यूपी कैबिनेट के फैसले: छोटे शहरों के प्रमुख स्थानों के विकास के लिए वंदन योजना, शाहजहांपुर में खुलेगा नया विवि
मंगलवार को यूपी कैबिनेट की बैठक हुई। कुल 21 प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि 19 प्रस्ताव पारित हुए है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
छोटे निकायों में मौजूद धार्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों के अवस्थापना विकास के लिए सरकार ने 'वंदन ' के नाम से एक नई योजना शुरू करने का फैसला किया है। इस योजना के जरिए इन स्थानों पर प्रकाश, पेजयजल, जल निकासी, शौचालय और साफ-सफाई समेत सभी नागरिक सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी । इससे संबंधित नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को मंगलवार कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है ।
नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने बताया कि वंदन योजना के तहत सिर्फ ऐसे जरूरी कार्यों को ही कराया जाएगा, जो किसी दूसरी योजना में स्वीकृत न हों। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों में स्थित धार्मिक, सांस्कृतिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों के विकास पर खास फोकस किया जाएगा। इस योजना के शुरू होने से ऐसे स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराई जा सकेंगी।
योजना के प्रारूप के मुताबिक एक जिले की सभी नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में एक साल में पूरा होने वाली अधिकतम दो योजनाओं को ही मंजूरी दी जाएगी। डीएम की अध्यक्षता में गठित चयनित समिति द्वारा योजनाओं का चयन किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में पैसे को खर्च करने की सीमा 18 माह के लिए बढ़ाई जा सकेगी।डीएम द्वारा अपने क्षेत्र में स्थित सांस्कृतिक, पौराणिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों और उन पर विभिन्न विभागों द्वारा पूर्व में कराए गए कामों की सूची तैयार कराएंगे।
फतेहपुर में सीवरेज परियोजना पर खर्च होंगें 293 करोड़
फतेहपुर शहर के हर घर को सीवर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अमृत-02 के तहत सीवरेज व एसटीपी बनाने से जुड़ी परियोजना पर 293.36 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे जुड़े नगर विकास विभाग के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे गई है। प्रस्ताव के मुताबिक इस धनराशि से फतेहपुर में जोन एक में फेज-1की परियोजना का काम कराया जाएगा। परियोजना में सीवर लाइन डालने के साथ ही सीवेज शोधन के लिए एसटीपी का निर्माण कराया जाएगा। परियोजना के तहत शहर के जोन-1 क्षेत्र के सभी घरों को सीवर की सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य है।
ईंट भट्टे और मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए 2 मीटर तक मिट्टी खुदाई को खनन नहीं माना जाएगा
प्रदेश में ईंट एवं मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए 2 मीटर तक मिट्टी की खुदाई को खनन नहीं माना जाएगा। खनन पट्टे का तीन महीने में रजिस्ट्रेशन नहीं कराने के कारण पट्टा समाप्त नहीं होगा। योगी कैबिनेट की मंगलवार को आयोजित बैठक में उत्तर प्रदेश उप खनिज (परिवहन) ( प्रथम संशोधन) नियमावली 2023 का प्रस्ताव पारित किया है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अनुज्ञाधारक की मृत्यु की स्थिति में अनुज्ञा पत्र को उसके उत्तराधिकारी के पक्ष में हस्तांतरित माना जाएगा। उन्होंने बताया कि पट्टाधारकों को भुगतान में भी रियायत दी गई है। उन्होंने बताया कि इससे मिट्टी के बर्तन बनाने वालों और ईंट भट्टा संचालकों को राहत मिलेगी। खनन प्रक्रिया चलने से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
शाहजहांपुर में बनेगा निजी विश्वविद्यालय
शाहजहांपुर में निजी क्षेत्र का वरुण अर्जुन विश्वविद्यालय बनेगा। इस प्रस्ताव को मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी गई। उच्च शिक्षा विभाग के तरह खुलने वाले इस निजी विश्वविद्यालय से क्षेत्र के छात्रों को अपने ही जिले में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा।
पीसीएफ को लोन के लिए सरकारी गारंटी
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (पीसीएफ) और उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पीसीयू) को धान धरीद के लिए बैंक से लोन लेने के लिए सरकारी गारंटी के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। पीसीएफ को 4000 करोड़ रुपये और पीसीयू 1000 करोड़ रुपये के लोन के लिए बैंक गारंटी मिलेगी। पीसीएफ अपनी राशि में से ही उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड (यूपीएसएस) को आवश्यक खरीद राशि उपलब्ध कराएगा।
गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की जांच के लिए बनेगी कमेटी
प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की जांच के लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर भी दुर्घटना में विधिक कार्यवाही की जाएगी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सड़क दुर्घटना जांच योजना 2023 का प्रस्ताव मंजूर किया है।
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने कैबिनेट निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण के लिए कोई मानीकृत प्रक्रिया नहीं हैँ। इससे दुर्घटना के पीछे मानवीय भूल, सड़क इंजीनियरिंग, वाहन फिटनेस सहित अन्य कारणों का आकलन नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की जांच एक समिति से कराई जाएगी। इससे सड़क दुर्घटना के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकेगा। समिति में परिवहन, गृह, लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के साथ स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। समिति जांच में विशेषज्ञों की मदद भी ले सकेगी। इससे गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का फोरेंसिक विश्लेषण भी किया जा सकेगा। इससे चालक की दक्षता, सड़क इंजीनियरिंग, वाहन फिटनेस और पर्यावरणीय कारणों का पता चल सकेगा।
परिवहन आयुक्त सीबी सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटना जांच योजना के तहत गठित कमेटी उन्हीं दुर्घटना की जांच करेगी जिनमें तीन से अधिक लोगों की मृत्यु होगी। तीन या तीन से कम लोगों की मृत्यु होने पर जांच की वर्तमान व्यवस्था लागू रहेगी। वर्तमान में पुलिस के स्तर से ही जांच की जाती है।
मुआवजा मिलने पर आसानी होगी
सीबी सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर होने पर पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त मृतक यात्री या वाहन चालक को निजी बीमा, वाहन इंश्योरेंस से भी सहायता राशि मिलती है। जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद मुआवजा मिलने में आसानी होगी।
1.89 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को मिलेगा गरम भोजन
प्रदेश के 1.89 लाख 014 आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पंजीकृत 1.27 करोड़ से अधिक 3 से 6 साल तक की उम्र वाले बच्चों को सरकार फिर से गरम भोजन खिलाएगी। प्रदेश में सात साल से बंद पड़ी 'गरम भोजन योजना' (हॉटकुक्ड मील स्कीम) को शुरू करने के प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। योजना के प्रारूप में आंशिक बदलाव करते हुए अब इस योजना का क्रियान्वयन प्राथमिक विद्यालयों में चल रहे मध्यान्ह भोजन योजना (मिड डे मील) की तर्ज पर किया जाएगा।
बता दें कि अखिलेश सरकार ने इस योजना को 2016 में बंद कर दिया था । अब प्रदेश सरकार इस योजना को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित होने वाली इस योजना के तहत साल में कम से कम 300 दिन लाभार्थियों को गरम भोजन खिलाया जाएगा। । एक दिन में एक बच्चे को प्रतिदिन कम से कम 300 कैलोरी व 7 से 8 ग्राम प्रोटीन देना अनिवार्य होगा।
योजना के तहत प्राथमिक विद्यालयों स्थित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आने वाले 3 से 6 साल की उम्र वाले बच्चों को भी गरम भोजन खिलाया जाएगा। योजना पर होने वाले खर्च की धनराशि का 50-50 प्रतिशत राशि केन्द्र और राज्य सरकरा मिलकर वहन करेंगे।
टास्क फोर्स करेगी निगरानी
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य व जिला स्तर पर टास्क फोर्स का भी गठन किया जाएगा । यह टास्क फोर्स योजना के तहत बच्चों को खिलाया जाने वाले गर्म भोजन की गुणवत्ता, मेन्यू और मात्रा आदि पर नजर रखेगी । साथ ही योजना के लाभार्थी बच्चों के पोषण में हो रहे सुधार की प्रगति की रिपोर्ट भी तैयार कराएगी।