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टिकट बंटवारे के समीकरण से बिगड़ा सपा की जीत का गणित, मिलीं सिर्फ दो सीटें

Fri, 11 Mar 2022 02:58 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Mar 2022 02:58 AM IST
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up assenbly election result2022
लखनऊ। बड़ी उम्मीद के साथ विधानसभा चुनाव 2022 का आगाज करने वाली समाजवादी पार्टी के लिए लखनऊ जनपद का परिणाम ज्यादा सुखद नहीं रहा। वर्ष 2017 के मुकाबले पार्टी ने भले ही एक सीट ज्यादा हासिल की हो, पर वह इससे कहीं अच्छे परिणाम की आस थी। सपा ने शहरी क्षेत्र की लखनऊ मध्य और पश्चिम सीट पर जीत हासिल की, लेकिन मोहनलालगंज जैसी सीट इस बार गंवा दी। इस परिणाम के बाद पार्टी का गुणा-भाग शुरू हो गया है। वहीं, टिकट बंटवारे के समय मचे घमासान की इसमें सबसे बड़ी भूमिका नजर आ रही है।
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सपा ने नामांकन की अंतिम तारीख से एक दिन पहले तक प्रत्याशी घोषित किए। वहीं, मोहनलालगंज और मलिहाबाद सीट पर उम्मीदवारों के नाम घोषित करने के बाद प्रत्याशी बदले गए। अंतिम समय में प्रत्याशी घोषित होने और उनमें बदलाव से रणनीति कमजोर हुई और कुछ दिन तक उठापटक की स्थिति बनी रही। इससे टिकट के बाकी दावेदारों के बीच आपसी सुलह-समझौते की कवायद रस्म अदायगी बनकर रह गई। अब इसका खामियाजा दिख रहा है।
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पहले से तय सीटों पर मिली जीत
लखनऊ मध्य सीट पर रविदास मेहरोत्रा काफी समय से सक्रिय थे और उन्हें टिकट का आश्वासन भी दिया गया था। यही स्थिति पश्चिम सीट से अरमान खान की भी रही। नतीजतन ये दोनों सीटें सपा के खाते में आ गईं। बीकेटी में टिकट के दावेदारों की संख्या बहुत ज्यादा थी। ऐसे में पुराने प्रत्याशी को टिकट देने की रणनीति के तहत काम किया गया, लेकिन इस पर बाकी दावेदारों की नाराजगी ने जीत की राह में रोड़ा अटका दिया। वहीं, कैंट और पूर्व सीट पर जातीय समीकरण के चलते सपा का दावा पहले से ही कमजोर था।
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नए प्रत्याशियों को भारी पड़ी नाराजगी
सपा ने जनपद में अंतिम समय में प्रत्याशियों की घोषणा की। लखनऊ मध्य, पूर्व और बीकेटी छोड़कर बाकी सभी सीटें मलिहाबाद, उत्तर, सरोजनीनगर, मोहनलालगंज, कैंट और पश्चिम के प्रत्याशियों से लिए नई सीटें थीं। मलिहाबाद सीट पर राजबाला, इंदल रावत और सीएल वर्मा जैसे दावेदार टिकट पाने के लिए सक्रिय थे। इनके स्थान पर सपा ने पहले सुशीला सरोज और अंतिम समय में और बाद में उनके स्थान पर सोनू कनौजिया को टिकट दिया। इससे नाराज पूर्व विधायक इंदल रावत ने कांग्रेस का हाथ थामकर सपा को नुकसान पहुंचाने का काम किया। मोहनलालगंज में निवर्तमान विधायक अंबरीश पुष्कर का टिकट काटना भारी पड़ गया। इसके विरोध में अंबरीष ने निर्दलीय तक पर्चा भर दिया, पर समझाने के बाद नाम वापस लेने पर सहमत हो गए। इससे क्षेत्र में गलत संदेश गया और पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। लखनऊ उत्तर से पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा के स्थान पर पूजा शुक्ला को अचानक टिकट दिया गया, जबकि अभिषेक को सरोजनीनगर से उम्मीदवार बनाया गया। इस क्षेत्र में शारदा प्रताप शुक्ला और शंकरी सिंह जैसे दावेदार भी थे। इससे नाराज इन उम्मीदवारों ने भाजपा को समर्थन दे दिया। अंतिम समय में ये बदलाव सपा को रास नहीं आए। नतीजतन दोनों सीटों पर पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा।
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