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नपेंगे BSP, BJP के ठेकेदार विधायक!

Sat, 04 Jan 2014 01:00 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 04 Jan 2014 01:00 PM IST
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unfavourable situation for 2 MLAs

विधायक बनने के बाद भी ठेकेदारी कर रहे बसपा विधायक उमाशंकर सिंह व भाजपा विधायक बजरंग बहादुर पर शिकंजा कस रहा है।

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लोकायुक्त न्यायमूर्ति एनके मेहरोत्रा ने इन विधायकों के खिलाफ मिली शिकायतों की प्रारंभिक जांच के बाद इनके खिलाफ मामला दर्ज करते हुए औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है।

दोनों विधायकों को नोटिस जारी कर 15 जनवरी तक जवाब मांगा गया है। लोकायुक्त ने विधायकों के खिलाफ जांच शुरू किए जाने की सूचना मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी भेज दी है।

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बलिया के सुभाष चंद्र सिंह उर्फ क्रांतिकारी ने लोकायुक्त से उमाशंकर सिंह की शिकायत करते हुए विधायक बनने के बाद भी ठेकेदारी करने का आरोप लगाया है।

शिकायत में उमाशंकर सिंह के कई साझीदारों का उल्लेख करते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी व टी. राम की भी हिस्सेदारी का आरोप लगाया गया है।

प्रारंभिक जांच में नसीमुद्दीन व टी. राम के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं लेकिन इसकी पुष्टि जरूर हुई है कि विधायक बनने के बाद भी उमाशंकर ठेकेदारी कर रहे हैं।
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जांच में पता चला है कि 2009-10 से 2013 तक उमाशंकर की फर्म छात्र शक्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर को बलिया वृत्त में 83 ठेके मिले।

विधायक बनने के बाद सपा के डेढ़ साल के शासनकाल में उन्हें 20 ठेके और मिल गए।

इनमें से 29 के काम पूरे नहीं हुए हैं। इसी तरह उमाशंकर की फर्म के पास इलाहाबाद वृत्त में 10 काम पहले के थे जबकि विधायक बनने के बाद नौ काम और आवंटित किए गए।

उनकी फर्म को बस्ती, देवरिया, बांदा व सोनभद्र वृत्त में दिए गए कार्यों में से भी 10 अभी पूरे नहीं हुए हैं। जांच में पता चला है कि पहले उमाशंकर छात्र शक्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर के एकमात्र प्रोप्राइटर थे।


मुख्य अभियंता मुख्यालय-2 एचएन पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार 16 मार्च 2007 को उमाशंकर 30 जून 2009 तक के लिए फर्म के सोल प्रोप्राइटर बने थे। 10 सितंबर 2009 को इसका नवीनीकरण कराकर वह 30 जून 2012 तक के लिए सोल प्रोप्राइटर बन गए। फर्म के नवीकरण की प्रक्रिया भी जांच केदायरे में है।


इसी तरह भाजपा विधायक बजरंग बहादुर के भी गोरखपुर वृत्त में ठेकेदारी करने की पुष्टि प्रारंभिक जांच में हुई है। इसमें तीन काम पुराने हैं तथा एक काम अधूरा है।


लोकायुक्त ने दोनों विधायकों को उन्हें आवंटित और लंबित ठेकों की सूची के साथ नोटिस भेजकर उनसे 15 जनवरी तक अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है।

इस बीच लोकायुक्त ने बलिया स्थित भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के शाखा प्रबंधकों को उमाशंकर सिंह के खाते केब्यौरे केसाथ 6 जनवरी को तलब किया है ताकि यह पता किया जा सके कि फर्म छात्र शक्ति इन्फ्रास्ट्रक्चर को किया जा रहा भुगतान किसके खाते में जा रहा है।


जा सकती है विधानसभा की सदस्यता

लोकायुक्त ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 (क) के प्रावधानों के तहत दोनों विधायकों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। इस धारा में स्पष्ट है कि विधायक निर्वाचित होने से पहले का कोई काम अगर विधायक बनने के बाद भी अधूरा रहता है तो यह माना जाएगा कि वह ठेकेदारी कर रहा है।

अगर इसकी पुष्टि हो जाती है तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। वहीं, संविधान के अनुच्छेद 191 के प्रावधानों के अनुसार भी विधायकों को विधानसभा की सदस्यता से हाथ धोना पड़ सकता है।



ऐसे मामले में सदस्य को अयोग्य ठहराने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष या मुख्यमंत्री को तो नहीं है लेकिन लोकायुक्त की जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्यपाल भारत निर्वाचन आयोग को रिपोर्ट भेज सकते हैं और आयोग इस मामले पर सुनवाई करने के बाद सदस्यता केबारे में फैसला सुना सकता है।

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