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यूपी: 48 साल के दबदबे के बाद शर्मा गुट का सियासी अध्याय समाप्त, संगठन के अध्यक्ष ने ही पाला बदला
Wed, 30 Sep 2026 06:42 AM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:42 AM IST
सार
ओपी शर्मा के निधन के बाद सुरेश कुमार त्रिपाठी को संगठन की कमान मिली। बाद में प्रमोद कुमार मिश्रा कार्यकारी अध्यक्ष बने। यह दोनों ही नेता भाजपा से टिकट की लालसा में थे।
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ओपी शर्मा के निधन के बाद कमजोर होता गया संगठन।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रदेश की शिक्षक राजनीति में करीब पांच दशक तक माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट का दबदबा रहा। लेकिन गुट के सर्वेसर्वा ओम प्रकाश शर्मा के निधन के बाद संगठन का आधार तेजी से बिखरा। इससे शिक्षक एमएलसी चुनाव की पुरानी तस्वीर बदल गई है। अब गुट के बचे हुए चेहरों को भी भाजपा ने चुनाव मैदान में उतार दिया है। इससे शर्मा गुट का सियासी अध्याय पूरी तरह से खत्म होता नजर आ रहा है।
एक दौर में शिक्षक व स्नातक क्षेत्र की कई विधान परिषद सीटों पर शर्मा गुट का कब्जा था। ओपी शर्मा खुद मेरठ शिक्षक सीट से 48 साल तक एमएलसी रहे। 1970 में पहली बार विधान परिषद पहुंचने के बाद उन्होंने शिक्षक राजनीति में ऐसा प्रभाव बनाया कि शिक्षक एमएलसी चुनावों में उनका गुट सबसे मजबूत धुरी रहा।
विधान परिषद चुनाव 2020 में भाजपा ने पहली बार बड़े पैमाने पर शिक्षक सीटों पर दांव लगाकर गुट के वर्चस्व को चुनौती दी थी। इसी चुनाव में ओम प्रकाश शर्मा को मेरठ सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा से हार मिली। इसके बाद शर्मा गुट का राजनीतिक विस्तार लगातार कमजोर होता गया।
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भाजपा की ओर बढ़ा झुकाव
ओपी शर्मा के निधन के बाद सुरेश कुमार त्रिपाठी को संगठन की कमान मिली। बाद में प्रमोद कुमार मिश्रा कार्यकारी अध्यक्ष बने। इस बीच गुट के नेताओं का भाजपा की ओर झुकाव बढ़ा। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से शर्मा गुट के एमएलसी रहे ध्रुव कुमार त्रिपाठी भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे थे। अब भाजपा ने उन्हें इसी सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। वाराणसी सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।
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एक दौर में शिक्षक व स्नातक क्षेत्र की कई विधान परिषद सीटों पर शर्मा गुट का कब्जा था। ओपी शर्मा खुद मेरठ शिक्षक सीट से 48 साल तक एमएलसी रहे। 1970 में पहली बार विधान परिषद पहुंचने के बाद उन्होंने शिक्षक राजनीति में ऐसा प्रभाव बनाया कि शिक्षक एमएलसी चुनावों में उनका गुट सबसे मजबूत धुरी रहा।
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विधान परिषद चुनाव 2020 में भाजपा ने पहली बार बड़े पैमाने पर शिक्षक सीटों पर दांव लगाकर गुट के वर्चस्व को चुनौती दी थी। इसी चुनाव में ओम प्रकाश शर्मा को मेरठ सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा से हार मिली। इसके बाद शर्मा गुट का राजनीतिक विस्तार लगातार कमजोर होता गया।
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भाजपा की ओर बढ़ा झुकाव
ओपी शर्मा के निधन के बाद सुरेश कुमार त्रिपाठी को संगठन की कमान मिली। बाद में प्रमोद कुमार मिश्रा कार्यकारी अध्यक्ष बने। इस बीच गुट के नेताओं का भाजपा की ओर झुकाव बढ़ा। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से शर्मा गुट के एमएलसी रहे ध्रुव कुमार त्रिपाठी भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे थे। अब भाजपा ने उन्हें इसी सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। वाराणसी सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा को उम्मीदवार बनाया है।