आतंकवाद का रुख करने वाले युवकों की घर वापसी कराएगी यूपी एटीएस
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आतंकी संगठनों से प्रभावित होकर गुमराह हो रहे युवकों को सही रास्ते पर लाने के लिए आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने घर वापसी (डी-रेडिक्लाइजेशन) की मुहिम शुरू की है। पुलिस महानिरीक्षक एटीएस असीम अरुण ने इसके लिए पूरा प्लान तैयार किया है।
इसके तहत गुमराह हो रहे युवकों को बिना किसी शोर-शराबे के मुख्य धारा में वापस लाने और उनके परिवारीजनों को इससे आगाह करने का काम शुरू कर दिया है।
जो युवक गुमराह होकर आतंक के रास्ते पर जाने की सोच रहे हैं या उनकी गतिविधियां संदिग्ध होने की शिकायत मिलती है तो उन्हें उनके परिवार, मित्र, धर्मगुरुओं के साथ मिलकर पुलिस उनकी काउंसलिंग कराती है। साथ ही उनकी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और रोजगार दिलाने में सरकार मदद करती है।
असीम अरुण ने बताया कि पिछले दिनों एटीएस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया था और छह को पूछताछ के लिए उठाया था। पूछताछ में आतंकी साजिश में उन छह युवकों की भूमिका न के बराबर थी, इसलिए उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया।
चुनौतियों से निपटने के लिए जारी की मुहिम
उन्होंने बताया कि कुछ और भी नाम सामने आए थे जिनको गिरफ्तार किया गया। वहीं गिरफ्त में लिए गए नाजिम, मुफ्ती, मुजम्मिल आदि ने इन युवकों को भी धार्मिक भावनाओं के आधार पर आतंक की राह पर लाने की कोशिश की थी। ऐसी ही चुनौतियों से निपटने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर एटीएस ने घर वापसी कार्यक्रम चलाने की पहल की है।
परिवार ले सकते हैं एटीएस से मदद
आईजी असीम अरुण का कहना है कि कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें परिवार को लगता है कि उनका कोई सदस्य आतंक की गलत राह पर चल रहा है लेकिन वो समझ नहीं पाते हैं कि क्या करें।
ऐसे में वे बिना डरे नि:संकोच एटीएस कंट्रोल रूम के नंबर 0522-2304586 और 9792103156 पर संपर्क कर सकते हैं। उनकी पूरी मदद की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इसका मकसद ऐसे युवकों को आतंकवाद का रुख करने से रोकना है जो इस दिशा में एक कदम बढ़ा चुके हैं या सोच रहे हैं।
ऐसे कराएंगे घर वापसी
असीम अरुण कहते हैं कि कोई भी परिवार यह मानने को तैयार नहीं होता कि उसका बेटा गलत राह पर जा रहा है। ऐसे परिवारों को संबंधित साक्ष्य दिखाए व सुनाए जाते हैं, ताकि वे अपने बच्चे को सही रास्ते पर लाने के लिए मोटिवेट हो सकें।
इसके बाद एटीएस के अधिकारी संबंधित युवक से बराबर मुलाकात करते रहते हैं और उन्हें सलाह देते रहते हैं। ऐसे युवकों को समझाने केलिए उनके मित्रों और धर्मगुरुओं की भी मदद ली जाती है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
एटीएस के अफसर एक साल तक ऐसे परिवार के लोगों से जुड़े रहते हैं और आगे भी आकस्मिक तौर पर जांच करते रहते हैं। ऐसे युवकों की शादी होने के बाद या फिर रोजगार का प्रबंध होने के बाद घर वापसी की प्रक्रिया को पूरी माना जाता है।