यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : कोषागारों में धूल खा रहे 6000 करोड़ के स्टाम्प से ही होगी रजिस्ट्री
प्रदेश में रक्षा एवं एयरोस्पेस के क्षेत्र में निवेश करने वालों को भूमि के पट्टे की रजिस्ट्री पर भी स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों की राशन दुकानों को इलेक्ट्रानिक तराजू और ई पॉस मशीनों से लैस करने के लिए नए टेंडर पड़ेंगे।
विस्तार
ई-स्टाम्प लागू होने के बाद कोषागारों में धूल खा रहे 6000 करोड़ रुपये के छपे स्टाम्प निस्तारित करने के लिए कैबिनेट ने अहम निर्णय लिया है। चुने गए प्राधिकरणों में उपलब्धता रहने तक रजिस्ट्री आदि कार्यों के लिए छपे स्टाम्प अनिवार्य कर दिया गया है। यहां छपे स्टाम्प के खत्म होने के बाद ही ई-स्टाम्प का प्रयोग किया जा सकेगा।
वर्ष 2013 में ई-स्टाम्प प्रणाली लागू हुई थी। इसके बाद छपे स्टाम्प की खपत रुक गई थी। इस वजह से प्रदेश के कोषागारों और उप कोषागारों में करीब 6000 करोड़ रुपये के स्टाम्प भरे हैं। इनमें 5000 रुपये या इससे ऊपर के मूल्य के स्टाम्प लगभग 5779 करोड़ रुपये के हैं। स्टाम्प व रजिस्ट्रेशन विभाग पिछले चार साल से पांच हजार रुपये मूल्य वर्ग से अधिक के स्टाम्प का इस्तेमाल नहीं कर रहा था।
कोषागारों में ये स्टाम्प पेपर धूल खा रहे थे। लंबे समय से रखे रहने की वजह से खराब होने का खतरा पैदा हो गया था। साथ ही इनके रखरखाव और सुरक्षा में भारी धनराशि खर्च हो रही थी। इसे देखते हुए छपे स्टाम्प की खपत को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। अब जिन शहरों में विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद या अन्य सरकारी विभागों के कार्यालय हैं और जिन जनपदों में स्टाम्प की खपत अधिक है, वहां अन्य जिलों के कोषागारों के छपे स्टाम्प काे ट्रांसफर किया जा सकेगा।
इन औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में पेपर स्टाम्प अनिवार्य
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा), गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा), भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा)
इन विकास प्राधिकरणों में छपे स्टाम्प अनिवार्य
गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, हापुड़-पिलखुआ, बरेली, मेरठ, वाराणसी, मुरादाबाद, मथुरा, सहारनपुर, आगरा, प्रयागराज, अयोध्या, उन्नाव, गोरखपुर, अलीगढ़, रायबरेली, रामपुर, बस्ती, आजमगढ़, मथुरा-वृंदावन, खुर्जा, झांसी, मीरजापुर-विन्ध्याचल।
भूमि के पट्टे की रजिस्ट्री पर भी मिलेगी स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट
प्रदेश में रक्षा एवं एयरोस्पेस के क्षेत्र में निवेश करने वालों को भूमि के पट्टे की रजिस्ट्री पर भी स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश रक्षा एवं एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2018 और एयरोस्पेस इकाई एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2019 में संशोधन का प्रस्ताव मंजूर किया गया।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वर्तमान में एयरोस्पेस एवं रक्षा क्षेत्र में निवेश करने वाले निवेशकों या संस्थाओं को भूमि की खरीद पर स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाती है। अब भूमि खरीदने के साथ साथ पट्टा विलेख कराने पर भी स्टांप ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट दी जाएगी। उन्होंने बताया कि यह छूट भूतलक्षी (नीति लागू होने की तिथि से) प्रभाव से लागू होगी।
गोड़धोईया नाला व रामगढ़ ताल के जीर्णोद्धार का रास्ता साफ
गोरखपुर में गोड़धोईया नाला और रामगढ़ ताल के जीणोंद्धार का रास्ता साफ हो गया है । इसके लिए सरकार द्वारा तैयार कराई गई कार्ययोजना पर आने वाले 989 करोड़ के व्ययभार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। साथ ही पहली किश्त के तौर 75 प्रतिशत धनराशि डीएम को उपलब्ध कराने का भी फैसला किया गया है।
दरअसल शहर के सबसे बड़े गोड़धोईया नाले (13 किमी लंबे) के जरिए शहर का गंदा पानी रामगढ़ ताल में जा रहा है । जिससे ताल में प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर सरकार ने नाला और रामगढ़ ताल का जीर्णोद्धार कराने के लिए कार्ययोजना तैयार कराया था । इसके लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-204 के बजट में 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था । लेकिन धनराशि जारी नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पा रहा था।
गोरखपुर के डीएम ने बजट उपलब्ध कराने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था । इसी कड़ी में आवास विभाग ने नाला व रामगढ़ ताल के जीर्णोंद्धार पर आने वाले व्ययभार के प्रस्ताव को कैबिनेट में रखा था, जिसे मंजूरी दे दी गई है । यह धनराशि नाला डायवजर्न के लिए भूमि अधिग्रहण के अलावा इंटरसेप्टर और एसटीपी स्थापित करने पर खर्च किया जाएगा।
राशन दुकानों में ई पॉस मशीन और ई तराजू पड़ेंगे नए टेंडर
प्रदेश के शहरी और ग्रामीण इलाकों की राशन दुकानों को इलेक्ट्रानिक तराजू और ई पॉस मशीनों से लैस करने के लिए नए टेंडर पड़ेंगे। टेंडर प्रस्ताव के लिए यूपी डेस्को को कार्यदायी संस्था के रूप में नामित किया गया है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
प्रदेश की प्रत्येक राशन दुकान में पांच साल के लिए ई पॉस मशीनों की स्थापना की गई थी। इसे सिस्टम इंटीग्रेटर पर आधारित बीओओ मॉडल (बिल्ड, ओन, आपरेट) पर लगाया गया था। मई में पांच साल का अनुबंध समाप्त हो गया था। अब इलेक्ट्रानिक तराजू और ई पॉस मशीनों की स्थापना और संचालन के लिए नए सिरे से ई टेंडर की कार्यवाही होगी।
टेंडर हासिल करने वाली संस्था को ई तराजू और ई पॉस मशीनें लगाने और संचालन का जिम्मा दिया जाएगा। टेंडर से संबंधित सभी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए यूपी डेस्को को नामित किया गया है। यूपी डेस्को द्वारा तैयार प्रस्ताव के आधार पर प्री-बिड में प्राप्त सुझावों को खाद्यायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति अनुमोदित करेगी। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा और ई टेंडर लिए जाएंगे।
जोखिम शुरू होने से एक दिन पहले तक कराया जा सकेगा फसल बीमा
मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखकर यदि किसान को लगा कि अब फसल को खतरा है तो जोखिम शुरू होने से एक दिन पहले भी पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत वह अपनी फसल का बीमा करा सकेगा। इसकी अंतिम तारीख की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। इससे किसानों को बड़ा लाभ होगा। मंगलवार को कैबिनेट ने खरीफ 2023 से रबी 2025-2026 तक प्रधानमंत्री फसल बीमा तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को हरी झंडी दे दी।
प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों से फसल के नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को इन दोनों ही योजनाओं में बीमा कवर दिया जाता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्रदेश भर में जबकि औद्यानिक फसलों से जुड़ी पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को 51 जिलों में लिए लागू किया गया है। कैबिनेट ने इस योजना को आगे जारी रखने को मंजूरी दे दी। इसके लिए रबी की फसल में किसानों की ओर से बीमा के लिए दिया जाने वाला प्रीमियम 1.5 प्रतिशत तथा आवेदन करने की तारीख 31 दिसंबर, खरीफ की फसल के लिए प्रीमियम 2 प्रतिशत तथा आवेदन करने की तारीख 31 जुलाई ही रखा गया है। उधर पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में यह प्रीमियम 5 प्रतिशत रखा गया है। जबकि आवेदन करने की तारीख की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि अब जोखिम शुरू होने के एक दिन पहले तक इस योजना में बीमा कराया जा सकता है।
खरीफ की बीमित फसल - धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, उर्द, मूंग, अरहर, मूंगफली, तिल एवं सोयाबीन (10 फसलें)
रबी की बीमित फसल - गेहूं, जौ, चना, मटर, मसूरी, सरसों या लाही, अलसी, आलू (8 फसलें)
उद्यान की फसलें जिन्हें पुनर्गठन मौसम आधारित योजना में रखा गया है। (7 फसलें) - केला, मिर्च, पान, टमाटर, शिमला मिर्च, हरी मटर, आम
इन जिलों में यह है योजना
खरीफ
केला - (19 जिले) बहराइच, बाराबंकी, फतेहपुर, गोरखपुर, कुशीनगर, लखनऊ, कौशांबी, प्रयागराज, महाराजगंज, देवरिया, अयोध्या, लखीमपुर खीरी, गोंडा, सीतापुर, शाहजहांपुर, कानपुर, बलरामपुर, बलिया व गाजीपुर।
मिर्च - (19 जिले) बाराबंकी, फतेहपुर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, उन्नाव, कौशांबी, वाराणसी, बदायूं, कानपुर नगर, बरेली, शाहजहांपुर, मिर्जापुर, लखीमपुर खीरी, कन्नौज, रायबरेली, आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, बलरामपुर।
पान - (07 जिले) उन्नाव, रायबरेली, बाराबंकी, महोबा, ललितपुर, हरदोई व लखनऊ।
रबी
टमाटर - (23 जिले) आगरा, बाराबंकी, एटा, अयोध्या, कानपुर नगर, मैनपुरी, उन्नाव, सीतापुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, अंबेडकरनगर, सोनभद्र, बलिया, फिरोजाबाद, शाहजहांपुर, हमीरपुर, कन्नौज, बलरामपुर, सहारनपुर, शामली, बुलंदशहर व हापुड़।
शिमला मिर्च -(05 जिले) फिरोजाबाद, मुरादाबाद, बदायूं, बरेली व शाहजहांपुर।
हरी मटर - (18 जिले) बाराबंकी, बस्ती, गोंडा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, सुल्तानपुर, एटा, प्रयागराज, वाराणसी, देवरिया, बहराइच, फतेहपुर, गाजीपुर, बलिया, कासगंज, कानपुर नगर, कन्नौज।
आम - (14 जिले) सहारनपुर, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, अमरोहा, प्रतापगढ़, वाराणसी, लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, अयोध्या, बाराबंकी, बलरामपुर।