ट्रस्ट की भूमि, भवन व मंदिरों की खरीद-फरोख्त प्रक्रिया से संघ और सरकार नाराज, आठ करोड़ की एक और रजिस्ट्री पर संदेह
अब भूमि खरीद की आलोचनाओं पर विराम लगाने का रास्ता तलाशा जा रहा है। इसके लिए सबसे बेहतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी मॉडल को माना जा रहा है।
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राममंदिर के विस्तारीकरण के लिए भूमि व भवन खरीदने की श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रक्रिया पर पीएमओ और संघ ने नाराजगी जताई है। अब भूमि खरीद की आलोचनाओं पर विराम लगाने का रास्ता तलाशा जा रहा है। इसके लिए सबसे बेहतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी मॉडल को माना जा रहा है। अब इस मॉडल की तर्ज पर ही रजिस्ट्री से पहले प्रशासनिक एक्सपर्ट की एक मूल्यांकन समिति से जांच कराई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर निगोसिएशन कमेटी विक्रेता से बातचीत कर जमीन की कीमत तय करेगी। इस बीच बीते 18 मार्च को हुई आठ करोड़ रुपये की एक और रजिस्ट्री को लेकर भी ट्रस्ट की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
विहिप के मुख्यालय कारसेवकपुरम से लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय राम कचहरी तक चल रहे मंथन में बृहस्पतिवार को किरकिरी से बचने के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर और कॉरिडोर के विस्तार में अपनाया गया काशी मॉडल छाया रहा। हाल की घटनाओं से ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के आसपास घेरा बनाने की कोशिश करने वाले तमाम प्रॉपर्टी के दलाल अब गायब हो गए हैं। जबकि संघ मुख्यालय नागपुर से लेकर केंद्र व राज्य सरकार समेत कई संतों द्वारा उठाए जा रहे सवाल जिम्मेदारों को परेशान कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अब तक कौशल्या भवन, फकीरेराम मंदिर, दीन कुटी समेत कई मंदिर व भूखंडों को मिलाकर करीब 10 एकड़ की खरीद पर लगभग 70 करोड़ खर्च हो चुके हैं। लेकिन असली चुनौती अब मुस्लिम इलाकों या उनके स्वामित्व वाली भूमि खरीदने को लेकर सामने आएगी। 18.50 करोड़ में 12080 वर्गफीट भूमि के एग्रीमेंट को लेकर पुराने रिकॉर्ड और तहसीलदार कोर्ट से लेकर हाइकोर्ट तक के आदेश खंगाले जा रहे हैं। वक्फ संपत्ति को पैतृक संपत्ति में दर्ज कराने से लेकर 1997 से अब तक की सभी खरीद-फरोख्त की डीड को गैरकानूनी साबित करने और कोर्ट में ट्रस्ट को घेरने के लिए कई लोग सामने आ चुके हैं।
संघ-विहिप के धुर विरोधी द्वारिका व शारदापीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद काशी से अयोध्या आकर विरोधी संतों को एकजुट कर रहे हैं। वहीं रामजन्मभूमि विवाद में पक्षकार रहे अनी अखाड़ा के महंत धर्मदास भी अपनी उपेक्षा से ‘आग में घी’ डालने में जुटे हैं। वक्फ की संपत्ति बहाली में बाबरी एक्शन कमेटी के जिम्मेदारों की सक्रियता भी दिख रही है। ऐसे में सबसे अहम रामजन्मभूमि के पीछे कटरा इलाके के तमाम मुस्लिमों से चल रही उनकी भूमि-भवन की खरीद संबंधी बातचीत में अब काशी मॉडल की जरूरत महसूस की जा रही है।
राजस्व रिकॉर्डों की जांच होती तो फजीहत से बच जाता ट्रस्ट
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट स्वायत्तशासी होने के साथ केंद्र और राज्य के प्रतिनिधियों से भी युक्त है। इसमें गृह मंत्रालय के विशेष सचिव पदेन केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व अपर मुख्य सचिव गृह कर रहे हैं। डीएम अयोध्या पदेन ऑफिसियो ट्रस्टी हैं। नियमानुसार किसी भी भूमि/भवन को खरीदते समय ट्रस्ट को शासन की मदद लेनी चाहिए थी। भूमि का मूल्यांकन एक्सपर्ट से कराने के बाद कीमत का निगोसिएशन करने के लिए भी कमेटी होती तो दो करोड़ की जमीन को 18.50 करोड़ में खरीदने का स्पष्टीकरण वैधानिक नजर आता। ट्रस्ट ने जिन हरीश पाठक और कुसुम पाठक की जमीनें खरीदी हैं, उसका नामांतरण तक नहीं हुआ था। खतौनी तक की जांच नहीं की गई। ट्रस्ट के पक्ष में 18 मार्च को एग्रीमेंट होने के बाद 19 अप्रैल 2021 को नायब तहसीलदार अयोध्या हृदयराम इस भूमि का नामांतरण दर्ज करने का आदेश पारित करते हैं। मामला कोर्ट में जाने पर ट्रस्ट की ओर से 2011 से लेकर 2017 व 2019 के जिन-जिन एग्रीमेंटों का हवाला देकर सफाई दी जा रही है उसे अवैधानिक माना जा सकता है, क्योंकि हर एग्रीमेंट के समय कभी तहसीलदार तो कभी अपर आयुक्त का स्टे ऑर्डर प्रभावी था।
क्या है काशी मॉडल
काशी मॉडल को अंजाम देने वाले तत्कालीन वाराणसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल सिंह अब यहां नगर आयुक्त और अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि यहां आने से पहले शीर्ष स्तर पर अयोध्या में ऐसा ही तरीका अपनाने की चर्चा हुई थी। बताते हैं कि काशी मॉडल पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत था, किसी की जमीन लेने से पहले मूल्यांकन समिति अपनी रिपोर्ट देती थी। इसमें एसडीएम, सब रजिस्ट्रार, तहसीलदार-कानूनगो और पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर शामिल होते थे। इनकी रिपोर्ट पर निगोसिएशन समिति बातचीत करके अनुमोदन करती थी। इस तरह से ट्रस्ट भी प्रशासन से मूल्यांकन कराकर किरकिरी से बच सकता है।
ट्रस्ट में भी काशी की तरह समिति बनाने पर मंथन : वेदांती
पूर्व सांसद रामविलास दास वेदांती कहते हैं कि ट्रस्ट ने कोई घोटाला नहीं किया है, चंपत राय की इमानदारी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। अब ट्रस्ट बाजार मूल्य तय करने और निगोसिएशन को लेकर जिम्मेदार व एक्सपर्ट की कमेटी बनाने पर विचार कर रहा है। जल्द ही काशी जैसा मॉडल देखने को मिलेगा। मंथन चल रहा है। रामभक्तों के विरोधी ही ट्रस्ट पर सवाल उठाते हैं, बाकी सबको सच्चाई पता है।
भ्रष्ट है ट्रस्ट : महंत धर्मदास
निर्वाणी अनी अखाड़ा के महंत और राममंदिर विवाद में पक्षकार रहे धर्मदास बेहद खफा हैं। उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा भक्तों के दान से बने अयोध्या के मठ-मंदिरों को गलत तरीके से खरीदने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कौशल्या भवन, सुमित्रा भवन, कैकेयी भवन, फकीरे राम, दीन मंदिर खरीद चुके हैं और जन्मभूमि से दो किमी दूर तक जमीन खरीदी जा रही है, इसका क्या मतलब है। उन्होंने कहा कि दान के पैसे से भव्य राममंदिर और साधु-संतों व भक्तों के लिए काम होने चाहिए। अन्य संत-महंतों को बेदखल करना पाप है।