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यूपी: प्रदेश में महंगी होगी माल ढुलाई से लेकर टैक्सी-बसों की यात्रा, बढ़ा वाहनों का परमिट शुल्क

Wed, 11 Jul 2018 08:53 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 11 Jul 2018 08:53 AM IST
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UP cabinet decision- permit fee  increases of commercial vehicles, travelling affected

प्रदेश में माल ढुलाई के अलावा टैक्सी व बसों से यात्रा करना महंगा होगा। प्रदेश सरकार ने कामर्शियल वाहनों की श्रेणी ट्रक व मिनी ट्रकों के अलावा बसों (सरकार व गैरसरकारी) और टैक्सी के परमिट शुल्क में औसत 27.34 प्रतिशत तक की वृद्धि करने का फैसला किया है। इससे संबंधित परिवहन विभाग के उप्र मोटरयान नियमावली-1998 में संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

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यह वृद्धि पांच साल केलिए की गई है। इसके अलावा परमिट के रिप्लेसमेंट और टैक्सी संचालन के लाइसेंस दर में भी वृद्धि की गई है। सरकार को उम्मीद है कि परमिट शुल्क में की गई इस बढ़ोत्तरी सरकारी खजाने में 35 करोड़ रुपये राजस्व की बढोत्तरी होगी। कैबिनेट में लिए गए फैसले की जानकारी देते हुए सरकार केप्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इससे पहले 2010 में परमिट शुल्क में वृद्धि की गई थी। जबकि परिहवन निगम की बसों (मंजिली वाहन) के किराये में 6 बार व नगरीय बसों के किराये में 2 बार वृद्धि हो चुकी है। इसी तरह सीएनजी, पेट्रोल व डीजल से चलने वाले ऑटो रिक्शा, टेंपो, टैक्सी केकिराये में भी कई बार वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार से देखा जाए तो 2010 से अब तक विभिन्न श्रेणी के वाहनों के किराये में औसतन 33.47 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
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शर्मा ने बताया कि बिहार व मध्य प्रदेश में लागू परमिट शुल्क की दरों को ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार ने भी 2010 के बाद पहली बार परिमिट शुल्क में औसतन 27.34 प्रतिशत की वृद्धि करने का फैसला किया है। इस बढो़त्तरी से अस्थाई परमिट शुल्क को मुक्त रखा गया है।

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इस श्रेणी के वाहनों के परमिट शुल्क में हुई वृद्धि

- बसें (मंजिली) व माल वाहक वाहनों के लिए परमिट शुल्क में 25-25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
- बड़ी टैक्सी (8 से 12 सीट वाले वाहन) को संभाग के भीतर चलने के लिए जारी परमिट शुल्क में 50 प्रतिशत व पूरे प्रदेश के लिए जारी होने वाले परमिट शुल्क में 33.33 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है।
- मोटर टैक्सी (6 सीटर क्षमता वाली टैक्सी) को एक संभाग में चलने के लिए जारी होने वाले परमिट के शुल्क मे 100 प्रतिशत तक और प्रदेश व इससे सटे तीन अन्य प्रदेशों के लिए
जारी परमिट के शुल्क मे 50-50 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। जबकि पूरे देश केलिए जारी होने वाले परिमिट शुल्क में 56.25 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
- कंडम वाहनों के स्थान पर खरीदे जान वाले नये वाहनों के लिए पुराने परमिट का रिप्लेसमेंट करने पर लगने वाले शुल्क में भी 23.08 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।
-टैक्सी संचालन के लिए जारी होने वाले लाइंसेस शुल्क में भी 33.33 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

स्कूली वाहनों के किराये में हो सकती है वृद्धि
परमिट शुल्क में वृद्धि से ट्रक व मिनी ट्रकों से माल ढुलाई के किराये में वृद्धि होने की संभावना है। इसी तरह बड़े व छोटे टैक्सी वाहनों के परमिट शुल्क में वृिद्ध का असर आम जनता पर पड़ने की बात कही जा रही है। चूंकि स्कूली वाहन के रूप में अधिकांश टैक्सी ही चल रही हैं, इसलिए सरकार के इस फैसले का असर स्कूली बच्चों के वाहन किराये पर भी पड़ सकता है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि परमिट में जो वृद्धि की गई है वह पांच साल के लिए की गई है, इसलिए वाहनों के किराये पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
अर्थात मामूली असर पड़ेगा।

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