दवा का अंडर और ओवरडोज कर सकता है बीमार
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खुद दवा खाना, जरूरी खुराक से कम या ज्यादा दवा खाने से फायदे की जगह नुकसान ज्यादा होता है। इससे दवा के प्रति शरीर में रजिस्टेंस पैदा हो जाता है और बीमारी में दवा असर नहीं करती।
ये जानकारी इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन (आईपीए) की यूपी शाखा द्वारा ‘रिस्पांसिबल यूज ऑफ मेडिसिंस: रोल ऑफ फार्मासिस्ट्स’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में आरए गुप्ता ने दी।
रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय में राष्ट्रीय फार्मेसी सप्ताह के अंतर्गत आयोजित संगोष्ठी में आईपीए के महामंत्री आरए गुप्ता ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए देश व प्रदेश के सभी मेडिकल स्टोर्स की जानकारी सरकार की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाए।
सभी रिटेल व होलसेल मेडिकल स्टोर्स पर डिप्लोमा डिग्रीधारी एलोपैथिक फर्मासिस्टों की मौजूदगी तय की जाए।
अस्पतालों में बनें फार्माकोविजिलेंस सेंटर
नए लाइसेंस केवल पंजीकृत फार्मासिस्टों को ही दिया जाए। जिला चिकित्सालयों की तरह ही प्रदेश के सभी क्रय अधिकारियों के अंतर्गत फॉर्मेसी ऑफिसर के पदर सृजित किए जाएं।
इन्हें परचेज व इन्वेंट्री कंट्रोल का नोडल ऑफिसर बनाया जाए। उत्तराखंड की तरह सभी स्वास्थ्य उपकेंद्र पर फार्मासिस्टों की नियुक्ति की जाए।
उन्होंने कहा कि अंडरडोज, ओवरडोज प्रिस्क्रिप्शन की मॉनीटरिंग के लिए सभी बड़े चिकित्सालय स्तर पर एक फार्माकोविजिलेंस सेंटर बनाया जाए।
इस मौके पर आईपीए के उपाध्यक्ष पीएल गुप्ता, संयुक्त सचिव सुनीता सचान, इंडियन हॉस्पिटल फार्मेसिस्ट संघ के अध्यक्ष एसएम कबीर, डिप्लोमा फार्मासिस्ट राजपत्रित अधिकारी संघ के महामंत्री अरविंद वर्मा, जेके सचान मौजूद थे।