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यूपी : भाजपा ने 2022 के लिए हासिल की बढ़त, विपक्ष की चुनौती बढ़ी, सीएम योगी ने पूरी ताकत झोंकी

Sat, 03 Jul 2021 11:21 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 03 Jul 2021 11:21 PM IST
सार

योगी ने एक ओर जहां मंडलों का दौरा कर कोरोना संक्रमण का प्रबंधन किया वहीं  संगठन के साथ मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की कमान संभाली।

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UP: BJP achieved the lead for 2022, the challenge of the opposition increased, CM Yogi gave full force

विस्तार

जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में रिकॉर्ड जीत के साथ भाजपा ने न सिर्फ विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल की है, साथी ही विपक्ष को दबाव में भी ला दिया है। हालांकि यह जनता सीधे जनता से नहीं हुआ है, लेकिन इसके  नतीजों ने भाजपा को 2022 की चुनाव रणनीति तैयार करने में मदद जरूर देंगे। पूरब से पश्चिम तक के चुनाव नतीजों ने साफ किया है कि जनता का मन और मन भाजपा के साथ है वही विश्वास पूरी तरह योगी आदित्यनाथ के साथ है। चुनाव नतीजों ने विधानसभा चुनाव के मैदान में कूदने जा रही भाजपा में नई ऊर्जा का संचार किया है वहीं सपा को ऑक्सीजन और बसपा को वेंटिलेटर पर ला दिया है।
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वैसे तो जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से होता है। लेकिन इन नतीजों को जनता का सीधा मत नहीं मान जाता है। लेकिन व्यवहारिक रूप से देखा जाए तो इनमें भी जिला पंचायत सदस्य एक तरह से अपने क्षेत्र की जनता के मत मस्तिष्क के हिसाब से अपना मत तय करते हैं। यह चुनाव परिणाम मुख्यमंत्री योगी के लिए इसलिए भी बड़ी उपलब्धि है कि क्योंकि बीते दिनों में कोरोना की चुनौतियों व अन्य तमाम घटनाओं के चलते जिस तरह से सरकार लगातार विपक्ष के लगातार निशाने पर थी। मुख्य विपक्षी दल सपा ही नहीं बल्कि यूपी में राजनीतिक जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी व अन्य छोटे दलों ने भी जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजों को विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा को मिलन वाली चुनौती से जोड़ रहे थे। विपक्षी दलों ने यह दावा भी किया था कि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के नतीजे सरकार व संगठन विफलता और जनता के बीच नाराजगी का सबूत होंगे। लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष के नतीजों ने विपक्ष के दांवों की जमीन उठा दी है। चुनाव तनीजे ने स्पष्ट कर दिया कि विपक्ष को मुकाबला करने के लिए ना सिर्फ राजनीतिक तैयारी की जरुरत है बल्कि जनता के बीच संपर्क और संवाद बनाने की भी आवश्यकता है। विपक्ष को ठोस रणनीति और कार्यक्रमों के साथ जनता के बीच जाना होगा।
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दो मई को जिला पंचायत सदस्य चुनाव के अपेक्षित परिणाम नहीं आने से विपक्षी दलों ने प्रदेश सरकार से लेकर संगठन तक को आरोपों के कटघरे में खड़ा कर सत्ता विरोधी माहौल बनाना शुरू कर दिया। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच आए जिला पंचायत सदस्य के परिणाम से बिगड़े माहौल को सुधारने की कमान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संभाली। योगी ने एक ओर जहां मंडलों का दौरा कर कोरोना संक्रमण का प्रबंधन किया वहीं  संगठन के साथ मिलकर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की कमान संभाली।
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संगठन की दो साल से तैयारी रंग लाई

भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीतने के लिए दो साल पहले से तैयारी शुरू कर दी थी। जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए दो साल पहले ही क्षेत्रीय और जिला प्रभारी तैनात कर दिए गए थे। उसके लिए बूथ समितियों को प्रशिक्षण भी दिया गया। पार्टी ने चुनाव में भाई-भतीजवाद और परिवारवाद को दूर करने के लिए किसी भी मंत्री, विधायक या पार्टी पदाधिकारी के परिवारजन को टिकट नहीं देने के निर्णय को सख्ती से लागू किया। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भले ही पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन भाजपा 680 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। उसके बाद भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष में 65 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखकर चुनावी रणनीति बनाई। जिला पंचायत सदस्य चुनाव कम जीतने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए भाजपा के टिकट की दौड़ लगी। एक-एक जिले के लिए स्थानीय जातीय समीकरण के हिसाब से तय की गई भाजपा का रणनीति सफल रही।

पुराने नतीजों का अनुभव अच्छा नहीं
राजनीतिक पंड़ितों का मानना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की जीत से सरकार और संगठन के रणनीतकार उत्साहित हो सकते हैं। लेकिन उन्हें विधानसभा चुनाव की तैयारी में 2010 और 2015 जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के नतीजों सबक लेकर ही आगे बढ़ना होगा। 2010 के पंचायत चुनाव में बसपा को रिकार्ड जीत मिली थी, लेकिन 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा का सफाया हो गया था। वहीं 2015 के पंचायत चुनाव में सपा ने 63 जिलों में कब्जा जमाया था। लेकिन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा 47 सीट पर सिमट गई थी।


राठौर का कद बढ़ा
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में मिली जीत से भाजपा के प्रदेश महामंत्री जेपीएस राठौर का भी कद बढ़ा है। जिला पंचायत सदस्य चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा ने राठौर को जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया था। राठौर पश्चिम क्षेत्र के प्रभारी भी हैं, पश्चिम में भाजपा को 14 में से 13 जिलों में जीत मिली है। खुद प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने राठौर की पीठ थपथपाई। इससे पहले राठौर 2017 विधानसभा, 2019 लोकसभा चुनाव सहित सभी चुनावों में चुनाव प्रबंधन के प्रभारी रहे हैं।

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