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BBAU दीक्षांत समारोह: गलत व्यवहार का आरोप लगाते हुए दो दलित छात्रों ने मेडल लेने से किया इंकार

Thu, 14 Dec 2017 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 14 Dec 2017 09:35 AM IST
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two BBAU students denied to take medal in convocation day.
- फोटो : amar ujala

अक्सर विवादों में रहने वाला बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। इस बार मामला दीक्षांत समारोह से जुड़ा है। दीक्षांत समारोह से दो दिन पहले विश्वविद्यालय के दो मेडलिस्टों ने कुलपति प्रो. आरसी सोबती पर दलित छात्रों का उत्पीड़न और गलत व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मेडल लेने से इंकार कर दिया है। इन विद्यार्थियों ने दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिएं अपना रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया है। बता दें कि दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति रामनाथ कोविद होंगे।

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विश्‍वविद्यालय के छात्र, साल 2016 के पास आउट व एमफिल मैनेजमेंट के गोल्ड मेडलिस्ट सुधाकर पुष्कर ने आरोप लगाया कि दलित विद्यार्थियों-अधिकारियों के साथ ठीक व्यवहार नहीं किया जाता।
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उन्होंने कहा कि मुझे कुलपति प्रो. आरसी सोबती के हाथों मेडल लेना ही नहीं है इसलिए मैंने दीक्षांत में शामिल होने के लिए आवेदन नहीं किया है। सुधाकर ने कहा कि मेरी अपेक्षा है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविद हमारी बात सुने कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति विद्यार्थियों से लड़ रहा है।
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दलित छात्रों का उत्पीड़न सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि हमने उनकी नीतियो के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई है। क्या विद्यार्थियों के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है? सुधाकर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन एससी/एसटी कैटेगरी के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं देना चाहता। कोर्ट से इस पर निर्णय हुआ तो सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने की बात करते हैं। उनकी नीतियां दलित विरोधी हैं इसलिए मैंने उनके हाथ से सम्मान नहीं लेने का निर्णय लिया है।

दीक्षांत में शामिल होने के लिए नहीं किया आवेदन

two BBAU students denied to take medal in convocation day.
बीबीएयू - फोटो : amar ujala

मूलत: लखीमपुर खीरी निवासी सुधाकर ने बरेली की इनवर्टिस यूनिवर्सिटी से एमबीए और लखीमपुर खीरी से स्नातक की पढ़ाई की है। वहीं 2016 के एमसीए टॉपर रामेंद्र नरेश के भी इसी वजह से मेडल के बहिष्कार की चर्चा है।

रजिस्ट्रार ने भी लगाए थे आरोप
विश्वविद्यालय में अक्सर दलित छात्रों व अधिकारियों के उत्पीड़न को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं। इसे लेकर पूर्व रजिस्ट्रार सुनीता चंद्रा की कई बार कुलपति से सीधी नोकझोक हुई है। मंत्रालय और यूजीसी में भी इसकी शिकायत हुई है। पिछले दिनों बहराइच की सांसद साध्वी सावित्री बाई फूले ने भी प्रेसवार्ता कर कुलपति पर आरोप लगाए थे।

मामले पर रजिस्ट्रार प्रो. आरबी राम ने कहा, हमें किसी छात्र के मेडल न लेने की सूचना नहीं है। विवि में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता है। कुलपति छात्रों की खुद समस्या सुनते हैं। छात्र अगर गरिमा में रहकर काम करते हैं तो ठीक है। वे तथ्यों के साथ बात करें। वे शांतिपूर्ण धरना दें लेकिन विवि की छवि न खराब करें। प्रशासनिक काम में बाधा नहीं डालनी चाहिए। छात्रों को गलत भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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