यदि काम समय से हुआ और हैंडओवर भी हो गया तो कांट्रैक्टर को समय पर भुगतान भी होना चाहिए। कांट्रैक्टर को इसके लिए जिला पंचायत का चक्कर लगाने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उसे भुगतान की गुहार लेकर शासन नहीं आने पड़ना चाहिए।
जिला पंचायतों के पास 2900 करोड़, बनाएं कार्ययोजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला पंचायतें त्रिस्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था की रीढ़ हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष 15 से 65 लाख की आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। कई जिला पंचायतों की आबादी कई देशों से ज्यादा है। ऐसे में जन विश्वास पर खरा उतरने की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महत्व इस बात का नहीं है कि सारे पॉवर दे जाएं। महत्व इस बात का कि पॉवर व विश्वास बनाए रखने में कितना सफल रहे। मुख्यमंत्री ने कहा जिला पंचायतों के पास 2900 करोड़ रुपये खर्च के लिए पड़े हैं। शासन ने भी प्राथमिकताएं भेजी हैं।
जिला पंचायतों को डीएम व सीडीओ के साथ बैठकर प्राथमिकता तय कर कार्ययोजना बनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक वर्ष में एक साथ सभी सदस्यों को संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। ऐसे में 5 वर्ष के काम की कार्ययोजना बनाएं। मुख्यमंत्री ने जिला पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए।
गांव वालों को बताएं कि यूजर चार्ज देकर भी स्वच्छ जल लेना बहुत जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन के लिए जल बहुत महत्वपूर्ण है। सरकार हर घर जल का कनेक्शन देने का काम कर रही है। आधी बीमारी शुद्ध जल से खत्म हो जाती है। ऐसे में गांव वालों को समझाएं कि यदि यूजर चार्ज देकर भी अच्छा जल मिलता है तो इस योजना से जुड़ना चहिए। उन्होंने कहा कि इससे बीमारी का बड़ा खर्च बच जाएगा।
बदनामी वाली कार्यप्रणाली से बचें
मुख्यमंत्री ने 15 वर्ष पहले एक गांव के भ्रमण की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 1.5 किमी. कच्ची सड़क पर 7-8 पुलिया थी। पता करने पर ठेके में भ्रष्टाचार की कार्यप्रणाली पता चली। उन्होंने कहा कि इस तरह के काम बदनामी का आधार बनती है। यहीं से पतन की शुरुआत होती है। ऐसे में अपने अच्छे कार्य से मैसेज दें। उन्होंने जिला पंचायत अध्यक्षों को अपने गांव व सीएचसी को गोद लेकर वहां के विकास की जिम्मेदारी उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन गांवों को ऐसा बनाएं कि वह नीति आयोग के अधिकारियों व विदेशी मेहमानों के आने पर भ्रमण के लिए कह सकें।
मातृभूमि योजना जल्द, विकास में भागीदार बनने पर मिलेगा नाम
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्दी ही मातृभूमि योजना शुरू की जा रही है। इसमें कोई भी अपने गांव के विकास से जुड़े कार्य में योगदान कर सकता है। यदि सड़क, स्कूल, सामुदायिक भवन या अन्य कार्यों में आने वाले खर्च का वह 50 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है,तो उस प्रोजेक्ट में उसके योगदान व परिजन की स्मृति के उल्लेख की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने अध्यक्षों को जनसहयोग की इस योजना को तेजी से आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कहा कि यह योजना जनाधार बढ़ाने वाली होगी।