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यूपी: दुग्ध उत्पादन बढ़ाने को 10 हजार पशु सखियों को किया जाएगा प्रशिक्षित, 25 जिलों में लागू होगा कार्यक्रम
Fri, 12 Jul 2024 10:19 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Fri, 12 Jul 2024 10:19 PM IST
सार
प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए 10 हजार पशु सखियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यह पशु सखियां पशुओं का दूध बढ़ाने के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाएंगी।
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गाय के बछड़ों को दुलारते सीएम योगी। फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
किसानों व पशुपालकों के विकास व स्थाई आय बढ़ाने के लिए प्रदेश में ए-हेल्प कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इसे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और पशुपालन विभाग के संयुक्त प्रयास से चलाया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत अगस्त के पहले हफ्ते में इसको लांच किया जाएगा। शुरुआत में इसे 25 जिलों के 50 विकास खंडों में लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत अगले दो साल में 10 हजार पशु सखियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने व उच्च गुणवत्ता के दुधारु पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी के तहत पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश के 25 जिलों के 50 विकास खंडों में ए-हेल्प कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सालयों के साथ समन्वय बनाना है। ताकि आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाओं जैसे एथनो-वेट प्रथाओं, पशु रोगों की रोकथाम, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं, कृत्रिम गर्भाधान, पशु बीमा आदि को गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराया जा सके।
वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2,000 पशु सखियों को ए-हेल्प एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 10 हजार तक पहुंचाना है। मिशन डायरेक्टर ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य पशु सखियों की आय को बढ़ाना है। इससे उनकी वार्षिक आय 60 हजार रुपये तक बढ़ सकती है। कार्यक्रम के तहत कवर किए गए जिलों और विकास खंडों में मिशन स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
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राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने बताया कि ग्रामीणों की आय बढ़ाने व उच्च गुणवत्ता के दुधारु पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी के तहत पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश के 25 जिलों के 50 विकास खंडों में ए-हेल्प कार्यक्रम का संचालन किया जाएगा। इसका उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सालयों के साथ समन्वय बनाना है। ताकि आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाओं जैसे एथनो-वेट प्रथाओं, पशु रोगों की रोकथाम, समय पर टीकाकरण, कृमिनाशक दवाएं, कृत्रिम गर्भाधान, पशु बीमा आदि को गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराया जा सके।
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वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2,000 पशु सखियों को ए-हेल्प एजेंट के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले दो वर्षों में यह संख्या बढ़कर 10 हजार तक पहुंचाना है। मिशन डायरेक्टर ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य पशु सखियों की आय को बढ़ाना है। इससे उनकी वार्षिक आय 60 हजार रुपये तक बढ़ सकती है। कार्यक्रम के तहत कवर किए गए जिलों और विकास खंडों में मिशन स्टाफ का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।
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