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यूपी: कन्नौज, सहारनपुर सहित कई मेडिकल कॉलेजों में नीट से हुए दाखिले रद्द, हाईकोर्ट ने शासनादेश किया निरस्त
Sat, 30 Aug 2025 10:26 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Sat, 30 Aug 2025 10:26 PM IST
सार
NEET applications cancelled: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कन्नौज, सहारनपुर ,अंबेडकर नगर, जालौन के सरकारी मेडिकल कालेजों में नीट 2025 परीक्षा के तहत हुए दाखिलों के शासनादेशों को रद्द कर दिए।
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नीट पीजी परीक्षा 2025
- फोटो : A
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कन्नौज, सहारनपुर ,अंबेडकर नगर, जालौन के सरकारी मेडिकल कालेजों में नीट 2025 परीक्षा के तहत हुए दाखिलों के शासनादेशों को रद्द कर दिए। कोर्ट ने आरक्षण अधिनियम 2006 के राहत मेडिकल की सीटें नए सिरे से भरने का राज्य सरकार को आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने इन मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए यूपी सरकार के विशेष आरक्षण शासनादेश को भी निरस्त कर दिया। इस मामले में इन मेडिकल कालेजों की सीटें भरने में में, कानूनी निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देने के शसनादेशों को चुनौती दी गई थी।
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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह अहम फैसला नीट - 2025 की अभ्यर्थी सबरा अहमद की याचिका मंजूर करके दिया। याची ने अंबेडकर नगर, कन्नौज,जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण की स्वीकृत सीमा का मुद्दा उठाकर चुनौती दी थी। याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति और ओ बी सी अभ्यर्थियों को शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने को आरक्षण अधिनियम - 2006 बनाया था।
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याची का कहना था कि इस अधिनियम के तहत मेडिकल कालेजों में हुए दाखिलों में, अधिनियम में दी गई आरक्षण की निर्धारित सीमा 50 फीसदी का उल्लंघन करके सीटें भरी गईं। यानि कि शासनादेश जारी कर 50 फीसदी से अधिक आरक्षण दिया गया, जो कानून की मंशा के खिलाफ था। उधर, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया।
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कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की सीमा तय करने वाले राज्य सरकार के आदेश साफ तौर पर आरक्षण अधिनियम 2006 के खिलाफ हैं। कहा कि सरकार द्वारा आरक्षण की तय सीमा 50 फीसदी के नियम का बगैर किसी कानूनी प्राधिकार के उल्लंघन नहीं किया जा सकता। ऐसे में इन शसनादेशो को तर्कसंगत नहीं ठराया जासकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरक्षण सीमा का उल्लंघन करने वाले वर्ष 2010 से 2015 के बीच जारी छह शसनादेशों को रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन चारों मेडिकल कालेजों की सीटें आरक्षण अधिनियम 2006 के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार की सीटें भरी जाएं। कोर्ट को यह बताए जाने पर कि सीटें भर गई हैं, अदालत ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत इन सीटों को नए सिरे से भरने की करवाई करे।