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केंद्रीय बजट 2019 से उम्मीद : हर वर्ग को आम बजट से राहत की आस

Fri, 05 Jul 2019 08:17 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 05 Jul 2019 08:17 AM IST
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union budget 2019 : everyone is expecting relive from budget
बजट
हर वर्ग की केंद्रीय बजट से अपनी-अपनी आस है। कर्मचारी जहां टैक्स में छूट चाहते हैं तो अल्पसंख्यकों को भी बजट से यह उम्मीद है कि उनके लिए शुरू की गई योजनाओं के लिए धन और संचालन में कोई बाधा न आए। चिकित्सकों की सरकार से अपेक्षा है कि चिकित्सा सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन के साथ ही सुविधाएं बढ़ेंगी। महिलाएं किचन के बजट को लेकर सरकार से आशाएं बांधे हैं तो वहीं युवाओं को लगता है कि इस बार सरकार बजट में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के साथ ही शिक्षा ऋण आसानी से मुहैया कराने की राह खोलेगी। 
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अल्पसंख्यकों के कल्याण की योजनाओं के संचालन की हो व्यवस्था
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम से अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए संचालित योजनाएं धन के अभाव में बंद चल रही हैं। वर्तमान सरकार से उम्मीद है कि बजट में पर्याप्त धन की व्यवस्था करेगी। चतुर्थ वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार की न्यूनतम वेतन नीति का स्वागत है। अन्य निगमों की तर्ज पर यहां भी सातवां वेतनमान देने की व्यवस्था हो।
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मोहम्मद वलीम, डीके मिश्रा, पंकज मेहरोत्रा और अब्दुल हलीम, अल्पसंख्यक वित्तीय एवं विकास निगम कर्मचारी 

इनकम टैक्स में मिले पांच लाख तक की छूट
कर्मचारियों को उम्मीद है कि आयकर सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाएगी। वहीं 80-सी में लिमिट तीन लाख रूपये हो। सरकार को कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18 हजार से बढ़ाकर 26 हजार रुपये करने के साथ जीएसटी 18 से घटकर 12 फीसद हो। राज्य कर्मचारियों को कल्याण निगम से मिलने वाले उत्पाद को जीएसटी के दायरे से बाहर किए किया जाए। 
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-सतीश चन्द्र पांडेय, सुशील कुमार बच्चा, मोहम्मद रुम्मान अहमद, सोहित सिंह, मूसा खान। सभी राज्य कर्मचारी 

कृषि क्षेत्र को राहत की आस

इस आम बजट में आम आदमी के लिए ज्यादा कुछ मिलने की उम्मीद नहीं है। कृषि क्षेत्र में अभी और कदम उठाए जा सकते हैं और इस क्षेत्र को उम्मीदें भी हैं। जीएसटी को लेकर व्यापारियों ने भी उम्मीदें बांध रखी हैं, यह देखना होगा कि इसमें कुछ राहत मिलती है कि नहीं। महंगाई पर काबू के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
- सीए पवन कपूर, सीए हर्ष श्रीवास्तव, सीए सौरभ निगम, सीए रवीश चौधरी, सीए रिषभ पल्लव।

ऐसे कदम उठाएं जिससे व्यापार बढ़े
अंतरिम बजट के बाद लगभग स्थिति साफ हो चुकी है। ज्यादा बदलाव के आसार नहीं लगते। फिर भी रीयल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर ये दो ऐसे क्षेत्र हैं जो बजट की ओर उम्मीदें लगाए हैं। इनका व्यापार इस समय डामाडोल स्थिति में है। ये क्षेत्र राहत की उम्मीद कर रहे हैं ताकि व्यापार फिर से बढ़े।
- सीए विवेक मेहरोत्रा, सीए राहुल वर्मा, सीए पवन मित्तल, सीए आरएल बाजपेयी

पेंशनर्स को आयकर पर मिले छूट 

हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि पेंशनर भोगियों को आयकर में छूट मिलेगी। वरिष्ठजनों को 70 वर्ष की आयु के बाद आयकर रिटर्न दाखिल किए जाने की प्रक्रिया से भी मुक्त किया जाना चाहिए। बचत की सीमा 1,50,000 से बढ़ाकर दो लाख रुपये हो। चिकित्सीय भुगतान पर भी आयकर से छूट मिले।
- पेंशनर्स- गुलाब चंद्र सिंघल, श्याम किशोर बाजपेयी, प्रभात मेहरोत्रा व बद्री विशाल श्रीवास्तव 

बुजुर्गों के लिए अलग से प्रावधान हो
हम उम्मीद करते हैं कि इस बार के बजट में सरकार की ओर से बुजुर्गों के लिए अलग से प्रावधान होंगे। रेलवे की तरह सरकार के हर विभाग में बुजुर्गों को आर्थिक व सामाजिक सहयोग के लिए प्रावधान हो। सिलेंडर समेत बुनियादी जरूरत के सामानों को सस्ता किया जाए। बुजुर्गों के लिए पांच लाख तक आयकर छूट के साथ बचत सीमा को दो लाख करने की जरूरत है।
(वरिष्ठजन- टीके श्रीवास्तव, डॉ. चंद्रशेखर निगम, रमा देवी व अशोक वर्मा) 

महिला उद्यमियों को आर्थिक मदद, लोन प्रक्रिया हो आसान

इस बजट में हम सरकार से अपेक्षा करते हैं कि महिलाओं को नौकरियों में 50 प्रतिशत का अनुपात मिलना चाहिए। कमर्चारी कार्ड के आधार पर लोकल कम्युटेशन सुविधाओं में छूट मिले। महिला उद्यमियों को आर्थिक मदद व लोन प्रक्रिया आसान बनाई जाए। महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी दफ्तरों, स्कूलों, कॉलेज और हर स्तर पर आत्म सुरक्षा की शिक्षा फ्री मिलनी चाहिए।
(वर्किंग विमेन- अंकिता सिंह, आंचल अवस्थी, साइश्ता मेराज, मोहिनी बहादुर, अंजना व रौशनी भट्ट)

रसोई सस्ती हो तो बने बात
कभी गैस की कीमतों में इजाफा तो कभी कमी और फिर बढ़ोतरी। इसी तरह रसोई तक आने वाली हर चीज केदाम लगातार बढ़ते ही जाते हैं। डीजल-पेट्रोल की कीमतों के बढ़ने का असर हमारी रसोई पर पढ़ता है। इस दिक्कत से बचाने वाला बजट होना चाहिए।
रेखा शर्मा, कीर्ति अशोक, कल्पना भटनागर, शशिभा सक्सेना, प्रभा उपाध्याय, नीना श्रीवास्तव
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