यूपी: अखिलेश बोले भाजपा सरकार में महिलाएं असुरक्षित, मायावती ने कहा- महापुरुषों के नाम का हो रहा गलत इस्तेमाल
Akhilesh Yadav: सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने अलग-अलग मुद्दों पर प्रदेश सरकार पर हमला किया है। मायावती ने बुद्ध पूर्णिमा के बहाने सरकार पर कटाक्ष किया।
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सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भाजपा सरकार का अपराध को लेकर जीरो टॉलरेंस का दावा जीरो साबित हो चुका है।
अखिलेश यादव ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि इस सरकार में महिलाओं के अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश देश में सबसे ऊपर है। पिछले दिनों मेरठ में चलती कार में गैंगरेप हो गया। इसी तरह इकौना थाना क्षेत्र में तिलक में जा रही बालिका का अपहरण हो गया। उत्तर प्रदेश में दबंगों और अपराधियों के बढ़ते आतंक और खराब होती कानून-व्यवस्था के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है। अखिलेश यादव ने कहा कि रोमियो स्क्वाड जैसे बना था, वैसे ही हवा में उड़ गया।
अखिलेश ने दी बड़े मंगल की बधाई
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ज्येष्ठ मास के प्रथम बड़े मंगल पर सभी को बधाई देते हुए उनके सुख-समृद्धि की कामना की है। अखिलेश ने कहा कि हनुमानजी को अटूट भक्ति और शक्ति के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
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राजनीतिक स्वार्थ के लिए महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल गलत : मायावती
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि महापुरुषों के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थ के लिए करना गलत है। सभी द्वेष व संकीर्णता को त्याग कर गौतम बुद्ध के जीवन आदर्शों पर चलकर देश को फिर से जगद्गुरु बनाने के ईमानदार प्रयास होने चाहिए। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने पाकिस्तान को बुद्ध की शिक्षा और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की नसीहत दी।
बसपा सुप्रीमो ने सोमवार को गौतम बुद्ध के सभी अनुयायियों को बुद्ध पूर्णिमा की बधाई दी। साथ ही अपने बयान में कहा कि बसपा की चार बार रही सरकार के दौरान महात्मा बुद्ध के आदर्शों पर चलकर कानून का राज स्थापित किया गया था। सबको न्याय व सबके साथ न्याय का सांविधानिक धर्म भी निभाया गया। बाद में सपा व भाजपा की सरकार में यूपी में खासकर न्याय व कानून-व्यवस्था का बुरा हाल होने से लोगों का जीवन त्रस्त है। उनकी जयंती जाति-भेद, हिंसक मनोवृति, द्वेष आदि को त्यागने की प्रतिज्ञा को दोहराने का दिन है, क्योंकि इसी में जीवन व देश की सुख-शांति एवं तरक्की निहित है। लेकिन इस जिम्मेदारी को सरकारों द्वारा संकीर्ण स्वार्थ की खातिर भुला दिया गया है, जिससे आमजन त्रस्त और दुखी है।