{"_id":"615617548ebc3e2be403ce02","slug":"twelve-department-of-kgmu-are-not-in-mci-standered-lucknow-news-lko5980451132","type":"story","status":"publish","title_hn":"केजीएमयू के 12 विभाग एनएमसी के मानकों पर खरे नहीं, पीजी पाठ्यक्रमों पर संकट के बादल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केजीएमयू के 12 विभाग एनएमसी के मानकों पर खरे नहीं, पीजी पाठ्यक्रमों पर संकट के बादल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमाटोलॉजी एंड सर्जरी विभाग में एमएस पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने खारिज कर दिया है। इसके बाद विवि के कई अन्य विभागों के पीजी पाठ्यक्रमों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। विश्वविद्यालय के कई विभागों में इस समय पीजी पाठ्यक्रम चल रहे हैं, लेकिन 12 विभागों में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा निर्धारित संख्या में शिक्षक नहीं हैं।
एनएमसी की शर्तों के अनुसार सभी क्लीनिकल या सुपर स्पेशियलिटी विभाग में न्यूनतम एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर तथा एक असिस्टेंट प्रोफेसर होना अनिवार्य है। ये तीनों उसी डिसिप्लिन के होने चाहिए जिसका विभाग हो। इसके बावजूद केजीएमयू में इस समय 12 विभागों में निर्धारित संख्या में शिक्षक ही नहीं हैं। इनमें से कई विभाग में पीजी पाठ्यक्रम संचालित हैं। ऐसे में एनएमसी के अगले निरीक्षण के समय इन विभागों को पाठ्यक्रम संचालन से पहले नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।
इन विभागों में निर्धारित संख्या से कम शिक्षक
कार्डियक एनेस्थीसिया, क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन, इंडाक्राइनोलॉजी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, मेडिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी, मेडिकल अंकोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी, थोरेसिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी।
विज्ञापन
उधार के विभागाध्यक्षों के सहारे व्यवस्था
केजीएमयू में करीब छह विभाग ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष ही नहीं हैं। इनकी व्यवस्था में दूसरे विभाग के शिक्षक विभागाध्यक्ष के रूप में संभाले हैं। नेफ्रोलॉजी, इंडाक्राइनोलॉजी और स्पोर्ट्स मेडिसिन ऐसे ही विभाग हैं। इस तरह उधर के विभागाध्यक्ष अपने विभाग के साथ दूसरे विभाग की भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
निरीक्षण से पहले पूरे कर लेंगे मानक
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि जिन विभागों में निर्धारित संख्या में शिक्षक नहीं हैं, वहां लगातार भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। एनएमसी के निरीक्षण के समय तक मानक पूरे कर लिए जाएंगे। इसलिए परेशानी की कोई बात नहीं है।
विज्ञापन
एनएमसी की शर्तों के अनुसार सभी क्लीनिकल या सुपर स्पेशियलिटी विभाग में न्यूनतम एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर तथा एक असिस्टेंट प्रोफेसर होना अनिवार्य है। ये तीनों उसी डिसिप्लिन के होने चाहिए जिसका विभाग हो। इसके बावजूद केजीएमयू में इस समय 12 विभागों में निर्धारित संख्या में शिक्षक ही नहीं हैं। इनमें से कई विभाग में पीजी पाठ्यक्रम संचालित हैं। ऐसे में एनएमसी के अगले निरीक्षण के समय इन विभागों को पाठ्यक्रम संचालन से पहले नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
इन विभागों में निर्धारित संख्या से कम शिक्षक
कार्डियक एनेस्थीसिया, क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी, इमरजेंसी मेडिसिन, इंडाक्राइनोलॉजी, ऑर्गन ट्रांसप्लांट, मेडिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी, मेडिकल अंकोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, स्पोर्ट्स मेडिसिन, सर्जिकल गैस्ट्रोएंटोलॉजी, थोरेसिक सर्जरी और वैस्कुलर सर्जरी।
विज्ञापन
उधार के विभागाध्यक्षों के सहारे व्यवस्था
केजीएमयू में करीब छह विभाग ऐसे हैं जिनमें विभागाध्यक्ष ही नहीं हैं। इनकी व्यवस्था में दूसरे विभाग के शिक्षक विभागाध्यक्ष के रूप में संभाले हैं। नेफ्रोलॉजी, इंडाक्राइनोलॉजी और स्पोर्ट्स मेडिसिन ऐसे ही विभाग हैं। इस तरह उधर के विभागाध्यक्ष अपने विभाग के साथ दूसरे विभाग की भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
निरीक्षण से पहले पूरे कर लेंगे मानक
केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि जिन विभागों में निर्धारित संख्या में शिक्षक नहीं हैं, वहां लगातार भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। एनएमसी के निरीक्षण के समय तक मानक पूरे कर लिए जाएंगे। इसलिए परेशानी की कोई बात नहीं है।