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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Breastfeeding week started across the state, will last till November 21, make sure to breastfeed in the first hour, make the child Ayushman

यूपी : प्रदेश भर में शुरू हुआ स्तनपान सप्ताह 21 नवंबर तक चलेगा,  पहले घंटे जरूर कराओ स्तनपान, बच्चे को बनाओ आयुष्मान

Wed, 17 Nov 2021 12:19 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 17 Nov 2021 12:19 AM IST
सार

स्तनपान के प्रति जागरूक करने के लिए सोमवार से गांव- गांव स्तनपान सप्ताह शुरू किया गया है। इसके जरिए जिला मुख्यालय से लेकर गांव स्तर पर शिशु सुरक्षा, गुणवत्ता, देखभाल, हर नवजात शिशु का जन्मसिद्ध अधिकार जैसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

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विस्तार

प्रदेशभर में सोमवार से शुरू हुआ स्तनपान सप्ताह 21 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान प्रसूताओं को स्तनपान कराने के तरीके और उसके फायदे समझाए जाएंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसव के बाद एक घंटे के अंदर बच्चे को कराया गया स्तनपान कई गंभीर बीमारियों से बचाता है।

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स्तनपान के प्रति जागरूक करने के लिए सोमवार से गांव- गांव स्तनपान सप्ताह शुरू किया गया है। इसके जरिए जिला मुख्यालय से लेकर गांव स्तर पर शिशु सुरक्षा, गुणवत्ता, देखभाल, हर नवजात शिशु का जन्मसिद्ध अधिकार जैसे कार्यक्रम चलाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक (बाल स्वास्थ्य) डॉ वेद प्रकाश ने बताया कि अस्पतालों में प्रसव कराने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए अस्पताल में रोकना अनिवार्य कर दिया गया है।
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प्रसव के बाद नवजात को तुरंत नहीं नहलाना चाहिए। उसके शरीर पोंछकर नर्म साफ़  कपड़े पहनानाया जाना चाहिए। इसी तरह  जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना जरूरी होता है। स्तनपान छह माह तक जरूर कराना चाहिए। बच्चे का वजन कम है तो उसे कंगारू मदर केयर जैसी विधि अपनाए जाने की जरूरत होती है।कुपोषण और संक्रमण से बचने के लिए छह माह तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। बच्चे को शहद, घुट्टी, पानी आदि नहीं पिलाना चाहिए।
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फैक्ट फाइल
उत्तर प्रदेश की शिशु मृत्यु दर 41 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह सूचकांक 30 प्रति 1000 जीवित जन्म है । इनमें से तीन चौथाई शिशुओं की मृत्यु पहले महीने में हो जाती है । जन्म के एक घंटे के अन्दर स्तनपान और छह माह तक केवल माँ का दूध दिए जाने से शिशु मृत्यु दर में 20 से 22 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है ।


उपचार पाने वाले बच्चों का तैयार होगा डाटा
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके)के तहत मोबाइल हेल्थ टीम को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में चिन्हित किए जाने वाले बच्चे और उसे उपचार के लिए रेफर करने के मामले का विस्तृत ब्यौरा तैयार करना होगा। जिन बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, वे कितने दिन में ठीक हुए। फालोअप के बाद किसी तरह की समस्या आई या नहीं, इसकी भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक ने आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि मोबाइल हेल्थ टीम निरीक्षण के दौरान किसी बच्चे को उपचार की जरूरत पड़ती है कि आरबीएसके वाहन से एक सदस्य अस्पताल ले जाएगा। हर तीसरे माह जिला स्तर पर समीक्षा की जाएगी। इसी तरह सीएचसी और ब्लाक स्तर पर आरबीएसके टीम के बैठने के लिए भी कक्ष निर्धारित किया जाएगा।

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