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यूपी बोर्डः परीक्षा कार्यक्रम घोषित, शिक्षकों के सामने कोर्स पूरा कराने की चुनौती

Tue, 31 Oct 2017 02:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 31 Oct 2017 02:16 PM IST
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up board examination course is not complete
डेमो - फोटो : डेमो
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं 6 फरवरी से शुरू होंगी। बोर्ड के इतिहास में पहली बार है जब इतनी जल्दी परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। वहीं इस बार बोर्ड परीक्षा से पहले माध्यमिक स्कूलों को कक्षाएं संचालित करने के लिए महज सात महीने ही मिल रहे हैं, उसमें भी अवकाश और गृह परीक्षाओं को संचालित करना है।
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ऐसे में पढ़ाई के लिए महज 96 दिन ही मिल पा रहे हैं। बोर्ड परीक्षा की तिथि की घोषणा होने के बाद जहां शिक्षकों के माथे पर कोर्स पूरा करने के लिए चिंता की लकीरें हैं, वहीं छात्रों के ऊपर भी पढ़ाई का दबाव बढ़ गया है। इस साल विधानसभा चुनाव के चलते यूपी बोर्ड का सत्र एक जुलाई से प्रारंभ हुआ।
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जबकि हमेशा से सत्र एक अप्रैल से प्रारंभ होता था। वहीं शासन ने सीबीएसई के मुकाबले बोर्ड को खड़ा करने के लिए 6 फरवरी से बोर्ड परीक्षा कराने की घोषणा कर दी है। ऐसे में यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक विद्यालयों के पास इस सत्र में कक्षाएं संचालित करने के साथ सभी परीक्षाओं को निपटाने के लिए केवल 210 दिन का ही समय है। यही नहीं इन्हीं महीनों में सभी गजेटेड अवकाश भी हैं।
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सभी तरह के त्योहार और रविवार मिलाकर 84 दिन विद्यालय बंद रहते हैं। ऐसे में 210 दिन में से विद्यालयों के पास पढ़ाई के लिए महज 126 दिन ही बचते हैं। उनमें भी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं और प्री बोर्ड की परीक्षाएं भी करानी होती हैं। माध्यमिक विद्यालयों में अर्द्धवार्षिकपरीक्षाएं नवंबर और प्री बोर्ड की परीक्षाएं जनवरी में आयोजित होनी हैं।

शिक्षकों पर कोर्स पूरा कराने का दबाव

up board examination course is not complete
डेमो - फोटो : demo pic

दोनों ही परीक्षाओं को संचालित करने में 15-15 दिन का समय लगता है। ऐसी स्थिति में विद्यालयों के पास इस सत्र में कक्षाएं संचालित करने के लिए महज 96 दिन ही मिल रहे हैं। इन 96 दिनों में हाईस्कूल और इंटर के छात्रों का पूरा कोर्स कवर करना है और रीविजन भी करवाना है। जबकि शासन ने माध्यमिक विद्यालयों के लिए 200 दिन की पढ़ाई और 20 दिन रीविजन के लिए निर्धारित किया है।

इस बार विद्यालय इस शैक्षिक कैलेंडर को पूरा नहीं कर रहे हैं। उन्हें कोर्स पूरा करने के लिए निर्धारित दिनों से काफी कम समय मिल रहा है। इससे शिक्षकों पर कोर्स पूरा करने के लिए अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। जबकि छात्रों को बोर्ड परीक्षा से पहले कोर्स को अच्छी तरह रिवाइज करने की चिंता सताने लगी है।

स्कूल फरवरी से पहले कोर्स पूरा कराने के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस का सहारा ले रहे हैं। राजकीय विद्यालयों में उन्नति कार्यक्रम, रेमीडियल क्लासेस के जरिए कोर्स पूरा कराया जा रहा है। जहां पर विषयों में कमजोर छात्र पढ़ रहे हैं। यही नहीं यहां पर एक्स्ट्रा क्लासेस भी संचालित की जा रही हैं।

चलाई जा रही हैं एकस्ट्रा क्लासेस

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डेमो
​राजकीय कन्या इंटर कॉलेज सिंगार नगर और राजकीय इंटर कॉलेज शाहमीना रोड में छात्राओं के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस संचालित की जा रही हैं। यहां के प्रधानाचार्यों ने बताया कि परीक्षा के समय में भी ये कक्षाएं संचालित रहेंगी ताकि कोर्स पूरा कराकर रीविजन कराया जा सके। राजकीय कॉलेजों में तो कई कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं, लेकिन कई सहायता प्राप्त विद्यालय कोर्स पूरा करने के नाम पर महज कोरम पूरा कर रहे हैं। छात्र कोचिंग और ट्यूशन का सहारा लेकर कोर्स पूरा करने में जुटे हैं।

अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं 10 नवंबर से शुरू होंगी। जनवरी में प्री बोर्ड भी होगा। उससे पहले एक्स्ट्रा क्लासेस और रेमेडियल क्लासेस के माध्यम से कोर्स पूरा कराया जा रहा है। बोर्ड परीक्षा से पहले रीविजन भी करा दिया जाएगा।  - क्षमता रावत, प्रधानाचार्या, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सिंगार नगर

हमारे यहां पर 3 नवंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। उन्नति और एक्स्ट्रा क्लास संचालित कर कोर्स पूरा किया जा रहा है। अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं के दौरान भी एक्स्ट्रा क्लास संचालित करने का निर्णय लिया गया है। - शांति यादव, प्रधानाचार्या, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज शाहमीना रोड

इस बार जितने भी बदलाव किए जा रहे हैं वह अगले सत्र से लागू होने चाहिए थे। ताकि शिक्षकों के साथ छात्र भी तैयार रहें। बार-बार बदलाव करने से विद्यालय असमंजस की स्थिति में हैं। इससे छात्रों का नुकसान हो रहा है। - डॉ. आरपी मिश्र, प्रदेशीय मंत्री, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
 
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